कांठ विधानसà¤à¤¾ सीट - Moradabad
कांठ |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | कमल अख्तर |
| जिला | Moradabad |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | मुरादाबाद |
कांठ विधानसभा क्षेत्र
कांठ विधानसभा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित है। इसका विधानसभा क्रमांक 25 है और यह मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी में आती है। क्षेत्र में नगरीय और ग्रामीण इलाकों का मिश्रण है, तथा यहां बैंडेज उत्पादन, खेती और कुटीर उद्योग प्रमुख हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: मुरादाबाद
विधानसभा क्रमांक: 25
लोकसभा क्षेत्र: मुरादाबाद
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: 3,01,522
साक्षरता दर: 65.67%
लिंग अनुपात: 917/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 55-60%
मुस्लिम: 35-40% के करीब (तहसील)
अन्य समुदाय: 2% से कम
अनुसूचित जाति: लगभग 13-15%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,72,808
विजेता: कमल अख्तर (सपा)
वोट शेयर: 49.4%
उपविजेता: राजेश कुमार चन्नू (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 70.1%
कांठ विधानसभा क्षेत्र, जो मुरादाबाद जिले में स्थित है, एक ऐसी सीट रही है जहाँ राजनीति लगातार बदलाव के दौर से गुजरी है। 1957 में अस्तित्व में आने के बाद से अब तक यहाँ 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और हर बार मतदाताओं ने अलग-अलग दलों को मौका देकर यह दिखाया है कि वे बदलाव पसंद करते हैं। कभी कांग्रेस का गढ़ रहा यह क्षेत्र बाद में भाजपा, बसपा और समाजवादी पार्टी जैसे दलों के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया। यहां का कोई स्थायी राजनीतिक रुझान नहीं रहा है और जातीय-सामाजिक समीकरण जैसे जाट, मुस्लिम और दलित मतदाता अक्सर चुनावी नतीजों को तय करते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के कमाल अख्तर ने भाजपा के राजेश कुमार चुन्नू को भारी अंतर करीब 43,178 वोटों से हराकर बड़ी जीत हासिल की। उन्हें कुल 1,34,692 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 91,514 वोटों से संतोष करना पड़ा। इससे पहले 2017 में चुन्नू ने भाजपा से जीत दर्ज की थी। यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि कांठ की राजनीति स्थानीय विकास, रोजगार, सामाजिक सद्भाव और जातीय समीकरणों पर आधारित है। कुल मिलाकर, यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय और प्रतिस्पर्धी है, जहां जनता समय-समय पर बदलाव की दिशा तय करती है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
कमाल अख्तर समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कांठ विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका जन्म 24 अक्टूबर 1971 को अमरोहा जिले के उझारी गांव में हुआ था। पढ़ाई में भी वे मजबूत रहे हैं। उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली से अर्थशास्त्र में स्नातक (ऑनर्स) और एलएलबी की डिग्री हासिल की। राजनीति में उनकी शुरुआत सपा से हुई और अपने संगठनात्मक कौशल के चलते वे समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। उनका राजनीतिक सफर काफी विविध रहा है। 2004 से 2010 तक राज्यसभा सदस्य रहे, 2012 में हसनपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए और पंचायती राज मंत्री बने। इसके बाद 2015 से 2017 तक वे उत्तर प्रदेश सरकार में खाद्य एवं रसद विभाग के कैबिनेट मंत्री भी रहे। 2017 में हसनपुर से चुनाव हारने के बाद उन्होंने 2022 में कांठ सीट से वापसी की और फिर विधायक बने। राजनीति उनके परिवार का हिस्सा है। उनकी पत्नी हुमेरा अख्तर भी सक्रिय राजनीति में हैं और लोकसभा चुनाव में सपा की उम्मीदवार रह चुकी हैं। कमाल अख्तर की छवि एक साफ-सुथरे, बेदाग और प्रभावशाली नेता की रही है, जिनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
कांठ विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में कांठ विधानसभा क्षेत्र में कई अहम मुद्दे सामने आए हैं, जो यहां की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करते रहे हैं। यह क्षेत्र विविध जातीय समूहों का घर है, इसलिए सामाजिक सद्भाव बनाए रखना हमेशा एक बड़ी प्राथमिकता रहा है। कानून-व्यवस्था भी चिंता का विषय रही है, क्योंकि समय-समय पर अपराध की घटनाएं सामने आती रही हैं। खराब सड़कों और कमजोर परिवहन व्यवस्था को लेकर लोगों में असंतोष रहा है और इन बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग लगातार उठती रही है। साथ ही, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की जरूरत भी जनता की प्रमुख मांगों में रही है। बेरोजगारी खासकर युवाओं के बीच एक बड़ा मुद्दा बना रहा है, जिसे चुनावी वादों में बार-बार उठाया गया है। इसके अलावा, स्वच्छता, पेयजल और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी लोगों ने ध्यान दिलाया है। राजनीतिक रूप से देखा जाए तो कांठ सीट पर पिछले कुछ वर्षों में दलबदल और राजनीतिक अस्थिरता ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया है, जिससे क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर कई बार बदली है। कुल मिलाकर, ये सारे मुद्दे स्थानीय जनता की रोजमर्रा की ज़रूरतों और उम्मीदों से जुड़े रहे हैं।