कासगंज विधानसà¤à¤¾ सीट - Kasganj
कासगंज |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री देवेन्द्र सिंह |
| जिला | Kasganj |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | एटा |
कासगंज विधानसभा सीट
कासगंज विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र भारत के उत्तर प्रदेश विधान सभा के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। यह एटा जिले का एक हिस्सा है और एटा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1952 में हुआ था जब 1951 में 'डीपीएसीओ (1951)' (परिसीमन आदेश) पारित किया गया था। 2008 में 'संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश' पारित होने के बाद, निर्वाचन क्षेत्र को पहचान संख्या 100 मिली।
जनसंख्या विभाजन (जनगणना 2011, अनुमानित)
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 100
जिला: कासगंज (कांशीराम नगर)
लोकसभा क्षेत्र: एटा
आरक्षण: सामान्य
जनसंख्या: 3.5-4 लाख
लिंगानुपात: 880/1000
साक्षरता दर: 62%
धार्मिक एवं जातीय विभाजन (जनगणना 2011)
हिंदू: 78%
मुस्लिम: 20%
अन्य: 1% से कम
अनुसूचित जाति: 16-18%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,33,062
विजेता: देवेंद्र सिंह लोधी (भाजपा)
वोट शेयर: 53.0%
उपविजेता: मनपाल सिंह (सपा)
मतदान प्रतिशत: 64.4%
कासगंज विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पूर्ववर्ती जनसंघ का पारंपरिक गढ़ रही है। 1977 के बाद से यहां भाजपा या उसके सहयोगी दलों का वर्चस्व कायम रहा है। हालांकि समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने समय-समय पर चुनौती दी है, परंतु भाजपा का वोट बैंक लगातार मजबूत बना रहा। सपा मुख्य रूप से मुस्लिम और यादव मतदाताओं पर निर्भर रही है, जबकि कांग्रेस 1990 के बाद से लगभग हाशिए पर चली गई है, जिससे मुकाबला भाजपा और सपा-बसपा के बीच सीमित रह गया है। हालिया चुनावों में भाजपा ने 2017 और 2022 में बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जिसमें लोधी, सवर्ण, ओबीसी और दलित वर्गों का उसे व्यापक समर्थन मिला। दूसरी ओर, सपा ने मुस्लिम-यादव समीकरण के सहारे अपने वोट शेयर में बढ़ोतरी की, लेकिन भाजपा के मजबूत संगठन और सामाजिक समीकरणों के आगे पिछड़ गई। बसपा और कांग्रेस का प्रभाव लगातार घटता गया है। 2022 के चुनाव में भाजपा के देवेंद्र सिंह लोधी ने सपा के मानपाल सिंह को हराया, जबकि बसपा और कांग्रेस की उपस्थिति शुन्य रही।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
देवेंद्र सिंह लोधी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश की कासगंज विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर भारी मतों से जीत हासिल की। लोधी समाज से आने वाले देवेंद्र सिंह क्षेत्र में अपनी सक्रियता, जमीनी मुद्दों पर मुखरता और जनहित के मामलों में सजग रुख के लिए पहचाने जाते हैं। वे स्थानीय विकास, प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कासगंज वन विभाग में भ्रष्टाचार के मामले को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत भी की, जिससे उनकी छवि एक ईमानदार और सक्रिय जनप्रतिनिधि की बनी है। 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज है।
कासगंज विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में कासगंज विधानसभा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी ढांचे और जातीय समीकरण प्रमुख चुनावी मुद्दे बने रहे। क्षेत्र में अपराध, फर्जी मतदान और शांति व्यवस्था को लेकर लगातार असंतोष बना रहा, जिससे कानून-व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा रही। बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव भी गंभीर चिंता का विषय रहा. इलाके में न तो कोई मेडिकल कॉलेज है और न ही सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं, जिससे लोगों को इलाज और उच्च शिक्षा के लिए अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण युवाओं का पलायन लगातार बढ़ा है और स्वरोजगार के अवसरों की कमी चुनावी बहस का हिस्सा रही है। इसके अलावा, जर्जर सड़कें, खस्ताहाल सार्वजनिक परिवहन, गंदगी और बिजली कटौती जैसी समस्याएं भी जनता के लिए चिंता का विषय बनी रहीं। जातीय समीकरण भी यहां की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं लोधी, ठाकुर, ब्राह्मण, शाक्य, यादव, जाटव और मुस्लिम समुदायों की निर्णायक भागीदारी रही है, जिनमें लोधी और वैश्य मतदाता विशेष रूप से प्रभावी माने जाते हैं। साथ ही, अघोषित बिजली कटौती और पेयजल की समस्या ने भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनता को प्रभावित किया है।