कटेहरी विधानसभा सीट - Ambedkar Nagar

कटेहरी

वर्तमान विधायक
श्री धर्मराज निषाद
जिला
Ambedkar Nagar
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
अंबेडकर नगर
चुनावी सीट प्रोफ़ाइल: कटेहरी विधानसभा क्षेत्र, अंबेडकर नगर
कटेहरी उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर ज़िले में स्थित एक नगर और विकासखंड मुख्यालय है। यह ज़िला मुख्यालय अकबरपुर से लगभग 13 किमी पश्चिम में स्थित है और एक प्रमुख प्रशासनिक व शैक्षणिक केंद्र के रूप में कार्य करता है, जहाँ राम देव जनता इंटर कॉलेज और देव इंद्रवती पीजी कॉलेज जैसे संस्थान मौजूद हैं। यहाँ का रेलवे स्टेशन हाल ही में विद्युतीकृत मार्ग पर नवीनीकृत किया गया है और यह टमसा नदी के समीप स्थित है।
जनसंख्या प्रोफ़ाइल
- जनसंख्या: लगभग 3,000 (2001 के अनुसार) हैं,
कटेहरी ब्लॉक कुल जनसंख्या:  24 लाख (2011 की जनगणना)
- धार्मिक संरचना:
- हिंदू: लगभग 82.81% (ज़िला औसत)
- मुस्लिम: लगभग 16.75% (ज़िला औसत)
- अल्पसंख्यक: ईसाई (0.11%), सिख (0.04%), बौद्ध (0.08%)
सामुदायिक संरचना
- अनुसूचित जातियाँ:  24.65%
- मुख्य समुदाय: निषाद, वर्मा, शुक्ला और तिवारी समुदाय
2022 विधानसभा चुनावी नतीजे
विजेता: लालजी वर्मा सपा
वोट शेयर: 38
उपविजेता: अवधेश कुमार
मत प्रतिशत: 62.5
2024 विधानसभा उपचुनाव के नतीजे
विजेता: धर्मराज निषाद (बीजेपी)
उपविजेता: शोभावती वर्मा सपा (सांसद लालजी वर्मा की पत्नी)
मतदान प्रतिशत: 56.89%
यह जीत बीजेपी के लिए ऐतिहासिक रही, क्योंकि कटेहरी सीट पर 31 वर्ष बाद (1991 के बाद पहली बार) बीजेपी ने जीत दर्ज की है।
कटेहरी विधानसभा क्षेत्र (अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश) की राजनीतिक यात्रा 1962 में मिझौड़ा नाम से शुरू हुई, जिसे बाद में कटेहरी नाम दिया गया। शुरुआती दौर में 1962 से 1989 तक कांग्रेस और जनता पार्टी/जनता दल का दबदबा रहा। 1993 में बसपा के रामदेव वर्मा के जीत के साथ दलित राजनीति का उदय हुआ, जिसे धर्मराज निषाद ने 1996 से 2007 तक लगातार तीन बार जीतकर मजबूती दी। 2012 में सपा के शंखलाल मांझी ने बसपा की विजय परंपरा को तोड़ा, लेकिन 2017 में बसपा के लालजी वर्मा ने भाजपा के अवधेश द्विवेदी को हराकर वापसी की। 2022 में लालजी वर्मा सपा के टिकट पर विधायक बने, पर लोकसभा चुनाव लड़ने के कारण सीट खाली हो गई। चुनावी रुझानों में बसपा ने 1993 से 2017 के बीच 5 में से 4 बार जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा को केवल 1991 में अनिल तिवारी के रूप में सफलता मिली। सपा ने 2012 और 2022 में जीत हासिल कर पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) गठजोड़ के सहारे अपनी पकड़ बनाई है। 2024 के उपचुनाव में भाजपा के धर्मराज निषाद, सपा की शोभावती वर्मा और बसपा के अमित वर्मा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामले
धर्मराज निषाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद समुदाय के प्रभावशाली नेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ सदस्य हैं। उन्होंने 2024 के कटेहरी विधानसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की शोभावती वर्मा को 34,514 मतों से हराकर निर्णायक जीत दर्ज की। उनका राजनीतिक सफर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से शुरू हुआ, जहाँ वे 1996, 2002 और 2007 में कटेहरी से विधायक चुने गए। 2003 से 2007 तक मायावती सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और 2024 में पार्टी टिकट पर चुनाव जीतकर वापसी की। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड जैसे विकिपीडिया, भाजपा की आधिकारिक वेबसाइट और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके खिलाफ किसी आपराधिक मामले, एफआईआर या चालान का कोई उल्लेख नहीं है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी शपथ पत्रों में भी किसी आपराधिक पृष्ठभूमि का विवरण नहीं मिलता, जिसके चलते भाजपा ने उन्हें एक 'साफ-सुथरी छवि वाले नेता' के रूप में प्रस्तुत किया।
कटेहरी विधानसभा के पिछले 5 साल
कटेहरी विधानसभा क्षेत्र (अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश) में पिछले पाँच वर्षों के दौरान कई प्रमुख समस्याएँ उभरकर सामने आईं। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है, जिससे रोजगार के सीमित अवसर हैं और युवाओं का शहरों की ओर पलायन एक बड़ी चुनौती बन गया है। बुनियादी ढांचे की स्थिति भी चिंताजनक रही—खासतौर पर ग्रामीण सड़कों की खराब हालत, मानसून में जलभराव, बिजली कटौती और स्वच्छ पेयजल की कमी ने लोगों की जिंदगी प्रभावित की। स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी और निजी अस्पतालों की महँगी सेवाएँ, गरीब तबकों के लिए बड़ी समस्या बन गईं। शिक्षा व्यवस्था में भी कमी रही, जहाँ स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं और शिक्षकों की भारी कमी देखी गई। इसके साथ ही, सरयू नदी के जलभराव से हर साल बाढ़ का खतरा मंडराता रहा, जिससे फसलें बर्बाद हुईं और किसानों को नुकसान हुआ। छुट्टा पशुओं की समस्या ने भी खेती को बुरी तरह प्रभावित किया। 2022 में विधायक के सांसद बनने के कारण उपचुनाव की स्थिति बनी, जिससे राजनीतिक अस्थिरता और जातिगत समीकरणों पर बहस तेज हुई।

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