लहरपुर विधानसभा सीट - Sitapur

लहरपुर

वर्तमान विधायक
श्री अनिल कुमार वर्मा
जिला
Sitapur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
समाजवादी पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
सीतापुर
लहरपुर विधानसभा सीट
लहरपुर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की एक प्रमुख विधानसभा सीट है। यह सीतापुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और कृषि आधारित क्षेत्र में शामिल है।ेलिमिटेशन के बाद इसका क्रमांक 148 है। यहां शहरी और ग्रामीण मिश्रित जनसंख्या है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: सीतापुर
विधानसभा क्रमांक: 148
लोकसभा क्षेत्र: सीतापुर
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: लगभग 3,80,000
साक्षरता दर: 61.1%
लिंग अनुपात: 945/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 70%
मुस्लिम: लगभग 28%
अन्य समुदाय: 2%
अनुसूचित जाति: अनुमानित 29%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,38,261
विजेता: अनिल कुमार वर्मा (सपा)
वोट 47.4%
उपविजेता: सुनील वर्मा (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 67.5%
लहरपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक सफर हमेशा उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1957 में हुए पहले चुनावों में कभी निर्दलीय तो कभी जनसंघ और कांग्रेस का प्रभाव दिखा, लेकिन 1990 के दशक से यह क्षेत्र सपा और बसपा का गढ़ बन गया। 1993 और 2002 में सपा जीती, जबकि 1996 और फिर 2007 से 2012 तक बसपा ने जीत दर्ज की। 2017 में पहली बार भाजपा ने सुनील वर्मा की जीत के साथ यहाँ कदम जमाया और बीएसपी के जसमीर अंसारी को हराकर समीकरण बदल दिए। हालांकि ब्राह्मण, ओबीसी, पासी, मुस्लिम और अनुसूचित जाति का संतुलन हमेशा से इस सीट पर निर्णायक रहा है। यही समीकरण और विकास को लेकर असंतोष 2022 में भाजपा के खिलाफ गया, जब समाजवादी पार्टी के अनिल वर्मा ने 45.03% वोट पाकर भाजपा उम्मीदवार सुनील वर्मा को 13,155 वोटों के अंतर से हरा दिया। बीएसपी तीसरे स्थान पर रही। इस नतीजे ने साफ कर दिया कि जनता ने बदलाव की मांग को तरजीह दी और सपा की वापसी चर्चा का बड़ा विषय बन गई।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
लहरपुर विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल कुमार वर्मा 57 वर्ष के हैं और पेशे से किसान, व्यवसायी व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल कर लहरपुर सीट पर सपा की वापसी कराई। चुनाव आयोग को दिए शपथपत्र के अनुसार उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज हैं, हालांकि यह गंभीर प्रकृति का नहीं है और अन्य कोई मामला सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। सामाजिक और राजनीतिक जीवन में वे अपने सक्रिय रुख और विकास कार्यों पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं, जिससे वे क्षेत्र के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं।
लहरपुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में लहरपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों को विकास की कमी, कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं, तकनीकी शिक्षा की अनुपलब्धता और सफाई व्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझना पड़ा है। लखनऊ जैसे बड़े शहर से सटा होने के बावजूद यहाँ सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ अभी भी अधूरी हैं, जिससे गाँवों का पिछड़ापन और अफसरशाही की उदासीनता मतदाताओं के बीच नाराज़गी का कारण बनी। स्वास्थ्य सेवाओं की हालत इतनी खराब है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त सुविधाएँ नहीं मिल पातीं और इलाज के लिए लोगों को दूर जाना पड़ता है। शिक्षा के मामले में भी क्षेत्र पिछड़ा रहा, खासकर तकनीकी शिक्षा के लिए संस्थान न होने से युवाओं को बाहर जाना पड़ता है। सफाई की स्थिति भी चिंताजनक रही, गाँवों और कस्बों में गंदगी और जलभराव आम है क्योंकि नगर परिषद समय पर सफाई नहीं कराती। सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में मुस्लिम, पासी, कुर्मी और ब्राह्मण जैसी बड़ी आबादी की अहम भूमिका रही है, जिससे मुद्दे और भी जटिल हो जाते हैं। इन सबने मिलकर लहरपुर के विकास और आम जनजीवन पर गहरा असर डाला है।

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