हस्तिनापुर विधानसà¤à¤¾ सीट - Meerut
हस्तिनापुर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री दिनेश कुमार |
| जिला | Meerut |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बिजनौर |
हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र
हस्तिनापुर विधानसभा उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है और यह बिजनौर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के साथ-साथ जातीय और राजनीतिक दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। हस्तिनापुर विधानसभा सीट 1957 में गठित हुई थी और 1967 से अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
जनसंख्या (जनगणना 2011):
जनसंख्या: लगभग 5,66,000
जिला: मेरठ
विधानसभा क्रमांक: 45
लोकसभा क्षेत्र: बिजनौर
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: लगभग 5,66,000
साक्षरता दर: लगभग 73.5% (नगर पंचायत)
लिंग अनुपात: 888/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (अनुमानित):
हिंदू: 91.47%
मुस्लिम: 1.7%
अनुसूचित जाति: 20% से अधिक
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान:
2022 चुनावी परिणाम:
कुल मतदाता: 2,29,605
विजेता: डॉ. दिनेश खटीक (भाजपा)
वोट शेयर: 46.9%
उपविजेता: योगेश वर्मा (सपा)
मतदान प्रतिशत: 66.9%
हस्तिनापुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक खास पहचान रखती है, जिसे अक्सर 'राजनीतिक टोटका' वाली सीट कहा जाता है क्योंकि आमतौर पर यहां से जिस पार्टी का विधायक जीतता है, वही पार्टी प्रदेश में सरकार बनाती है। 1957 से लेकर 1985 तक कांग्रेस का वर्चस्व रहा और जब-जब उसके विधायक जीते, प्रदेश में उसकी सरकार बनी। इसके बाद 2002 में सपा के प्रभुदयाल वाल्मीकि, 2007 में बसपा के योगेश वर्मा, 2012 में फिर सपा और 2017 में भाजपा के दिनेश खटीक जीतकर विधानसभा पहुंचे और उन्हीं की पार्टियों ने प्रदेश की सत्ता संभाली। 2022 में भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भाजपा के दिनेश खटीक ने सपा के योगेश वर्मा को करीब 7,312 वोटों से हराया और वे इस वक्त राज्य सरकार में राज्यमंत्री हैं। इस सीट की एक और दिलचस्प बात यह है कि यहां से लगातार दो बार जीत दर्ज करना बहुत दुर्लभ माना जाता है, हर चुनाव में नया चेहरा उभरता है। राजनीतिक मुकाबला आम तौर पर भाजपा, सपा, बसपा और कभी-कभार कांग्रेस के बीच होता है। सामाजिक रूप से यह सीट भी विविधता से भरी है। मुस्लिम, जाटव, गुर्जर, यादव, वाल्मीकि, पंडित जैसे समुदायों की मजबूत भागीदारी यहां के चुनावी परिणामों को तय करती है। ऐसे में हस्तिनापुर सिर्फ ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि चुनावी लिहाज से भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता रहा है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
डॉ. दिनेश खटीक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रमुख नेता हैं और फिलहाल उत्तर प्रदेश की 17वीं विधानसभा में हस्तिनापुर सीट से विधायक के रूप में कार्यरत हैं। वे दलित समुदाय से आते हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से उनका और उनके परिवार का पुराना जुड़ाव रहा है। दिनेश खटीक ने 2017 में पहली बार चुनाव जीतकर बसपा के योगेश वर्मा को 36,062 वोटों से हराया और 2022 में फिर से जीत दर्ज की। योगी सरकार में उन्होंने जल शक्ति और बाढ़ नियंत्रण विभाग में राज्य मंत्री के रूप में भी सेवाएं दीं। विकास के लिहाज से उन्होंने अपने क्षेत्र में कई पहल की हैं। जैसे राजकीय बालिका डिग्री कॉलेज का निर्माण, गौ आश्रय स्थल बनवाना और बाढ़ राहत परियोजनाओं को मंज़ूरी दिलाना। उन्होंने हस्तिनापुर को चंडीगढ़ की तर्ज पर विकसित करने का भी वादा किया है। 2022 चुनावी दस्तावेजों के अनुसार, उनके खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज हैं।
हस्तिनापुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों (2019 से 2024) में हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र, जो महाभारतकालीन विरासत और पांडवों की राजधानी के रूप में जाना जाता है, राजनीतिक और सामाजिक रूप से काफी अहम रहा है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और दिलचस्प बात यह है कि यहां किसी विधायक का लगातार दो बार जीतना अब तक दुर्लभ रहा है। 2022 में भाजपा के दिनेश खटीक ने समाजवादी पार्टी के योगेश वर्मा को करीब 7,300 वोटों से हराकर जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट में मंत्री बनकर क्षेत्र में उनका प्रभाव और बढ़ा है। यहां लगभग 1 लाख मुस्लिम और 60 हजार दलित मतदाता हैं, साथ ही गुर्जर, जाट और सिख समुदाय की भी मजबूत उपस्थिति है, जो चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभाते हैं। स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और डॉक्टरों की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं लगातार सामने आती रही हैं। साथ ही, महाभारतकालीन धार्मिक स्थलों को संरक्षित करने और पर्यटन को बढ़ावा देने की मांग भी उठी है। क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास, खासकर रेल सेवा के विस्तार की आवश्यकता महसूस की गई है। इसके अलावा, हस्तिनापुर को मेरठ से अलग कर नया जिला बनाए जाने की मांग भी समय-समय पर जोर पकड़ती रही है।