मांट विधानसà¤à¤¾ सीट - Mathura
मांट |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री राजेश पाल सिंह उर्फ राजेश चौधरी |
| जिला | Mathura |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | मथुरा |
मांट विधानसभा सीट
मांट विधानसभा उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की एक महत्वपूर्ण ग्रामीण एवं कृषि-प्रधान विधानसभा सीट है। यह उत्तर प्रदेश विधान सभा के 403 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है और मथुरा लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसका गठन 2008 में परिसीमन के बाद हुआ और इसका विधानसभा क्रमांक 82 है। सीट पर 2012 से चुनाव आयोजित होते आ रहे हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: मथुरा
विधानसभा क्रमांक: 82
लोकसभा क्षेत्र: मथुरा
आरक्षण: सामान्य (कोई आरक्षण नहीं)
अनुमानित आबादी: लगभग 3,50,000
साक्षरता दर: 70.36%
लिंग अनुपात: 863/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (जिला)
हिंदू: 88-90%
मुस्लिम: 8-10%
अन्य समुदाय: 1-2%
अनुसूचित जाति: 19-20%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,23,606
विजेता: राजेश चौधरी (भाजपा)
वोट शेयर: 37.6%
उपविजेता: श्याम सुंदर शर्मा (बसपा)
मतदान प्रतिशत: 65.0%
मांट विधानसभा, जो 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई, मथुरा ज़िले की एक महत्वपूर्ण सीट बन चुकी है। यहां 2012 से चुनाव हो रहे हैं, लेकिन इस क्षेत्र की राजनीति का असली चेहरा श्याम सुंदर शर्मा रहे हैं, जो 1989 से 2017 तक लगातार आठ बार विधायक चुने गए। वो भी अलग-अलग पार्टियों जैसे कांग्रेस, बसपा, तृणमूल कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर। 2012 में RLD के जयंत चौधरी ने उन्हें हराया था, लेकिन उपचुनाव में वह फिर जीतकर लौटे। 2017 में जब प्रदेशभर में भाजपा की लहर थी, तब भी उन्होंने बसपा के टिकट पर मांट से जीत दर्ज की। मांट की राजनीति हमेशा बहुकोणीय रही है, जहां ब्राह्मण, जाट, दलित, गुर्जर, मुस्लिम और ओबीसी समुदाय के वोटरों का अहम योगदान रहता है। 2022 के चुनाव में यह समीकरण बदला जब भाजपा के राजेश चौधरी ने श्याम सुंदर शर्मा को हराकर पहली बार इस सीट पर पार्टी की जीत दर्ज की। करीब 3.16 लाख मतदाताओं में से 63.5% ने वोट डाले, और भाजपा ने जातीय संतुलन के साथ-साथ विकास के मुद्दों को भी भुनाया। यह साफ दिखाता है कि अब मांट की राजनीति केवल व्यक्ति आधारित नहीं रही, बल्कि दल और मुद्दे भी अहम हो चले हैं। 2022 का चुनावी नतीजा इस बात का संकेत है कि आगामी चुनावों में ग्रामीण विकास, रोजगार, शिक्षा और जातीय संतुलन जैसे मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
राजेश चौधरी भारतीय जनता पार्टी के एक पढ़े-लिखे, जुझारू और संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेता हैं, जो फिलहाल मांट (मथुरा) विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। राजेश चौधरी जाट समुदाय से आते हैं और उन्होंने राजनीति विज्ञान में पोस्टग्रेजुएशन के साथ-साथ एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई भी की है। उनका राजनीतिक सफर 1987 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर शुरू हुआ, जिसके बाद उन्होंने ABVP, भारतीय जनता युवा मोर्चा और बजरंग दल जैसे संगठनों में अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वह भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश प्रवक्ता भी रह चुके हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आठ बार के विधायक श्याम सुंदर शर्मा को हराकर मांट सीट से भाजपा की पहली जीत दर्ज की। उनकी छवि एक सुलझे, साफ-सुथरे और विवादों से दूर रहने वाले नेता की रही है। 2022 चुनावी शपथपत्र के अनुसार उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
मांट विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले कुछ वर्षों में मांट विधानसभा क्षेत्र ने कई बुनियादी समस्याओं का सामना किया है, जिनमें सबसे अहम रही विकास और आधारभूत संरचना की कमी। गांवों में आज भी पानी, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह नहीं पहुंची हैं। कई जगहों पर महिलाएं अब भी दूर-दराज से पीने का पानी लाने को मजबूर हैं। यमुना एक्सप्रेसवे बनने के बाद कुछ हद तक कनेक्टिविटी में सुधार ज़रूर आया, लेकिन ग्रामीण इलाकों की हालत जस की तस बनी हुई है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर लोगों में असंतोष है और उच्च शिक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर संसाधनों की भारी कमी है। स्वास्थ्य व्यवस्था भी कमजोर है, जिससे लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मथुरा जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। रोजगार की तलाश में युवाओं का पलायन आम हो चला है क्योंकि कृषि पर निर्भरता के बावजूद वैकल्पिक रोज़गार के अवसर सीमित हैं। लंबे समय से औद्योगिक विकास और स्वरोजगार की मांग उठती रही है। वहीं, जातीय और सामाजिक समीकरणों का भी यहां की राजनीति में गहरा असर है। जाट, ब्राह्मण, गुर्जर, वैश्य और अनुसूचित जाति समेत कई समुदाय यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं। किसान भी सिंचाई, समर्थन मूल्य और भुगतान जैसे मसलों को लेकर सरकार से असंतुष्ट रहे हैं। क्षेत्रीय नेताओं की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं चाहे वह विकास की अनदेखी हो या केवल चुनावी राजनीति को प्राथमिकता देना। हालांकि, हाल में मुड़लिया गांव में एक नवनिर्मित पुल का उद्घाटन हुआ है, जो विकास की ओर एक छोटा लेकिन सकारात्मक संकेत है। इन तमाम मुद्दों ने मांट क्षेत्र की राजनीति और जनता की अपेक्षाओं को नई दिशा दी है, जो आने वाले चुनावों में अहम भूमिका निभाएगी।