खतौली विधानसभा से विधायक मदन सिंह कसाना उर्फ मदन भैया का राजनीतिक सफर, प्रमुख कार्य, उपलब्धियां और जनाधार
खतौली (मुजफ्फरनगर) विधानसभा
मदन सिंह कसाना, जिन्हें इलाके में लोग 'मदन भैया' के नाम से जानते हैं, 11 सितंबर 1959 को गाजियाबाद के गांव जवली में जन्मे और गुरजर समुदाय के एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। पांच बार विधायक रह चुके मदन भैया चार बार बागपत की खेक्रा सीट और एक बार खतौली से चुने गए हैं। कॉलेज के दिनों से राजनीति में सक्रिय, उनकी छवि एक बहुबली नेता की रही है, जिन्हें स्थानीय लोग 'रॉबिन हुड' भी कहते हैं। सुरक्षा कारणों से वे बुलेटप्रूफ गाड़ी और सुरक्षाबलों के साथ चलते हैं। उनके खिलाफ 1990 के दशक से अब तक हत्या, डकैती और सरकारी अधिकारी पर हमले जैसे गंभीर आरोपों वाले करीब 32 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें कई गाजियाबाद, बागपत, मेरठ और दिल्ली में हैं। वे तीन बार गैंगस्टर और एंटी-सोशल एक्ट के तहत और एक बार राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत कार्रवाई का सामना कर चुके हैं, हालांकि खतौली क्षेत्र में उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। 1991 से 2007 तक खेक्रा सीट से जनता पार्टी, सपा, निर्दलीय और अंततः रालोद के टिकट पर जीतते रहे, जबकि परिसीमन के बाद लोनी से चुनाव हार गए। 2022 के खतौली उपचुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को बड़े अंतर से हराकर राष्ट्रीय लोकदल-सपा गठबंधन को जीत दिलाई। विवादों के बावजूद, पश्चिमी यूपी की राजनीति में उनकी पकड़ और गुरजर समाज में उनकी साख बेहद मजबूत है।
राजनीतिक सफर
- 2017: खतौली से भाजपा टिकट पर पहली बार निर्वाचित, सपा प्रत्याशी को 31,374 मतों से हराया; प्रदेश के सबसे बड़ी जीत अंतर में शामिल।
- 2022: भाजपा टिकट पर पुनः जीत, सपा-रालोद प्रत्याशी राजपाल सैनी को 16,000 वोटों से हराय।
- कवाल कांड के बाद सपा सरकार ने रासुका लगाकर एक वर्ष 13 दिन जेल में रखा, उसके बाद ही भाजपा ने टिकट दिया; बड़बोले और तीखे भाषणों के कारण लगातार चर्चा में रहे।
- विधायक रहते क्षेत्र में सख्त बयानबाजी, प्रशासन के साथ कड़ी टक्कर, जनता दरबार एवं संवाद में मुखर।
- नवंबर 2022: कवाल कांड में दो साल की सजा मिलने पर विधानसभा सदस्यता रद्द, हाईकोर्ट में अपील पर फिलहाल राहत।
प्रमुख कार्य और उपलब्धियां
- उन्होंने किसानों, पिछड़े वर्ग और ग्रामीण इलाकों में सड़क, बिजली, पानी और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के साथ जनता दरबार आयोजित किए।
- गन्ना किसानों, बेरोजगार युवाओं, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, राशन और आवास योजनाओं के लिए सरकारी विभागों तक सीधे पहुँच बनाई।
- पंचायतों में लगातार विकास कार्यों, सिंचाई, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और बिजली से जुड़े मुद्दों का समाधान करते रहे।
- इलाके में सुरक्षा के मामलों पर सख्त बयान जारी किए और दंगा-रोधी व अपराध नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाई।
- गांव और कस्बों के लिए प्रशासन पर दबाव डालकर स्थानीय विकास सुनिश्चित किया और भाजपा कैडर के साथ-साथ अनुसूचित जाति समुदाय का भी समर्थन हासिल किया।
- महिलाओं की सुरक्षा, युवा रोजगार और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय योगदान दिया।
- चुनावी दौर में विवादित बयान दिए, जैसे ‘मुस्लिमों को रोजगार न देने’ और ‘एक पत्थर के बदले 10 पत्थर’, जिससे चर्चा का विषय बने।
खतौली के अन्य प्रमुख नेता
- मदन भैया 2022 के उपचुनाव में RLD के उम्मीदवार के रूप में विजयी रहे; वे बाहुबली छवि के नेता और जाट-मुस्लिम समीकरण के प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं।
- राजकुमार सैनी भाजपा के उम्मीदवार थे, जिन्होंने 2022 के उपचुनाव में पिछड़े वर्ग में अपनी पकड़ बनाकर चुनाव लड़ा।
- औरंगजेब बसपा के प्रत्याशी थे, जो मुस्लिम समाज में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं।