मीरगंज विधानसà¤à¤¾ सीट - Bareilly
मीरगंज |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | डॉo डी० सी० वर्मा |
| जिला | Bareilly |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 3,63,673 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बरेली |
मीरगंज विधानसभा सीट
मीरगंज, उत्तर प्रदेश की विधानसभा क्षेत्र संख्या 119 है, जो बरेली जिले में स्थित है। यह बरेली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यह क्षेत्र 2008 में परिसीमन के बाद बनाया गया था और पहला चुनाव 2012 में हुआ था। मीरगंज पूरी मीरगंज तहसील को कवर करता है, जिसमें फतेहगंज पश्चिमी और मीरगंज ब्लॉक शामिल हैं। यह सीट सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी में आती है। सामाजिक ताने-बाने और मतदान प्रवृत्तियाँ ग्रामीण और अर्ध-शहरी मिश्रण को दर्शाती हैं, जिससे यह सीट बरेली जिले की एक महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धी सीट बन जाती है।
जनसंख्या
कुल जनसंख्या (मीरगंज तहसील, 2011): 4,91,330
पुरुष: 2,60,137
महिला: 2,31,193
साक्षरता दर: 51.46%
अनुसूचित जाति (SC) जनसंख्या:12.4%
अनुसूचित जनजाति (ST) जनसंख्या: 44
धार्मिक और समुदायिक विभाजन
हिन्दू: 65.59%
मुस्लिम: 33.69%
ईसाई: 0.15%
सिख: 0.23%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 3,63,673
विजेता: डॉ. डी.सी. वर्मा (भाजपा)
वोट शेयर: 50.98%
उपविजेता: सुल्तान बेग (सपा)
मतदान प्रतिशत: 62.80%
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
डॉ. डी.सी. वर्मा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता हैं और उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की मीरगंज विधानसभा सीट से दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। वे पेशे से पशु चिकित्सक हैं और वर्तमान में वेटनरी काउंसिल ऑफ इंडिया एवं उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष पद का दायित्व निभा रहे हैं। अपने क्षेत्र में उन्होंने पशुपालन, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में सराहनीय कार्य किए हैं। उनकी पत्नी सरकारी महिला पॉलिटेक्निक, सी.बी. गंज, बरेली में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत हैं। 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल शपथपत्र और सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार, डॉ. डी.सी. वर्मा के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, और उत्तर प्रदेश के विधायकों की आपराधिक सूची में भी उनका नाम नहीं आता, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका आपराधिक रिकॉर्ड पूरी तरह शून्य है। चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
मीरगंज विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में मीरगंज विधानसभा क्षेत्र में कई बुनियादी समस्याएं लगातार चर्चा का विषय बनी रहीं। क्षेत्र के ग्रामीण और कस्बाई हिस्सों में जर्जर सड़कों, जलभराव और नालियों की सफाई की कमी ने लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों में डाला, जबकि सड़क मरम्मत और जलनिकासी को लेकर कई बार स्थानीय लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी, जर्जर भवनों और जरूरी सुविधाओं का अभाव देखा गया, साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों की माँग भी लगातार उठी। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक रही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और आपात चिकित्सा सुविधाओं की कमी खास तौर पर ग्रामीण इलाकों में बड़ी समस्या बनी रही। किसानों ने सिंचाई, खाद-बीज, फसल की कीमत और आवारा पशुओं से सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चिंता जताई, जबकि सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर न मिलने से नाराजगी रही। बेरोजगारी भी प्रमुख मुद्दा बना रहा; युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार, छोटे उद्योग और कृषि आधारित कामकाज को बढ़ावा देने की माँग तेज रही, खासकर प्रवासी मजदूरों की वापसी के बाद। राजनीतिक रूप से, क्षेत्र में जातीय और धार्मिक समीकरण चुनावी समीकरणों को प्रभावित करते हैं, जहां भाजपा और विपक्षी दलों के बीच विकास और योजनाओं को लेकर लगातार बहस होती रही। 2022 में मीरगंज में 62.80% मतदान हुआ, जो 2017 की तुलना में थोड़ा कम था, और मतदाता जागरूकता व निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई संगठनों ने प्रयास किए।