कस्ता विधानसभा से विधायक सौरभ सिंह सोनू का राजनीतिक सफर, शिक्षा, प्रमुख कार्य, उपलब्धियां और जनाधार
कस्ता विधानसभा
सौरभ सिंह सोनू भारतीय जनता पार्टी के एक सक्रिय और लोकप्रिय नेता हैं, जो 2017 से कस्ता विधानसभा सीट (लखीमपुर खीरी) से लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। उन्होंने पहली बार 2017 में जीत दर्ज की और 2022 में फिर से जनता का विश्वास हासिल किया। उनकी पत्नी खुशबू सिंह मितौली की ब्लॉक प्रमुख हैं, जिससे उनका पारिवारिक और राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र में और भी मजबूत होता है। सौरभ सिंह सोनू सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, जिससे क्षेत्र में उनकी मजबूत उपस्थिति बनी हुई है। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है।
शिक्षा और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि
- सौरभ सिंह सोनू स्नातकोत्तर हैं और उनकी उम्र 36 वर्ष है।
- उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत रही है; उनके पिता जुगल किशोर पूर्व सांसद रहे और बसपा सरकार में मायावती के करीबी माने जाते थे।
- उनकी कुल संपत्ति लगभग 1.67 करोड़ रुपये है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
राजनीतिक सफर
- सौरभ सिंह ने 2012 में बसपा के टिकट पर अपना पहला चुनाव लड़ा, लेकिन सपा के सुनील कुमार लाला से हार गए।
- 2017 में उन्होंने भाजपा से चुनाव मैदान में उतरकर सपा के सुनील कुमार लाला को पराजित किया और 2022 में भी भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की, इस बार सुनील कुमार को 13,817 वोटों से हराया।
- यह सीट आरक्षित दलित वर्ग के लिए है और अब तक बसपा यहां जीत दर्ज नहीं कर पाई; सौरभ सिंह भाजपा का लगातार मजबूत चेहरा बने हुए हैं।
- क्षेत्र में उनकी युवाओं के बीच व्यापक पकड़ है और वे गांव-शहर हर जगह सक्रिय जनसंपर्क के लिए जाने जाते हैं।
प्रमुख कार्य और उपलब्धियाँ
- स्वास्थ्य के क्षेत्र में 5.25 करोड़ रुपये की लागत से कुल 16 परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया, जिसमें 20 बेड का वार्ड, ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट, 14 आयुष्मान आरोग्य मंदिर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं ग्रामीण जनता के लिए उपलब्ध करवाई गईं।
- उन्होंने शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, नाली और जलापूर्ति जैसी बुनियादी समस्याओं को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए; विद्यालयों का निर्माण कराया, भ्रष्टाचार को हटाया और ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित किया।
- वन महोत्सव के तहत पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
- कस्ता क्षेत्र के गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग तक सरकारी योजनाओं— जैसे प्रधानमंत्री आवास, शौचालय, उज्जवला योजना और आयुष्मान कार्ड—का सीधा लाभ पहुँचाया; साथ ही व्यापारियों, किसानों और युवाओं के लिए संवाद स्थापित किया।
- क्षेत्र की मॉनीटरिंग के लिए नियमित भ्रमण किए और प्रशासन तथा सरकार के संपर्क में रहते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया।
कस्ता के अन्य प्रमुख नेता
- सुनील कुमार लाला (सपा): 2012 में विजयी हुए, जबकि 2017 और 2022 में मुख्य प्रतिद्वंद्वी रहे। वे गरीबी, शिक्षा और स्थानीय मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय रहते हैं।
- राजेश गौतम (बसपा): 2017 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे और दलित समाज के लिए योजनाओं और विकास कार्यों में योगदान देते रहे।
- हेमवती देवी (बसपा): 2022 में चुनावी टिकट प्राप्त किया और समाज में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाली प्रमुख नेता के रूप में पहचान रखती हैं।