लखनऊ कैन्टोनमेंट विधानसà¤à¤¾ सीट - Lucknow
लखनऊ कैन्टोनमेंट |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री ब्रजेश पाठक |
| जिला | Lucknow |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 1,96,499 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | लखनऊ |
लखनऊ कैंट विधानसभा सीट
लखनऊ कैंट विधानसभा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जिले की ऐतिहासिक व प्रमुख शहरी सीट है। यह क्षेत्र लखनऊ के सैन्य (कैंट) और असैन्य क्षेत्रों के साथ-साथ सदर बाजार, आलमबाग, आशियाना, कृष्णा नगर, चारबाग, मवैया नाका, तेलीबाग जैसे इलाके कवर करता है। यह लखनऊ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। विधानसभा क्रमांक 175 है और सीट सामान्य (गैर-आरक्षित) है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: लखनऊ
विधानसभा क्रमांक: 175
लोकसभा क्षेत्र: लखनऊ
आरक्षण: कोई नहीं (सामान्य)
अनुमानित आबादी: लगभग 3,85,000
साक्षरता दर: करीब 79%
लिंग अनुपात: 912/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 75-78%
मुस्लिम: 19-20%
अन्य समुदाय: 2-3%
अनुसूचित जाति: 16-18%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,96,499
विजेता: ब्रजेश पाठक (भाजपा)
वोट शेयर: 55.0%
उपविजेता: सुरेंद्र सिंह गांधी 'राजू गांधी' (सपा)
मतदान प्रतिशत: 53.3%
लखनऊ कैंट विधानसभा सीट न सिर्फ राजनीतिक रूप से बेहद प्रतिष्ठित रही है, बल्कि इसकी सामाजिक बनावट भी बेहद विविधतापूर्ण है। छावनी, चारबाग, आलमबाग और सदर जैसे क्षेत्रों को समेटे यह सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। आजादी के बाद कांग्रेस ने यहां 7 बार जीत दर्ज की। लेकिन 1991 के बाद से भाजपा ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई और तब से अब तक वह भी 7 बार विजेता रही है। सुरेश चंद्र तिवारी और सतीश भाटिया जैसे नेताओं ने लंबे समय तक भाजपा का नेतृत्व किया, वहीं कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी ने 2012 में इसे एक बार फिर कांग्रेस के खाते में डाला, लेकिन बाद में वे भाजपा में शामिल होकर 2017 में फिर से जीतीं। 2022 के चुनाव में भाजपा ने ब्रजेश पाठक को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने करीब 40,000 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। इस सीट पर ब्राह्मण, सिंधी/पंजाबी, मुस्लिम और अनुसूचित जाति के मतदाता चुनावी रुझान तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अपने स्तर पर कई कोशिशें कीं, लेकिन भाजपा की जातीय संतुलन साधने की रणनीति और विकास योजनाओं के वादों ने पार्टी की पकड़ को और मजबूत बना दिया है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
ब्रजेश पाठक उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली और सुलझे हुए नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। वर्तमान में वे राज्य के उप मुख्यमंत्री हैं और भाजपा के वरिष्ठ ब्राह्मण चेहरों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 25 जून 1964 को हरदोई के मल्लावां में हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई के दौरान ही वे छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए और 1989-90 में छात्र संघ के उपाध्यक्ष और अध्यक्ष बने। अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत उन्होंने कांग्रेस से की, फिर बसपा में रहकर 2004 में उन्नाव से सांसद चुने गए और मायावती सरकार में राज्यसभा सदस्य भी बने। 2016 में भाजपा से जुड़ने के बाद 2017 में लखनऊ सेंट्रल से विधायक बने और 2022 में लखनऊ कैंट से भारी मतों से जीतकर योगी सरकार में उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली। वे कानून, न्याय और ग्रामीण अभियंत्रण जैसे विभागों का दायित्व भी संभाल चुके हैं। उनकी छवि साफ-सुथरी मानी जाती है और 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ कोई भी गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
लखनऊ कैंट विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र ने कई जमीनी और जटिल समस्याओं का सामना किया। सड़कें जर्जर रहीं, बारिश में जलभराव आम बात बनी रही और लोगों को पीने के पानी व बिजली की किल्लत ने परेशान किया। क्षेत्र का बड़ा हिस्सा छावनी बोर्ड के अधीन होने के कारण विकास योजनाओं में सैन्य और असैन्य विभागों के बीच तालमेल की कमी ने कई परियोजनाओं को अटका दिया। अवैध निर्माण, खुले कूड़े के ढेर और सार्वजनिक सुविधाओं की अनदेखी ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया। चारबाग, आशियाना और सदर जैसे इलाकों में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्याएँ लगातार बढ़ीं। वहीं, टिकट वितरण और दल-बदल जैसे राजनीतिक मुद्दों ने जनता के भीतर असंतोष को जन्म दिया। क्षेत्र की जातीय-सामाजिक विविधता ब्राह्मण, पंजाबी-सिंधी, मुस्लिम और अनुसूचित जातियों की भागीदारी ने जनविमर्श को दिशा दी। बीजेपी ने भले ही मजबूत पकड़ बनाए रखी, लेकिन कांग्रेस और सपा ने अपने तरीकों से लगातार चुनौती पेश करने की कोशिश की। कुल मिलाकर, लखनऊ कैंट में विकास और राजनीतिक नेतृत्व के बीच की खींचतान, आम लोगों के मुद्दों को केंद्र में रखकर ही देखी और समझी गई।