हाथरस विधानसभा सीट - Hathras

हाथरस

वर्तमान विधायक
श्रीमती अन्जुला सिंह माहौर
जिला
Hathras
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
2,61,283
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
हाथरस
हाथरस विधानसभा सीट
हाथरस विधानसभा (विधानसभा क्रमांक 78) उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग की महत्वपूर्ण सीट है। यह हाथरस जिले का हिस्सा है और हाथरस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यहां शहरी और ग्रामीण आबादी का मिश्रण पाया जाता है और क्षेत्र ऐतिहासिक, जातीय व सामाजिक दृष्टि से विविध है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
- जिला: हाथरस
- विधानसभा क्रमांक: 78
- लोकसभा क्षेत्र: हाथरस
- आरक्षण: अनुसूचित जाति
- अनुमानित आबादी: लगभग 1,564,708 (जिला)
- साक्षरता दर: 71.6% (जिला औसत)
- लिंग अनुपात: 871/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 93% (जिला)
मुस्लिम: लगभग 6%
अन्य समुदाय: करीब 1%
अनुसूचित जाति: 24.77% (जिला)
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,61,283
विजेता: अंजुला सिंह महौर (भाजपा)
वोट शेयर: 59.2%
उपविजेता: संजीव कुमार (बसपा)
मतदान प्रतिशत: 63.0%
हाथरस विधानसभा सीट, जो अब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक अहम राजनीतिक जमीन रही है। परिसीमन से पहले यह सामान्य सीट थी और 1996 से 2012 तक बसपा का यहां मजबूत दबदबा रहा रामवीर उपाध्याय ने तीन बार जीत दर्ज कर पार्टी की पकड़ मजबूत की। 2012 में सीट आरक्षित होने के बाद भी बसपा ने गेंदालाल चौधरी को उतारकर जीत बरकरार रखी। लेकिन 2017 में हालात बदले, जब भाजपा ने पहली बार हरिशंकर माहौर को टिकट दिया और उन्होंने बसपा के ब्रजमोहन राही को भारी अंतर से हराकर सीट पर भाजपा का झंडा फहराया। इसके बाद से भाजपा की पकड़ लगातार मजबूत होती गई, खासकर दलित और सवर्ण (ब्राह्मण-महावर) मतदाताओं के समर्थन के कारण। 2022 में हरिशंकर माहौर ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की। करीब 1 लाख वोटों के रिकॉर्ड अंतर से। इस चुनाव में भाजपा और बसपा के बीच सीधा मुकाबला दिखा, जबकि सपा और कांग्रेस अब पिछड़ती नज़र आईं। साफ छवि और विकास के वादों ने भाजपा को स्थानीय जनता का भरोसा दिलाया और हाथरस में पार्टी की स्थिति पहले से कहीं ज्यादा मज़बूत हो गई।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
अंजुला सिंह माहौर भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय और प्रभावशाली नेता हैं, जो 2022 में हाथरस (एससी आरक्षित) विधानसभा सीट से विधायक चुनी गईं। वे न केवल क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय हैं, बल्कि पार्टी संगठन में भी अहम भूमिकाएं निभा रही हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा की प्रदेश मंत्री होने के साथ-साथ महिला मोर्चा की सह प्रभारी और मथुरा महानगर की प्रभारी जैसी जिम्मेदारियां उनके पास हैं। सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में उनकी लगातार भागीदारी ने उन्हें एक मजबूत और ज़मीनी नेता के रूप में पहचान दिलाई है। 2022 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार उनकी उम्र लगभग 52 वर्ष है। जहां तक उनके आपराधिक रिकॉर्ड की बात है, तो 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ कोई गंभीर मामला दर्ज नहीं है।
हाथरस विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में हाथरस विधानसभा क्षेत्र के सामने कई गंभीर और संवेदनशील मुद्दे लगातार उभरकर सामने आए, जिन्होंने लोगों की ज़िंदगी को गहराई से प्रभावित किया। क्षेत्र में न तो कोई मेडिकल कॉलेज है और न ही कोई बड़ा अस्पताल, जिससे गंभीर बीमारियों की हालत में लोगों को अलीगढ़ या आगरा जैसे शहरों की ओर भागना पड़ता है। वहीं, स्थानीय युवाओं को रोजगार की तलाश में बाहर जाना पड़ रहा है क्योंकि हींग और रंग जैसे पारंपरिक उद्योगों के बावजूद कोई बड़ा औद्योगिक विकास नहीं हो पाया। बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो जर्जर सड़कें, जल निकासी की समस्या, शुद्ध पेयजल और सीवर व्यवस्था की बदहाली आज भी आम जनजीवन की चुनौती है। ग्रामीण इलाकों में छुट्टा पशुओं ने किसानों की फसलें चौपट कीं, वहीं महिलाओं की सुरक्षा, खासकर 'हाथरस की बेटी' कांड के बाद, न केवल एक भावनात्मक मुद्दा बना, बल्कि प्रशासन और कानून-व्यवस्था की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े किए। चुनावों में फर्जीवाड़े की घटनाओं ने लोकतांत्रिक भरोसे को भी झटका दिया। युवाओं की नाराज़गी, बाहरी उम्मीदवारों के चयन पर असंतोष और जातीय असंतुलन के कारण विकास की दिशा और रफ्तार पर लगातार सवाल उठते रहे। इन सभी पहलुओं ने मिलकर हाथरस की राजनीति में बदलाव की मांग को और तेज़ किया है।

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