हापुड़ विधानसभा सीट - Hapur

हापुड़

वर्तमान विधायक
श्री विजयपाल (आढ़ती)
जिला
Hapur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
2,45,637
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
मेरठ
हापुड़ विधानसभा सीट
हापुड़ उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में से एक है और हापुड़ जिले का हिस्सा है। यह मेरठ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है और 1956 के परिसीमन आदेश के बाद 1957 से अस्तित्व में है। यह क्षेत्र शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का मिश्रण है, जिसमें हापुड़ शहर और इसके आस-पास के कई गांव और कस्बे शामिल हैं।
जनसंख्या (2011 की जनगणना)
विधानसभा संख्या: 59,
आरक्षित सीट: एससी आरक्षित
जिले की कुल जनसंख्या: 13,38,211
शहर की जनसंख्या: 2,62,983
लिंगानुपात: 885/1000
साक्षरता दर: 74.03%
धार्मिक और सामाजिक विभाजन  (शहर)
हिंदू: 66.27%
मुस्लिम:32.12
अन्य: 2% से कम
अनुसूचित जातियां: 21.92% (जिला)
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता:  2,45,637
विजेता: विजयपाल (आढ़ती) (भाजपा)
वोट शेयर: 39.8%
उपविजेता: गजराज सिंह (रालोद)
मतदान प्रतिशत: 66.8%
हापुड़ विधानसभा सीट, जो अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अहम सीटों में गिनी जाती है। यहां का चुनावी मुकाबला लंबे समय से बीजेपी, कांग्रेस और बीएसपी के बीच होता रहा है। 1980 से लेकर 2012 तक कांग्रेस का खासा दबदबा रहा, जिसमें गजराज सिंह ने कई बार जीत हासिल की। वहीं, 2002 और 2007 में बसपा ने भी जीत दर्ज की। लेकिन 2017 से तस्वीर बदली और बीजेपी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत कर ली नतीजा यह कि विजय पाल (आडती) ने लगातार दो बार जीत हासिल की है। जातीय समीकरणों में दलित वोटर सबसे अहम भूमिका निभाते हैं, जबकि जाट, मुस्लिम और किसान वर्ग भी चुनाव का रुख तय करते हैं। हालिया चुनावों में कांग्रेस और बसपा का असर कम हुआ, जबकि रालोद ने 2022 में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। कुल मिलाकर, मुकाबला बीजेपी और रालोद के बीच था, जिसमें बीजेपी ने करीब सात हजार वोटों से जीत हासिल की। जातीय समीकरणों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं, किसानों की समस्याओं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के फैसलों को प्रभावित करते रहे हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
विजयपाल आढ़ती भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और हापुड़ विधानसभा सीट (एससी) से लगातार दो बार, 2017 और 2022 में विधायक चुने गए हैं। उनका जन्म 25 मई 1971 को हुआ था और उनके पिता का नाम हरिश चंद है। उन्होंने 1987 में एसएसवी इंटर कॉलेज, हापुड़ से हाईस्कूल पास किया। पेशे से वे कृषि व्यवसाय से जुड़े हैं और हापुड़ की नवीन मंडी में सब्जियों की आढ़त का काम करते हैं, जिससे उनकी पहचान एक जमीन से जुड़े नेता की बनी हुई है। 2011 से बीजेपी में सक्रिय हैं और अनुसूचित मोर्चा में जिलाध्यक्ष व जिला महामंत्री जैसे पदों पर रह चुके हैं। 2017 में उन्होंने पहली बार विधायक का चुनाव जीता और करीब 20 साल बाद बीजेपी ने हापुड़ सीट पर वापसी की। दलित समुदाय से आने वाले विजयपाल सामाजिक मुद्दों पर भी खुलकर बोलते हैं। जहां तक आपराधिक रिकॉर्ड की बात है, 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं।
हापुड़ विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में हापुड़ विधानसभा क्षेत्र में लोगों ने बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर लगातार आवाज उठाई है। सड़कें, सीवर, जल निकासी और बिजली जैसी ज़रूरी चीजों की हालत ठीक न होने से आम जनजीवन प्रभावित रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे के दौरान भी इन विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई। कानून-व्यवस्था, खासकर महिलाओं की सुरक्षा और चोरी-डकैती जैसी घटनाएं लोगों की बड़ी चिंता बनी रहीं। हापुड़ एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र है, लेकिन यहां रोजगार के मौके कम होने और व्यापार में आई सुस्ती को लेकर व्यापारियों और युवाओं में नाराज़गी देखी गई। ग्रामीण इलाकों में किसानों को गन्ने का भुगतान, सिंचाई और फसलों की सही कीमत न मिलने की परेशानी रही, जिससे आंदोलन का माहौल भी बना। सफाई व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों की स्थिति को लेकर भी लोगों ने कई बार नाराज़गी जताई, खासकर कोरोना के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सामने आई। इसके अलावा, हापुड़ की मिली-जुली आबादी के चलते सामाजिक तनाव और साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की चुनौती भी प्रशासन के सामने रही।

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