जेवर विधानसà¤à¤¾ सीट - Gautam Budh Nagar
जेवर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री धीरेन्द्र सिंह |
| जिला | Gautam Budh Nagar |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | गौतम बुद्ध नगर |
जेवर विधानसभा सीट
जेवर विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में से एक है। यह गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित है और गौतम बुद्ध नगर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2008 के परिसीमन के बाद इस सीट को क्रमांक 63 दिया गया। जेवर में 1957 से चुनाव होते आ रहे हैं। तीसरी से पंद्रहवीं विधानसभा तक यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित थी, लेकिन वर्तमान में यह सामान्य (गैर-आरक्षित) सीट है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: गौतम बुद्ध नगर
विधानसभा क्रमांक: 63
जनसंख्या (नगर पंचायत): 32,269
लिंगानुपात: 877/1000
साक्षरता दर: 66.92% (जेवर)
धार्मिक और जातीय विभाजन
हिन्दू: 61.88%
मुस्लिम: 36.61%
जैन: 1.14%
अन्य: 1 से कम
अनुसूचित जाति (अन्य): 21.96%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 3,51,744
विजेता: धीरेंद्र सिंह (भाजपा)
वोट शेयर: 62%
उपविजेता: अवतार सिंह भड़ाना (राष्ट्रीय लोक दल)
मतदान प्रतिशत: 58.3%
जेवर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास विविधता से भरा रहा है। यह सीट पहले अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी, लेकिन 2012 से सामान्य सीट हो गई। 1991 के बाद से यहां मुख्य मुकाबला भाजपा और बसपा के बीच रहा है। ऐदल सिंह (भारतीय क्रांति दल/जनता दल) और होराम सिंह (भाजपा/बसपा) जैसे नेता तीन-तीन बार विधायक रह चुके हैं। 2012 में कांग्रेस के धीरेंद्र सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन 2017 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर पहली बार जीत हासिल की और बसपा के वेदराम भाटी को हराया। भट्टा-परसौल भूमि अधिग्रहण आंदोलन में सक्रिय भूमिका के चलते उन्होंने क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद से भाजपा ने जेवर में अपनी स्थिति लगातार मजबूत की है। 2017 और 2022 दोनों चुनावों में भाजपा के धीरेंद्र सिंह विजयी रहे। इन चुनावों में जेवर एयरपोर्ट परियोजना, भूमि अधिग्रहण, किसानों के मुआवज़े, स्थानीय विकास और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। जातीय समीकरण में गुर्जर, जाट, ठाकुर, दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण समुदायों की बड़ी भूमिका रही है। धीरेंद्र सिंह की किसानों से लगातार संवाद और एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण में महत्वपूर्ण भूमिका ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। 2022 के चुनाव में उन्होंने लगभग 50% वोट प्राप्त किए और रालोद के अवतार सिंह भड़ाना को हराया।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
धीरेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर ज़िले की जेवर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हैं। इतिहास में परास्नातक की डिग्री उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से प्राप्त की। राजनीति में उनकी शुरुआत सेंट जॉन्स कॉलेज, आगरा से छात्रनेता के रूप में हुई। 2001 में वे रबुपुरा क्षेत्र से चेयरमैन निर्वाचित हुए और इसके बाद कांग्रेस में शामिल होकर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। वर्ष 2011 में वे भट्टा-परसौल किसान आंदोलन के दौरान सुर्खियों में आए, जब उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर आंदोलन स्थल तक पहुंचाया। किसानों के हित में भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव की मांग को लेकर उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई, जो बाद में 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून का आधार बनी। 2017 में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने जेवर से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता, और 2022 में रालोद के अवतार सिंह भड़ाना को हराकर दूसरी बार विधायक बने। जेवर एयरपोर्ट परियोजना में किसानों से संवाद और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी को क्षेत्र में व्यापक सराहना मिली है। उनके खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले की जानकारी उपलब्ध नहीं है और उनकी छवि एक संघर्षशील, किसान हितैषी और ईमानदार नेता की रही है।
जेवर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच सालों में जेवर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति और विकास का मुख्य फोकस जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना पर रहा है। एयरपोर्ट के लिए जमीन लेने, सही मुआवजा देने, और किसानों के पुनर्वास की बातें बार-बार सामने आईं और कई बार किसानों ने इसके लिए आंदोलन भी किए। जमीन जाने के बाद किसानों की आजीविका और खेती से जुड़ी समस्याएं जैसे सिंचाई, बिजली, खाद-बीज की कमी, और फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांगें लगातार बनी रहीं। एयरपोर्ट के कारण इलाके में तेजी से शहरीकरण हुआ, लेकिन फिर भी सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और स्कूल जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पाईं, जिससे लोगों में नाराज़गी थी।
यहां की जातीय विविधता भी बड़ा मुद्दा रही, जहां गुर्जर, ठाकुर, जाट, दलित, मुस्लिम, ब्राह्मण और अन्य पिछड़े वर्ग की राजनीति और सामाजिक न्याय को लेकर चर्चा होती रही। साथ ही, रोजगार के मौके खासकर स्थानीय युवाओं के लिए कम मिलने और छोटे व्यापारियों व कारीगरों के हितों की रक्षा भी चुनावी चर्चा में रही। किसान आंदोलन और जमीन के अधिकार को लेकर भी कई बार विरोध हुए, जिसमें मुआवजे बढ़ाने, पुनर्वास बेहतर करने और सरकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू करने की मांगें उठीं।