कुण्डा विधानसà¤à¤¾ सीट - Pratapgarh
कुण्डा |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री रघुराज प्रताप सिंह |
| जिला | Pratapgarh |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | जनसत्ता दल लोकतांत्रिक |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | कौशांबी |
कुण्डा विधानसभा सीट
कुण्डा विधानसभा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की एक बेहद चर्चित और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली सीट है। यह विधानसभा क्रमांक 246 है और कौशांबी (SC) लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सीट पर कोई आरक्षण लागू नहीं है। क्षेत्र का बहुसंख्य भाग ग्रामीण है और यह रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) के बाहुबली प्रभाव के लिए जाना जाता है, जो 1993 से लगातार विधायक हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: प्रतापगढ़
विधानसभा क्रमांक: 246
लोकसभा क्षेत्र: कौशांबी
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित)
अनुमानित आबादी: लगभग 4,94,609
साक्षरता दर: 66-68%
लिंग अनुपात: 985/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: अनुमानित 90%
मुस्लिम: 8-9%
अन्य समुदाय: लगभग 1-2%
अनुसूचित जाति: अनुमानित 19%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,94,779
मतदान प्रतिशत: 54.8%
विजेता: रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया' (जनसत्ता दल लोकतांत्रिक)
वोट शेयर: 51.1%
उपविजेता: गुलशन यादव (सपा)
कुंडा विधानसभा का राजनीतिक इतिहास लंबे समय तक कांग्रेस के प्रभुत्व से शुरू होता है, जहां 1951 से 1989 तक नियाज हसन लगातार पांच बार विधायक रहे। 1991 में पहली बार भाजपा ने जीत दर्ज की, लेकिन 1993 से रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने इस सीट पर ऐसा दबदबा बनाया कि आज तक कायम है। उन्होंने सात बार लगातार जीत हासिल की, शुरुआत में निर्दलीय और बाद में अपनी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के टिकट पर। पहले समाजवादी पार्टी उनका समर्थन करती थी, लेकिन 2022 में सपा ने गुलशन यादव को उम्मीदवार बनाकर सीधी चुनौती दी। इस चुनाव में राजा भैया ने 99,612 वोट (50.58%) पाकर लगभग 30,000 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि गुलशन यादव को 69,297 वोट (35.19%) और भाजपा की सिन्धुजा मिश्रा को 16,455 वोट (8.36%) मिले। हालांकि उनकी जीत का अंतर 2017 के मुकाबले घटा, लेकिन उनका राजनीतिक प्रभाव अब भी मजबूत है, और 2022 के नतीजे बताते हैं कि मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा हो चुका है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
रघुराज प्रताप सिंह, जिन्हें लोग राजा भैया के नाम से जानते हैं, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा के एक प्रभावशाली और चर्चित नेता हैं। 1993 से लगातार विधायक चुने जाने का रिकॉर्ड उनके नाम है, और 2018 में उन्होंने अपनी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) की स्थापना की, जिसके वे राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। उनके परिवार का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव गहरा है। उनके दादा स्वतंत्रता सेनानी और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं। कानून, मिलिट्री साइंस और भारतीय मध्यकालीन इतिहास में स्नातक राजा भैया विभिन्न सरकारों में मंत्री पद संभाल चुके हैं, जिनमें खाद्य एवं रसद मंत्री का कार्यकाल भी शामिल है। हालांकि उनकी बाहुबली छवि और विवादों ने उन्हें कई बार सुर्खियों में रखा। जैसे 2013 के कुंडा तिहरे हत्याकांड में नाम आने पर उनका इस्तीफा लेकिन सीबीआई जांच में निर्दोष पाए जाने और क्लीन चिट मिलने के बाद वे दोबारा मंत्री बने। वर्तमान में उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
कुंडा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में कुंडा विधानसभा की राजनीति का केंद्र हमेशा की तरह राजा भैया रहे हैं, जिनका दबदबा 1993 से लगातार कायम है। 2022 में उन्होंने अपनी पार्टी जनसत्ता दल से चुनाव लड़ा, जबकि इससे पहले वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी बड़ी जीत दर्ज कर चुके हैं। यहां की राजनीति में जातीय समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं, जहां एससी, मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण, क्षत्रिय, अन्य पिछड़ी जातियां और वैश्य समुदाय की उल्लेखनीय मौजूदगी है। राजा भैया ने अपने कार्यकाल में विकास कार्यों, जनसुनवाई और सामाजिक कार्यक्रमों जैसे सामूहिक विवाह से लोगों के बीच पैठ बनाई है, हालांकि उनकी बाहुबली छवि और पुराने विवाद भी सुर्खियों में रहे हैं। हाल के चुनावों में समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने उन्हें चुनौती दी, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया, लेकिन क्षेत्र की राजनीति अब भी बड़े पैमाने पर उनके प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमती है।