लखनऊ पूर्व विधानसभा सीट - Lucknow

लखनऊ पूर्व

वर्तमान विधायक
श्री ओपी श्रीवास्तव
जिला
Lucknow
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
लखनऊ
लखनऊ पूर्वी विधानसभा सीट
लखनऊ पूर्वी विधानसभा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मुख्य पूर्वी हिस्सों- गोमतीनगर, इंदिरानगर, महानगर, बादशाहनगर, एचएएल, चिनहट आदि को कवर करती है। यह सीट शहरी और व्यापारिक गतिविधियों, उच्च-मध्यम वर्ग आबादी, शिक्षित मतदाता वर्ग और राजनीतिक रूप से भाजपा का गढ़ मानी जाती है। विधानसभा क्रमांक 173 है और यह किसी भी वर्ग के लिए आरक्षित नहीं है। यह सीट लखनऊ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: लखनऊ
विधानसभा क्रमांक: 173
लोकसभा क्षेत्र: लखनऊ
आरक्षण: गैर-आरक्षित (सामान्य)
अनुमानित आबादी: 3.5-4 लाख
साक्षरता दर: 79.33%
लिंग अनुपात: 906/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 73-76%
मुस्लिम: 21-23%
अन्य समुदाय: 2–3%
अनुसूचित जाति: लगभग 15-17%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,55,873
विजेता: अशुतोष टंडन 'गोपल जी' (भाजपा)
वोट शेयर: 59.8%
उपविजेता: अनुराग सिंह भदौरिया (सपा)
मतदान प्रतिशत: 55.8%
2024 में उपचुनाव
विजेता: ओ. पी. श्रीवास्तव (भाजपा)
वोट शेयर: 59.8%
उपविजेता: मुकेश सिंह चौहान (कांग्रेस)
लखनऊ पूर्वी विधानसभा सीट भाजपा का लंबे समय से मजबूत गढ़ रही है। 1991 में भगवती शुक्ला की जीत से शुरू हुआ यह सिलसिला अब तक जारी है, और पार्टी ने इस सीट पर लगातार दबदबा बनाए रखा है। हाल के वर्षों में इस सीट से भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आशुतोष टंडन विधायक रहे, जिन्होंने 2014 के उपचुनाव से लेकर 2017 और 2022 तक लगातार बड़े अंतर से जीत दर्ज की। 2022 में उन्होंने सपा के अनुराग भदौरिया को करीब 69,000 वोटों से हराया, जबकि भाजपा का वोट शेयर 59.40% रहा। जातीय समीकरण की बात करें तो ब्राह्मण, ठाकुर, कायस्थ, गुप्ता और अन्य सवर्ण समुदाय यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं, जो भाजपा के समर्थन में रहे हैं। मुस्लिम और यादव वोटरों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, जिस कारण सपा यहां मुख्य विपक्षी पार्टी होने के बावजूद भाजपा को टक्कर नहीं दे पाई। 2024 में आशुतोष टंडन के निधन के बाद हुए उपचुनाव में भी भाजपा ने अपनी पकड़ बरकरार रखते हुए ओ.पी. श्रीवास्तव को मैदान में उतारा, जिन्होंने कांग्रेस के मुकेश सिंह चौहान को लगभग 54,000 वोटों से हराया। इस सीट पर कांग्रेस और बसपा का असर सीमित रहा है। हालांकि, ट्रैफिक जाम, जलभराव, सीवर लाइन, वेंडिंग जोन, बालिकाओं के लिए सरकारी स्कूल और रोजगार जैसे मुद्दे आज भी आम जनता के लिए गंभीर हैं और चुनावी बहस का हिस्सा बनते रहे हैं। कुल मिलाकर, लखनऊ पूर्वी विधानसभा भाजपा के लिए एक बेहद सुरक्षित और प्रभावशाली सीट बनी हुई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
ओ.पी. श्रीवास्तव, जिन्हें ओम प्रकाश श्रीवास्तव के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ और जमीनी स्तर के नेता हैं। 2024 में हुए उपचुनाव में उन्होंने लखनऊ पूर्वी विधानसभा सीट से जीत हासिल की और विधायक बने। वे लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं और पार्टी संगठन में कई अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं जैसे प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य, आजीवन सहयोग निधि विभाग के प्रदेश संयोजक और पूर्व में अवध क्षेत्र के कोषाध्यक्ष। 1957 में जन्मे श्रीवास्तव संगठन में अपने समर्पण और सक्रिय भागीदारी के लिए पहचाने जाते हैं। उपलब्ध सार्वजनिक व चुनावी जानकारियों के मुताबिक, उनके खिलाफ किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उनके नामांकन दस्तावेज भी साफ-सुथरे हैं। उनकी छवि एक अनुशासित, सच्चे संगठनकर्ता और ईमानदार जनप्रतिनिधि की है।
लखनऊ पूर्वी विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में लखनऊ पूर्वी विधानसभा क्षेत्र ने कई अहम समस्याओं का सामना किया है, जो आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। क्षेत्र की कई सड़कों की हालत बेहद खराब रही है, जिससे आवागमन में दिक्कतें और ट्रैफिक की समस्या बनी रहती है। बरसात के मौसम में जलभराव एक गंभीर समस्या बनकर सामने आती है, जिससे न सिर्फ आने-जाने में परेशानी होती है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ जाती हैं। शहरी सुविधाओं की बात करें तो सफाई, पार्क, सड़क चौड़ीकरण और लाइटिंग जैसी बुनियादी ज़रूरतों की कमी, खासतौर पर विस्तार क्षेत्रों में महसूस की जाती रही है। पेयजल संकट भी लगातार उठा है कई मोहल्लों में पाइपलाइन और बोरिंग से जुड़ी समस्याएं जस की तस हैं। वहीं, महिलाओं की शिक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है, क्योंकि क्षेत्र में सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों की भारी कमी है। मुख्य बाजारों और चौराहों पर अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग से यातायात जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। क्षेत्र का जातीय समीकरण जिसमें दलित, क्षत्रिय, ब्राह्मण, कायस्थ, मुस्लिम, यादव जैसे समुदाय शामिल हैं। काफी जटिल है और हर वर्ग की अपनी-अपनी मांगें हैं। इन तमाम मुद्दों ने न सिर्फ लोगों की दिनचर्या को प्रभावित किया है, बल्कि क्षेत्र की राजनीति को भी दिशा दी है। हाल ही में विधायक आशुतोष टंडन के निधन के बाद 2024 के उपचुनाव में यही बुनियादी समस्याएं और विकास की मांग सबसे बड़े चुनावी मुद्दे बनकर उभरी हैं।

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