मथुरा विधानसà¤à¤¾ सीट - Mathura
मथुरा |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री श्रीकान्त शर्मा |
| जिला | Mathura |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | मथुरा |
मथुरा विधानसभा सीट
मथुरा विधानसभा उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की प्रमुख सीट है। इसका विधानसभा क्रमांक 84 है और यह मथुरा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से भी देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मथुरा नगरी, ब्रजभूमि का हृदय मानी जाती है और यहां का वोटर समाजिक तथा ग्रामीण-शहरी मिश्रण का बेहतरीन उदाहरण है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: मथुरा
विधानसभा क्रमांक: 84
लोकसभा क्षेत्र: मथुरा
आरक्षण: कोई नहीं (सामान्य)
अनुमानित आबादी (2011): 4,41,894
साक्षरता दर: लगभग 70.36% (जिला)
लिंग अनुपात: 863/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (अनुमान/जिला औसत)
हिंदू: लगभग 89-90%
मुस्लिम: 8-9%
अन्य समुदाय: 1-2%
अनुसूचित जाति: 13-15%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,62,543
विजेता: श्रीकांत शर्मा (भाजपा)
वोट शेयर: 60.5%
उपविजेता: प्रदीप माथुर (कांग्रेस)
मतदान प्रतिशत: 57.3%
मथुरा विधानसभा सीट, जो भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली के रूप में जानी जाती है, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से जितनी महत्वपूर्ण है, उतना ही इसका राजनीतिक इतिहास भी समृद्ध और दिलचस्प रहा है। यहां सबसे ज्यादा बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। अब तक कुल नौ बार, जिनमें से प्रदीप माथुर अकेले चार बार विधायक रहे। वहीं, भाजपा ने अब तक पांच बार जीत हासिल की है और 2017 से श्रीकांत शर्मा के नेतृत्व में पार्टी ने इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत की। जनता पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी एक-एक बार जीत दर्ज की है, लेकिन बसपा, सपा और रालोद अब तक यहां से जीत नहीं पाए हैं। हाल के चुनावी रुझानों से साफ है कि अब मुकाबला मुख्यतः भाजपा और कांग्रेस के बीच सिमट गया है। 2017 में भाजपा ने पहली बार इस सीट पर निर्णायक जीत हासिल की, जिसे 2022 में और भी मजबूत किया गया, जब श्रीकांत शर्मा ने लगभग 1 लाख वोटों के बड़े अंतर से कांग्रेस के प्रदीप माथुर को हराया। उस चुनाव में भाजपा को करीब 60% वोट मिले, जबकि बसपा और सपा का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। इस सीट पर ब्राह्मण, जाट, ठाकुर, बनिया, दलित, ओबीसी और मुस्लिम मतदाताओं का मिश्रण चुनावी समीकरण को काफी हद तक प्रभावित करता है। धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय विकास, रोजगार और सामाजिक सौहार्द जैसे विषय भी यहां के चुनावी विमर्श में अहम भूमिका निभाते हैं। कुल मिलाकर, मथुरा विधानसभा की राजनीति अब भाजपा की लगातार बढ़ती ताकत और कांग्रेस की पुरानी पकड़ के बीच संतुलन खोजने की जद्दोजहद बन गई है, जबकि बाकी दल फिलहाल हाशिए पर हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
श्रीकांत शर्मा, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मथुरा विधानसभा सीट से विधायक हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। उनके पिता राधा रमण शर्मा एक सरकारी शिक्षक थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी जुड़े रहे। श्रीकांत शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की और 1991–92 में कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे। वे शुरू से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सक्रिय कार्यकर्ता रहे और भाजपा संगठन में भी कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। 2017 में उन्होंने मथुरा से अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता और योगी सरकार में ऊर्जा मंत्री बने। 2022 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज कर इस सीट पर अपनी पकड़ को और मज़बूत किया। वे भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और पार्टी के मीडिया प्रबंधन से भी जुड़े रह चुके हैं। खास बात यह है कि श्रीकांत शर्मा के खिलाफ अब तक कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
मथुरा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में मथुरा विधानसभा क्षेत्र कई सामाजिक, धार्मिक और विकास से जुड़े मुद्दों का केंद्र बना रहा है। सबसे प्रमुख मुद्दा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और मस्जिद परिसर को लेकर चला आ रहा विवाद रहा, जिसने स्थानीय राजनीति और सामाजिक विमर्श को गहराई से प्रभावित किया। अयोध्या और काशी की तर्ज पर जन्मभूमि क्षेत्र के भव्य विकास की मांग भी तेज़ रही। दूसरी ओर, सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता और सार्वजनिक परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की अपेक्षा लगातार बनी रही, वहीं बंदरों की समस्या और महंगी बिजली जैसी स्थानीय परेशानियों ने भी असंतोष को जन्म दिया। मथुरा में हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच भाईचारा और सामाजिक समरसता को बनाए रखना एक और बड़ा पहलू रहा, जिसे लेकर कई नेता संवाद और शांति की बात करते रहे हैं। चूंकि यह क्षेत्र ग्रामीण और कृषि प्रधान है, इसलिए किसानों की समस्याएं, सिंचाई सुविधा, फसलों के उचित दाम और युवाओं को रोजगार जैसे मुद्दे भी लगातार उठते रहे हैं। इसके अलावा, बढ़ती महंगाई और गिरते जीवन स्तर ने आम जनता की रोज़मर्रा की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। इन तमाम मुद्दों ने मथुरा की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई है और आगे भी विकास और सामाजिक संतुलन को लेकर स्थायित्व की ज़रूरत महसूस की जा रही है।