मलिहाबाद विधानसà¤à¤¾ सीट - Lucknow
मलिहाबाद |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्रीमती जय देवी |
| जिला | Lucknow |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | मोहानलालगंज |
मलिहाबाद विधानसभा सीट
मलिहाबाद विधानसभा उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है। यह शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती है और मोहानलालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यह क्षेत्र आम के बागानों और पठान (अफरीदी) मुस्लिम आबादी के लिए प्रसिद्ध है। विधानसभा क्रमांक 168 है और यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: लखनऊ
विधानसभा क्रमांक: 168
लोकसभा क्षेत्र: मोहानलालगंज
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: 3,68,453 (तहसील)
साक्षरता दर: 65.21%
लिंग अनुपात: 907/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (तहसील)
हिंदू: 81.85%
मुस्लिम: 17.58%
नगर क्षेत्र: लगभग 62%
अन्य समुदाय: लगभग 0.57%
अनुसूचित जाति: 40.2%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,39,463
विजेता: जय देवी (भाजपा)
वोट शेयर: 44.4%
उपविजेता: इंदल कुमार (सपा)
मतदान प्रतिशत: 67.0%
मलिहाबाद विधानसभा सीट, जो लखनऊ के बाहरी क्षेत्र में स्थित है और दशहरी आम की पहचान से जानी जाती है, लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अहम भूमिका निभाती रही है। यह अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीट है, जिस पर शुरुआती दशकों में कांग्रेस का मजबूत वर्चस्व था 1957 से लेकर 1985 तक कांग्रेस ने कई बार जीत दर्ज की। बीच में 1977 में जनता पार्टी और 1989 में जनता दल को सफलता मिली। 1990 के दशक में समाजवादी पार्टी का प्रभाव बढ़ा और गौरी शंकर जैसे नेता 1993, 1996 और 2007 में विधायक बने। 2002 में कौशल किशोर ने निर्दलीय जीत हासिल कर सबको चौंका दिया, जबकि 2009 के उपचुनाव में बसपा के डॉ. सिद्धार्थ शंकर ने जीत दर्ज की। 2012 में फिर सपा की वापसी हुई जब इंदल कुमार विजयी हुए। लेकिन 2017 से मलिहाबाद की राजनीति ने करवट ली और भाजपा की जया देवी ने पहली बार पार्टी को इस सीट पर जीत दिलाई। 2022 में भी उन्होंने जीत दोहराई और भाजपा का वर्चस्व कायम रहा। भाजपा की इस लगातार सफलता के पीछे संगठन की ताकत, जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति और स्थानीय सांसद कौशल किशोर का प्रभाव अहम रहा। हालिया चुनावों में मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और सपा के बीच रहा, जबकि बसपा और कांग्रेस की उपस्थिति सीमित रही। 2022 में जया देवी ने सपा के सोनू कनौजिया को 7,745 वोटों से हराया। भाजपा का वोट शेयर स्थिर रहा है, जबकि विपक्ष बिखरा हुआ नजर आया। सामाजिक दृष्टिकोण से यह सीट अनुसूचित जाति, ओबीसी, मुस्लिम और सामान्य वर्गों का मिला-जुला समीकरण पेश करती है, और भाजपा ने हालिया वर्षों में इन सभी वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत की है। कुल मिलाकर, 2017 से मलिहाबाद में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ा है और विपक्ष अपनी पुरानी जमीन तलाशने की कोशिश कर रहा है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
जय देवी, जिन्हें जया देवी कौशल के नाम से भी जाना जाता है, मलिहाबाद (लखनऊ) विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की विधायक हैं। वे 2017 और 2022 में लगातार दो बार इस एससी सुरक्षित सीट से जीत दर्ज कर चुकी हैं। करीब 57 वर्षीय जय देवी की शिक्षा औपचारिक नहीं है, लेकिन वे साक्षर हैं और कृषि कार्यों से जुड़ी रही हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने 2017 में भाजपा के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की पत्नी हैं, जिनके राजनीतिक अनुभव और नेटवर्क का उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर लाभ मिला। जय देवी सामाजिक और समुदाय आधारित मुद्दों पर खास सक्रिय रहती हैं चाहे वो दशहरी आम किसानों की समस्याएं हों या अनुसूचित जाति, ओबीसी और मुस्लिम समुदाय से जुड़ी बुनियादी ज़रूरतें। दो बार विधायक बनने वाली मलिहाबाद की पहली महिला प्रतिनिधि के रूप में उनकी पहचान है। सबसे अहम बात यह है कि उनके खिलाफ न तो कोई आपराधिक मामला दर्ज है, न ही उनके किसी चुनावी हलफनामे में ऐसा कोई जिक्र है।
मलिहाबाद विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र, जो अपनी विश्व प्रसिद्ध दशहरी आम पट्टी के लिए जाना जाता है, पिछले पांच वर्षों में कई अहम मुद्दों से जूझता रहा है। यहां के बागवान नकली कीटनाशकों, मौसम की मार जैसे ओलावृष्टि, सूखा और फसलों में बीमारी से लगातार प्रभावित होते रहे हैं, लेकिन सरकारी मुआवजा और सहायता की प्रक्रिया को लेकर असंतोष बना रहा। किसानों को सिंचाई, खाद-बीज की गुणवत्ता, मंडी व्यवस्था और समर्थन मूल्य को लेकर भी कई परेशानियां झेलनी पड़ीं। बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो गांव और कस्बों में सड़कें जर्जर रहीं, जल और बिजली आपूर्ति अनियमित रही, और स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी चिंताजनक बनी रही। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, डॉक्टरों और दवाओं की कमी साफ महसूस की गई। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की बदहाली, शिक्षकों की कमी और उच्च शिक्षा संस्थानों का अभाव लगातार चर्चा में रहा। यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, लेकिन इसके साथ मुस्लिम, यादव, मौर्य, क्षत्रिय, ब्राह्मण और वैश्य समुदायों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर भी स्थानीय स्तर पर असंतोष देखा गया। रोजगार की कमी के चलते युवाओं का लखनऊ और अन्य शहरों की ओर पलायन जारी रहा। वहीं, बढ़ते शहरीकरण के कारण भूमि विवाद, अतिक्रमण और आवास योजनाओं के धीमे क्रियान्वयन ने समस्याएं और बढ़ा दीं। काकोरी शहीद स्मारक, बराह देवी मंदिर और केंद्रीय बागवानी संस्थान जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की मांग भी क्षेत्र की जनता लंबे समय से उठाती रही है।