मऊ विधानसà¤à¤¾ सीट - Mau
मऊ |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री अब्बास अंसारी |
| जिला | Mau |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | सुलेहदेव भारतीय समाज पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | घोसी |
मऊ विधानसभा सीट
मऊ विधानसभा उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। यह विधानसभा क्षेत्र घोसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और विधानसभा क्रमांक 356 है। मऊ सदर क्षेत्र की राजनीति में मुस्लिम समुदाय की प्रबल उपस्थिति है, जो चुनावी नतीजों पर गहरा प्रभाव डालती है। यह विधानसभा क्षेत्र ग्रामीण और शहरी मिश्रित क्षेत्र है, जहां जातीय और धार्मिक विभिन्नताएं चुनावी समीकरण तय करती हैं। इस क्षेत्र में लंबे समय तक मुख्तार अंसारी परिवार का राजनीतिक दबदबा रहा है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: मऊ
विधानसभा क्रमांक: 356
लोकसभा क्षेत्र: घोसी
आरक्षण: कोई आरक्षण नहीं (सामान्य)
अनुमानित आबादी: 3.2-3.5 लाख
साक्षरता दर: लगभग 72% (जिला)
लिंग अनुपात: 936/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 25-30%
मुस्लिम: 65-70%
अन्य समुदाय: 1-3%
अनुसूचित जाति: 15-18%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,77,686
विजेता: अब्बास अंसारी (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी)
वोट शेयर: 44.9%
उपविजेता: अशोक सिंह (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 57.9%
मऊ विधानसभा, उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की एक बेहद अहम और संवेदनशील सीट मानी जाती है, जो बुनकरों की बड़ी आबादी और सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण हमेशा सुर्खियों में रही है। 1957 में गठित इस सीट पर कांग्रेस, बसपा, भाजपा, समाजवादी पार्टी और निर्दलीय नेताओं का लंबे समय से दबदबा रहा है, लेकिन बीते कई दशकों से मुख्तार अंसारी और उनका परिवार यहां की राजनीति का केंद्र रहे हैं। मुख्तार अंसारी ने 1996 से 2017 तक अलग-अलग दलों से पांच बार लगातार जीत दर्ज की, जबकि 2022 में उनके बेटे अब्बास अंसारी ने सपा के टिकट पर चुनाव जीतकर राजनीतिक विरासत संभाली। हालांकि, उनकी सदस्यता रद्द होने के बाद सीट खाली हो गई और उपचुनाव की स्थिति बन गई, जिससे इलाके में राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। मऊ में मुस्लिम, दलित, यादव, राजभर, चौहान और ब्राह्मण जैसे कई जातीय समूह हैं, जिनका चुनावी असर बेहद अहम होता है। यहां के प्रमुख मुद्दों में रोजगार की कमी, शिक्षा की बदहाल स्थिति, बिजली की अनियमित आपूर्ति, बाढ़ की समस्या और बुनकरों की आर्थिक-सामाजिक स्थिति शामिल हैं। 2022 में कुल 4.77 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में अब्बास अंसारी ने भाजपा के अशोक सिंह को हराया था, लेकिन मुकाबला बेहद कांटे का रहा। भाजपा, सपा और सुभासपा के बीच इस सीट पर सीधी टक्कर मानी जाती है और आने वाले चुनावों में इसका नतीजा राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
अब्बास अंसारी, उत्तर प्रदेश की मऊ विधानसभा सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के विधायक हैं और चर्चित बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के बेटे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई करने वाले अब्बास शुरू में एक प्रतिभाशाली राष्ट्रीय स्तर के शूटर रहे हैं। उन्होंने कई नेशनल गोल्ड मेडल जीते और 2016 रियो ओलंपिक में भाग लेने का सपना भी देखा, लेकिन 2014 में एक सड़क दुर्घटना के बाद खेल छोड़कर राजनीति में कदम रखा। 2017 में उन्होंने घोसी विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद 2022 में समाजवादी पार्टी और एसबीएसपी गठबंधन के तहत मऊ से चुनाव जीतकर विधायक बने। उनकी पकड़ खासतौर पर मुस्लिम, पिछड़ा मुस्लिम और यादव मतदाताओं में मजबूत मानी जाती है। 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ 5 आपराधिक मामले दर्ज है।
मऊ विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में मऊ विधानसभा क्षेत्र कई राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का केंद्र बना रहा है। 2022 में विधायक अब्बास अंसारी की सदस्यता रद्द होने के बाद यहां राजनीतिक अस्थिरता बनी रही और उपचुनाव की स्थिति पैदा हो गई, जिसे अब 2025 के भीतर कराए जाने की संभावना है। इस उपचुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक सेमीफाइनल की तरह देखा जा रहा है। लंबे समय से अंसारी परिवार का इस क्षेत्र में दबदबा रहा है, लेकिन अब भाजपा, सुभासपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला बन गया है। मुस्लिम बहुल मऊ में दलित, यादव, राजभर जैसे अन्य जातीय समूह भी अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे जातीय समीकरण चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। विकास के मोर्चे पर क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की लगातार मांग रही है, जबकि साड़ी उद्योग से जुड़े बुनकरों की समस्याएं और उनके संरक्षण का मुद्दा भी खासा अहम रहा है। साथ ही कानून-व्यवस्था, सामाजिक शांति बनाए रखने और राजनीतिक तनाव को कम करने की कोशिशें भी इस दौरान जारी रहीं। कृषि, सिंचाई, समर्थन मूल्य और युवाओं के लिए रोजगार व कौशल विकास कार्यक्रमों की मांग ने भी स्थानीय राजनीति और जनचर्चा में प्रमुख स्थान बनाया है।