हरगांव विधानसà¤à¤¾ सीट - Sitapur
हरगांव |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री सुरेश राही |
| जिला | Sitapur |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | धौरहरा |
हरगांव विधानसभा सीट
हरगांव उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की एक महत्वपूर्ण अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है। यह धौरहरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और 1967 से अलग सीट के रूप में अस्तित्व में है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: सीतापुर
विधानसभा क्रमांक: 147
लोकसभा क्षेत्र: धौरहरा
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: लगभग 3,20,000
साक्षरता दर: अनुमानित 61%
लिंग अनुपात: 918/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 79%
मुस्लिम: लगभग 20%
अन्य समुदाय: 1%
अनुसूचित जाति: लगभग 23%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,20,737
विजेता: सुरेश रही (भाजपा)
वोट 52.9%
उपविजेता: रामहेत भारती (सपा)
मतदान प्रतिशत: 67.9%
हरगांव विधानसभा सीट, जो 1967 में अस्तित्व में आई और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। शुरुआती दौर में कांग्रेस, जनता पार्टी और बाद में बीएसपी का दबदबा रहा, खासकर 1996 से 2017 तक बीएसपी ने लगातार मजबूत पकड़ बनाए रखी। हालांकि 1989 से 1993 के बीच भाजपा के दौलत राम ने लगातार जीत दर्ज की थी और 1996 में सपा ने भी जीत हासिल की थी। बीएसपी के रामहेत भारती 2002, 2007 और 2012 में लगातार विजयी रहे, लेकिन 2017 से परिदृश्य बदल गया, जब भाजपा के सुरेश राही ने बीएसपी और सपा दोनों को मात देकर पार्टी का वर्चस्व स्थापित किया। यह रुझान 2022 में भी जारी रहा, जब सुरेश राही ने सपा उम्मीदवार रामहेत भारती को 38,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से हराकर भाजपा की बढ़त और मजबूत कर दी। उस चुनाव में भाजपा को 52.46% वोट मिले, जबकि सपा को 35.31% और बीएसपी तीसरे स्थान पर सिमट गई। इन नतीजों ने स्पष्ट कर दिया कि हरगांव में अब मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच ही सिमट गया है, जबकि बीएसपी का असर लगातार घटता जा रहा है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
हरगांव (सीतापुर) से भाजपा विधायक सुरेश राही लगातार दो बार से जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 50 वर्षीय राही परास्नातक शिक्षित हैं और कृषि व परिवहन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है, क्योंकि उनके पिता केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रह चुके हैं। 2017 से विधायक बनने के बाद उनकी छवि अपेक्षाकृत साफ रही है, हालांकि चुनाव आयोग को दिए शपथपत्र में उन्होंने एक आपराधिक मामला दर्ज होने की जानकारी दी है, जिसे गंभीर प्रकृति का नहीं माना गया।
हरगांव विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में हरगांव विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए बाढ़, ग्रामीण विकास, शिक्षा, दलित कल्याण और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे सबसे अहम रहे हैं। हर साल दो दर्जन से अधिक गाँव बाढ़ की चपेट में आते हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लड़कियों की शिक्षा के लिए इंटर कॉलेज की कमी अब भी बड़ी चिंता बनी हुई है, खासकर हरगांव कस्बे और ब्लॉक स्तर पर इसकी माँग लंबे समय से उठ रही है। दलित बहुल इस क्षेत्र में ग्रामीण विकास, रोजगार और सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन लगातार चर्चा में रहा है। बुनियादी ढाँचे जैसे सड़क, स्वास्थ्य, बिजली और पानी निकासी की समस्याएँ आज भी पूरी तरह हल नहीं हो पाई हैं। राजनीतिक तौर पर यह सीट हमेशा से ही खास मानी जाती रही है, जहाँ बीएसपी और बीजेपी का संघर्ष प्रमुख रहा है। बीएसपी के गढ़ में बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत की है, लेकिन विपक्ष विकास को लेकर लगातार सवाल उठाता रहा है। इन सभी मुद्दों ने यहाँ की राजनीति और आम लोगों के जीवन को गहराई से प्रभावित किया है।