मानिकपुर विधानसà¤à¤¾ सीट - Chitrakoot
मानिकपुर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | अविनाश चन्द्र द्विवेदी |
| जिला | Chitrakoot |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | अपना दल (सोनेलाल) |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बाँदा |
मानिकपुर विधानसभा
मानिकपुर उत्तर प्रदेश विधान सभा का एक निर्वाचन क्षेत्र है, जो उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद में स्थित मानिकपुर सरहट नगर को सम्मिलित करता है। मानिकपुर, बाँदा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। वर्ष 2008 से यह विधानसभा क्षेत्र 403 में से 237वें नंबर पर सूचीबद्ध है।
विधानसभा संख्या: 237
जनपद: चित्रकूट
लोकसभा क्षेत्र: बाँदा
आरक्षण स्थिति: सामान्य
जनसंख्या विभाजन (जनगणना 2011)
मानिकपुर नगर पंचायत
कुल जनसंख्या (2011): 15,435
पुरुष: 8,019
महिला: 7,416
लिंग अनुपात:925/1,000
साक्षरता दर: 66.71%
जनपद चित्रकूट (जिला)
कुल जनसंख्या: 9,91,730
SC जनसंख्या: 26.9%
लिंग अनुपात:879/1,000
साक्षरता दर: 65.05%
धार्मिक एवं साम्प्रदायिक विभाजन (जनगणना 2011)
हिन्दू: 64.03%
मुस्लिम: 35.28%
ईसाई: 0.60%
सिख: 0.01%
बौद्ध: 0.03%
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,04,605
विजेता: अविनाश चंद्र द्विवेदी (अपना दल (सोनेलाल))
वोट शेयर: 42.2%
उपविजेता: वीर सिंह पटेल (सपा)
मतदान प्रतिशत: 61.2%
मानिकपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास विविध और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 1980 और 1985 में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की थी और 1989 में भी कांग्रेस की सिया दुलारी विजेता रहीं। इसके बाद 1996 से 2012 तक यह सीट बसपा के प्रभाव में रही, जहां दद्दू प्रसाद और चंद्रभान सिंह पटेल जैसे नेताओं ने लगातार जीत हासिल की। दद्दू प्रसाद मायावती सरकार में मंत्री भी रहे। 2017 में भाजपा ने इस सीट पर पहली बार बड़ी जीत दर्ज की, जब आर.के. सिंह पटेल ने रिकॉर्ड 84,988 वोट हासिल कर बसपा का गढ़ तोड़ा। 2019 के उपचुनाव में भाजपा के आनंद शुक्ला ने सपा के डॉ. निर्भय सिंह पटेल को हराया। 2022 में पहली बार अपना दल (सोनेलाल) ने अविनाश चंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में बेहद करीबी मुकाबले में सपा को हराकर सीट जीत ली। बहुजन समाज पार्टी तीसरे स्थान पर रही, जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा। सपा अब तक इस सीट पर कभी जीत हासिल नहीं कर सकी है। जातीय समीकरण जैसे पटेल, कुशवाहा, दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाता यहां के नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। साथ ही, मानिकपुर एक पठारी और कभी-कभार डकैत प्रभावित क्षेत्र रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था, सड़क, सिंचाई, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दे यहां के प्रमुख चुनावी विषय रहे हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
अविनाश चंद्र द्विवेदी, जो अपना दल (सोनेलाल) के नेता हैं, वर्तमान में उत्तर प्रदेश की मानिकपुर (चित्रकूट) विधानसभा सीट से विधायक हैं। उनका जन्म ग्राम महिला (जिला कौशांबी) में हुआ था, जबकि उनका पारिवारिक निवास मऊ, चित्रकूट में है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1980 में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्होंने बालू, क्रशर, ट्रांसपोर्ट और शिक्षा के क्षेत्र में पारिवारिक व्यवसाय को आगे बढ़ाया। उनका राजनीतिक परिवार भी प्रभावशाली रहा है. उनके चाचा रमेशचंद्र द्विवेदी भाजपा से पूर्व सांसद रह चुके हैं, भाई शशि भूषण द्विवेदी अपना दल से प्रत्याशी रहे हैं और भाभी सुधा देवी कौशांबी में ब्लॉक प्रमुख हैं। वह अपना दल (एस) के व्यापार प्रकोष्ठ में प्रदेश सचिव के रूप में सक्रिय हैं। 2022 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और समाजवादी पार्टी के वीर सिंह पटेल को मात्र 1,048 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराकर विधायक बने। वह संगठन में अपनी सक्रियता और जनसेवा के लिए जाने जाते हैं। उनके 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
मानिकपुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र में कई गंभीर और जनसरोकार से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। ग्रामीण सड़कों की बदहाल स्थिति, नहरों की सफाई और सिंचाई साधनों की कमी के साथ-साथ पेयजल संकट जैसी बुनियादी अवसंरचना की समस्याएँ प्रमुख रहीं। कानून-व्यवस्था भी एक बड़ा विषय बना रहा, खासकर डकैतों की सक्रियता, चोरी की घटनाएँ, महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर जनता में नाराजगी रही। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की बदहाली, शिक्षकों व डॉक्टरों की कमी तथा संसाधनों के अभाव से लोग त्रस्त रहे और उच्च शिक्षा व बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की माँग बार-बार उठी। बेरोजगारी खासकर युवाओं के लिए एक प्रमुख चिंता रही, जहाँ स्वरोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के संसाधन और स्थानीय रोजगार के अवसरों की भारी कमी महसूस की गई। बालू खनन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में रोजगार की संभावनाएं भी विवाद और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण विवादास्पद बने रहे। इसके अलावा, दलित, पिछड़ा और मुस्लिम समुदाय से जुड़े सामाजिक न्याय, सरकारी योजनाओं की पहुँच और सुरक्षा के मुद्दे भी चुनावी विमर्श में केंद्र में रहे। अवैध बालू खनन, नदियों की स्वच्छता और गिरते भूजल स्तर जैसे पर्यावरणीय विषयों ने भी क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया है।