कोल विधानसभा सीट - Aligarh

कोल

वर्तमान विधायक
श्री अनिल पाराशर
जिला
Aligarh
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
कोल तहसील – अलीगढ़ जिला, उत्तर प्रदेश
कोल अलीगढ़ जिले की एक प्रमुख तहसील है। यह स्वयं एक विधानसभा क्षेत्र नहीं है, लेकिन अलीगढ़ की व्यापक प्रशासनिक और चुनावी संरचना का हिस्सा है। यह क्षेत्र अपने ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र के इतिहास को लेकर भी कुछ रोचक बातें हैं जैसे की कोल अलीगढ़ शहर का पुराना नाम है। कुछ कहानियों के अनुसार प्राचीन काल में कम्पिल्य के लोग बाद में कोइल कहलाए। कोइल लोग कम्पिल्य से आए थे और उन्होंने गंगा के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक नगर की स्थापना की, जिसे कम्पिलगढ़ के नाम से जाना गया। यही नगर बाद में कोइल नाम से प्रसिद्ध हुआ। वर्तमान में कोल तहसील अलीगढ़ शहर का एक हिस्सा है। यह ग्रांड ट्रंक रोड के पास के क्षेत्र को कवर करता है।
जनसंख्या और जनसांख्यिकी
कुल जनसंख्या: 1,810,181(2011 जनगणना)
पुरूष: 959,244
महिला: 850,937
लिंग अनुपात: 887/1000
साक्षरता दर: अलीगढ़ जिले की साक्षरता दर 68.24% है।
अनुसूचित जाति: लगभग 20.56%
सामुदायिक और धार्मिक संरचना
धार्मिक विभाजन (अलीगढ़ शहर, 2011):
हिंदू: 69.19%
मुस्लिम: 29.56%
ईसाई एवं अन्य: कुल मिलाकर 1% से कम
2022 विधानसभा चुनाव:
विजेता: अनिल पराशर (भारतीय जनता पार्टी - बीजेपी)
वोट शेयर: 43%
उपविजेता: शाज़ इस्हाक (41%)
राजनीतिक रूप से कोइल, अलीगढ़ जिले के त्रिकोणीय मुकाबले वाले क्षेत्र में शामिल है, जहां भाजपा, सपा और बसपा के बीच प्रतिस्पर्धा रहती है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसी संस्थाएं और स्वतंत्रता संग्राम में क्षेत्र की भागीदारी ने इसे राजनीतिक रूप से जागरूक बनाया है। वर्तमान में जातीय और धार्मिक समीकरणों के साथ-साथ विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे स्थानीय राजनीति को प्रभावित करते हैं।
कोइल विधानसभा क्षेत्र के पिछले 5 साल
कोइल विधानसभा क्षेत्र को कई क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की खराब स्थिति से आवागमन में कठिनाई होती है, साथ ही स्वच्छ पेयजल की कमी और अपर्याप्त स्वच्छता सुविधाएँ बनी हुई हैं। कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं की कमी और किसानों को फसल बीमा व सहायता में देरी या अपर्याप्त समर्थन की समस्या है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और निम्न गुणवत्ता वाली पढ़ाई एक बड़ी बाधा है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा कर्मचारियों की कमी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करती है। युवाओं में उच्च बेरोजगारी आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा है और छोटे व मध्यम उद्योगों के विकास की कमी से स्थानीय रोजगार के अवसर सीमित हैं। इसके अलावा, जातिगत तनाव और सामाजिक असमानताएँ बरकरार हैं, साथ ही महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए और प्रयासों की आवश्यकता है।
परिचय और आपराधिक मामले
अनिल पराशर पेशे से वकील और कानून में स्नातक (डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय से) अनिल पराशर 2017 से सक्रिय रूप से राजनीति में हैं और 2017 व 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर चुके हैं। चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ एक मामला दर्ज है।। उनकी विधिक पृष्ठभूमि और जनता से जुड़ाव ने उन्हें एक प्रभावशाली और भरोसेमंद जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया है।

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