महसी विधानसभा सीट - Bahraich

महसी

वर्तमान विधायक
श्री सुरेश्‍वर सिंह
जिला
Bahraich
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
बहराइच
महसी विधानसभा सीट
महसी विधानसभा सीट (संख्या 285) उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित है और बहराइच लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह एक जनरल सीट है, जिसमें मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र आते हैं और शहरी मतदाता लगभग शून्य हैं। महसी सीट पर पिछले दो चुनावों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दबदबा रहा है।
जनसंख्या एवं डेमोग्राफिक डिविडेंड
- कुल मतदाता (2022): 3,40,015
- अनुमानित कुल जनसंख्या: 4–4.2 लाख
- साक्षरता दर: 55–60%
धार्मिक एवं सामाजिक समुदाय विभाजन
- अन्य पिछड़ा वर्ग: 40–45% (अनुमानित)
- मुस्लिम: 20–25%
- SC : 18–20%
- सवर्ण: 10–15%
राजनीतिक इतिहास और चुनावी रुझान
2022 चुनाव परिणाम
विजेता: सुरेश्वर सिंह (भाजपा)
वोट शेयर: 54.58%
उपविजेता: के. के. ओझा (सपा)
मतदान प्रतिशत: 63.5%
महसी विधानसभा सीट में पिछले दो दशकों के दौरान कई बार सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है, लेकिन हाल के वर्षों में यह सीट भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ बन गई है। 2002 में बसपा के अली बहादुर ने सपा को हराया था, जबकि 2007 में भाजपा के सुरेश्वर सिंह ने बसपा के अली अकबर को बेहद कम अंतर (441 वोट) से पराजित किया। 2012 में बसपा ने वापसी की और कृष्ण कुमार ओझा ने सुरेश्वर सिंह को हराया। इसके बाद 2017 में सुरेश्वर सिंह ने कांग्रेस के अली अकबर को रिकॉर्ड 58,969 वोटों के अंतर से हराकर जोरदार वापसी की, और 2022 में भी उन्होंने सपा के के.के. ओझा को 42,000 से अधिक वोटों से हराकर सीट बरकरार रखी। इस दौरान कांग्रेस और बसपा के उम्मीदवार भी मैदान में रहे लेकिन मुकाबला भाजपा और सपा के बीच सिमट गया। 2017 और 2022 में क्रमशः 61.9% और 63.52% मतदान हुआ, जो राज्य के औसत के करीब रहा, और भाजपा के पक्ष में वोट अंतर लगातार बढ़ता गया है।
परिचय और राजनीतिक पृष्ठभूमि
सुरेश्वर सिंह, भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं, जो महसी विधानसभा (बहराइच) से 2017 और 2022 में लगातार दो बार चुने गए। उनका राजनीतिक परिवारिक पृष्ठभूमि मजबूत है—पिता दो बार और माता एक बार विधायक रह चुकी हैं। ग्रामीण और सवर्ण मतदाताओं के बीच उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है। अक्टूबर 2024 में क्षेत्र में हुई हिंसा के दौरान उन्होंने अपनी ही पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं के खिलाफ गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें उनके बेटे पर हमले का आरोप भी शामिल था। वहीं, जनवरी 2024 में उन्हें 21 साल पुराने एक मामले में दो साल की सजा और जुर्माना हुआ—हालांकि अपील लंबित होने के कारण उनकी विधायकी बनी हुई है। इसके अलावा, हाल ही में बंदूक के साथ उनकी तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिस पर उन्होंने सफाई दी कि यह लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए था, न कि कानून तोड़ने के लिए। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार: उन पर 5 आपराधिक मामला दर्ज है
पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
महसी विधानसभा क्षेत्र में पिछले पाँच वर्षों के दौरान कई गंभीर मुद्दे उभरकर सामने आए हैं। कृषि संकट क्षेत्र की प्रमुख चिंता रही, जिसमें किसानों को गन्ना, गेहूं और धान की फसल का समर्थन मूल्य मिलने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं हो पाया, सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और नहरों की कमी रही, तथा प्राकृतिक आपदाओं के बाद फसल बीमा और मुआवजा मिलने में देरी हुई। बुनियादी ढाँचा भी कमजोर रहा, गाँवों की सड़कों की हालत खराब, बिजली आपूर्ति अस्थिर और स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों और दवाओं की कमी से लोग परेशान रहे। शिक्षा व्यवस्था में सरकारी स्कूलों में अधूरी इमारतें, शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव स्पष्ट रूप से दिखा, वहीं रोजगार के अवसरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों में पलायन कर गए। सामाजिक रूप से भूमि विवाद, चोरी, महिलाओं के खिलाफ अपराध और जातीय भेदभाव जैसी समस्याएँ बनी रहीं, जबकि दलितों और पिछड़े वर्गों को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाया। बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएँ भी एक प्रमुख चुनौती रही, घाघरा और राप्ती नदियों से हर वर्ष कई गाँव प्रभावित हुए, लेकिन राहत और पुनर्वास कार्य अक्सर देरी और पारदर्शिता की कमी के कारण विवादित रहे। इसके साथ ही, राजनीतिक स्तर पर स्थानीय नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच टकराव, प्रशासनिक हस्तक्षेप और विकास कार्यों की धीमी गति ने जन असंतोष को बढ़ाया है।

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