महरौनी विधानसà¤à¤¾ सीट - Lalitpur
महरौनी |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री मनोहर लाल |
| जिला | Lalitpur |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | झांसी |
महरौनी विधानसभा सीट
महरौनी विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में स्थित है और जिले के दक्षिणी हिस्से तथा आसपास के ग्रामीण अंचलों को समाहित करती है। यह झांसी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पाँच विधानसभा सीटों में से एक है। मेहरोनी सीट अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित है। यहाँ की राजनीतिक तस्वीर विविध रही है और बीते वर्षों में भाजपा का असर बढ़ा है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: ललितपुर
विधानसभा क्रमांक: 227
लोकसभा क्षेत्र: झांसी
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: लगभग 4,09,555 (तहसील)
साक्षरता दर: 62.48% (तहसील)
लिंग अनुपात: 913/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 74%
मुस्लिम: लगभग 13%
अन्य समुदाय: लगभग 13%
अनुसूचित जाति:14-18%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 3,33,503
विजेता: मनोहर लाल 'मन्नू' कोरी (भाजपा)
वोट शेयर: 55.4%
उपविजेता: किरण रमेश खतैक (बसपा)
मतदान प्रतिशत: 74.7%
मेहरोनी विधानसभा सीट पर परंपरागत रूप से बहुजन समाज पार्टी (बसपा), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस प्रमुख दावेदार रहे हैं। 1967 और 1974 में बीजेएस और 1977 में जनता पार्टी (जेएनपी) के उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की थी। हालांकि, 1990 के बाद से मुकाबला मुख्य रूप से बसपा और भाजपा के बीच सिमट गया। 2012 में फेरन लाल की जीत के साथ बसपा ने सफलता हासिल की, लेकिन 2017 और 2022 में भाजपा के मनोहर लाल ‘मन्नू’ कोरी ने लगातार बड़ी और निर्णायक जीत दर्ज कर पार्टी का वर्चस्व स्थापित कर दिया। खासकर 2022 में उन्होंने बसपा प्रत्याशी किरण रमेश खटीक को रिकॉर्ड 1,10,451 वोटों से हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की। सपा और कांग्रेस यहां लगातार कमजोर प्रदर्शन करती रही हैं, सपा तीसरे और कांग्रेस लगभग हाशिये पर पहुंच गई है। सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित होने के कारण दलित, पिछड़े और अन्य सामाजिक वर्गों की भागीदारी यहां चुनावी नतीजों में बड़ी भूमिका निभाती है। जातिगत समीकरणों में अहिरवार, कुशवाहा, यादव, लोधी, ब्राह्मण, कुर्मी, ठाकुर, आदिवासी, पाल, बंशकार, जैन और मुस्लिम मतदाता निर्णायक साबित होते हैं। हाल के वर्षों में भाजपा को इन सामाजिक समीकरणों का लाभ मिला है, जिससे वह लगातार दो बार भारी बहुमत से जीतकर क्षेत्र में मजबूत स्थिति बना चुकी है, जबकि बसपा और सपा अपनी पुरानी पकड़ को दोबारा कायम करने के लिए संघर्षरत हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
महरौनी विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक मनोहर लाल 'मन्नू' कोरी को एक ईमानदार, मेहनतकश और ज़मीनी नेता के रूप में जाना जाता है। अनुसूचित जाति (कोरी समुदाय) से आने वाले मन्नू कोरी का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बचपन में उन्होंने मूर्ति बनाने और मजदूरी जैसे काम किए। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा 1995 में जिला पंचायत सदस्य के रूप में शुरू की और कई बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। 2012 में उन्हें करीबी हार मिली, लेकिन 2017 और फिर 2022 में उन्होंने शानदार वापसी की। खासकर 2022 में उन्होंने 1,84,778 वोट हासिल कर अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को 1,10,451 वोटों से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। मन्नू कोरी बुंदेलखंड में जनसरोकार से जुड़े नेता माने जाते हैं और श्रम राज्य मंत्री के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं। उनके बेटे चंद्रशेखर कोरी भी राजनीति में सक्रिय हैं। जहां तक आपराधिक रिकॉर्ड की बात है, तो 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं। शिक्षा के तौर पर उन्होंने हाईस्कूल तक पढ़ाई की है, लेकिन उनका राजनीतिक अनुभव और जनता से जुड़ाव उन्हें इस क्षेत्र का एक प्रभावशाली नेता बनाता है।
मेहरोनी विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
मेहरोनी विधानसभा क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों के दौरान कई गंभीर और जमीनी मुद्दे उभरकर सामने आए हैं। क्षेत्र की जनता बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझती रही। चाहे वह जर्जर ग्रामीण सड़कें हों, नियमित जल आपूर्ति की दिक्कत हो या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमजोर हालत। शहरी इलाकों में सीवर लाइन की कमी और साफ-सफाई की लचर व्यवस्था ने भी नागरिकों को परेशान किया। किसानों की बात करें तो बेतवा नदी क्षेत्र में सूखा, नलकूपों के लिए बिजली की समस्या और सिंचाई के साधनों की कमी ने खेती पर असर डाला, वहीं मंडियों में उचित मूल्य न मिलने से किसान निराश नजर आए। शिक्षा और रोजगार की दिशा में भी तस्वीर चिंताजनक रही। उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी ने युवाओं को बाहर जाने पर मजबूर किया और रोजगार के सीमित अवसरों ने पलायन को बढ़ावा दिया। सामाजिक न्याय की दृष्टि से देखें तो यह सुरक्षित (एससी) सीट होने के कारण दलित समुदाय की भागीदारी, उनके मुद्दे और आरक्षण जैसे विषय लगातार चर्चा में रहे। जातिगत समीकरणों में अहिरवार, कुशवाहा, यादव, लोधी, ब्राह्मण, कुर्मी, ठाकुर, आदिवासी, पाल, बंशकार, जैन और मुस्लिम समुदायों की हिस्सेदारी और विकास की मांग भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी रही। इसके अलावा, रणछोर धाम, मुचकुंद गुफा, नीलकंठेश्वर, देवगढ़ जैसे सांस्कृतिक व ऐतिहासिक स्थलों के विकास की अनदेखी भी लोगों के बीच एक बड़ा मुद्दा रही। पंचायत और निकाय चुनावों के दौरान सरकारी योजनाओं की धीमी रफ्तार, भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी पर भी स्थानीय जनता ने सवाल उठाए और जनप्रतिनिधियों से क्षेत्रीय विकास के लिए अधिक सक्रियता की उम्मीद जताई।