कस्ता विधानसभा सीट - Lakhimpur Kheri

कस्ता

वर्तमान विधायक
श्री सौरभ सिंह सोनू
जिला
Lakhimpur Kheri
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
धौरहरा
कस्ता विधानसभा सीट
कस्ता विधानसभा उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। यह क्षेत्र मुख्यतः ग्रामीण, कृषि प्रधान और सामाजिक दृष्टि से विविध है। कस्ता विधानसभा का गठन 2008 के परिसीमन के बाद हुआ और इसका विधानसभा क्रमांक 143 है। यह सीट धौरहरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: लखीमपुर खीरी
विधानसभा क्रमांक: 143
लोकसभा क्षेत्र: धौरहरा
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित)
अनुमानित आबादी: 3.5-3.7 लाख
साक्षरता दर: करीब 60%
लिंग अनुपात: 867/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 75%
मुस्लिम: लगभग 23%
अन्य समुदाय: 2%
अनुसूचित जाति: 18–22% अनुमानित
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: लगभग 2,14,151
विजेता: सौरभ सिंह सोनू (भाजपा)
वोट शेयर: 48.2%
उपविजेता: सुनील कुमार लाला (सपा)
मतदान प्रतिशत: 69.3%
कस्ता विधानसभा सीट का गठन 2008 में हुए परिसीमन के बाद हुआ और इसे अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित किया गया। यह लखीमपुर जिले के ग्रामीण इलाके में स्थित है और धौरहरा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। राजनीतिक रूप से यह सीट शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव का गवाह रही है। 2012 में समाजवादी पार्टी के सुनील कुमार 'लाला' ने यहां पहली जीत दर्ज की, लेकिन इसके बाद 2017 और 2022 में भाजपा के सौरभ सिंह सोनू ने लगातार जीत हासिल कर इस सीट पर पार्टी की पकड़ मजबूत कर ली। प्रमुख चेहरों में सपा के सुनील 'लाला', भाजपा के सौरभ सिंह सोनू और बसपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद जुगल किशोर शामिल हैं। 2022 के चुनाव में भाजपा के सौरभ सिंह सोनू ने 47.93% हासिल कर सपा के सुनील कुमार 'लाला' को हराया। बसपा की हेमवती देवी को 7.58% और कांग्रेस के राधे श्याम को मात्र 0.91% वोट मिले। मतदान प्रतिशत लगभग 48% रहा। जातीय समीकरणों के साथ-साथ भाजपा के पक्ष में हुआ वोटों का ध्रुवीकरण चुनाव में निर्णायक साबित हुआ और पार्टी ने लगातार दूसरी बार इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
सौरभ सिंह सोनू भारतीय जनता पार्टी के एक सक्रिय और लोकप्रिय नेता हैं, जो 2017 से कस्ता विधानसभा सीट (लखीमपुर खीरी) से लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। उन्होंने पहली बार 2017 में जीत दर्ज की और 2022 में फिर से जनता का विश्वास हासिल किया। उनकी पत्नी खुशबू सिंह मितौली की ब्लॉक प्रमुख हैं, जिससे उनका पारिवारिक और राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र में और भी मजबूत होता है। सौरभ सिंह सोनू सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, जिससे क्षेत्र में उनकी मजबूत उपस्थिति बनी हुई है। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नही है।
कस्ता विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में कस्ता विधानसभा क्षेत्र (लखीमपुर खीरी) में कई गंभीर मुद्दों ने जनता की रोज़मर्रा की ज़िंदगी और स्थानीय राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। किसानों का असंतोष खास तौर पर लखीमपुर खीरी कांड और कृषि कानूनों के विरोध के दौरान साफ दिखा। आवारा पशुओं से फसल बर्बाद होने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर लगातार आवाज़ उठती रही। जल संकट भी बड़ी परेशानी बना रहा कई गांवों में लोगों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज जाना पड़ा, जबकि जल निकासी, तालाबों की सफाई और स्वच्छता जैसे बुनियादी मुद्दे अनदेखे रहे। स्वास्थ्य सेवाओं की हालत चिंताजनक रही अस्पतालों में डॉक्टर और दवाओं की कमी रही और हैजा जैसी बीमारियों ने कई बार चिंता बढ़ाई। वहीं, सड़कें टूटी-फूटी रहीं और कचरा प्रबंधन जैसे जरूरी कामों में भी लापरवाही रही। चूंकि कस्ता अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, इसलिए जातीय समीकरण यहां की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। भाजपा को अपनी पकड़ बनाए रखने में मुश्किलें आईं, जबकि विपक्ष ने स्थानीय मुद्दों और जातीय संतुलन को चुनावी हथियार बनाया। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित रहे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत भी बार-बार उठी। इन तमाम मुद्दों ने न सिर्फ जनजीवन को प्रभावित किया बल्कि जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और चुनावी रुझानों पर भी सीधा असर डाला।

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