मिर्जापुर विधानसà¤à¤¾ सीट - Mirzapur
मिर्जापुर |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | रत्नाकर मिश्रा |
| जिला | Mirzapur |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | मिर्जापुर |
मिर्जापुर विधानसभा सीट
मिर्जापुर विधानसभा पूर्वी उत्तर प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की प्रमुख शहरी, अर्धशहरी सीट है, जिसमें जिला मुख्यालय, पुराना व्यावसायिक बाजार और विंध्याचल धाम की आर्थिक सांस्कृतिक छाप साफ दिखती है। पत्थर क्रशर, खनन, ट्रांसपोर्ट, सब्जी फल मंडियों, गंगा किनारे के घाटों और धार्मिक पर्यटन की वजह से यहाँ राजनीति हमेशा विकास बनाम रोज़गार बनाम पर्यावरण की बहस के बीच घूमती रहती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: मिर्जापुर
विधानसभा क्रमांक: 396
लोकसभा क्षेत्र: 79
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित)
अनुमानित आबादी: 4,12,293
साक्षरता दर: लगभग 70 प्रतिशत
लिंग अनुपात: लगभग 890-910 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 92%
मुस्लिम: लगभग 7-8%
अन्य समुदाय: लगभग 0-1%
अनुसूचित जाति: 25-27%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
मिर्जापुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति समय के साथ काफी बदलती रही है। 1977 से लेकर 1990 के दशक तक यहां कभी कांग्रेस, कभी जनता दल और बाद में भाजपा और सपा के बीच सत्ता बदलती रही। 1980 और 1985 में कांग्रेस के असरफीमन और अजहर इमाम जैसे नेताओं ने चुनाव जीता, लेकिन 1989 के बाद भाजपा ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी और उस दौर में सरजीत सिंह डांग भाजपा का बड़ा चेहरा बने। इसके बाद 2002, 2007 और 2012 में यह सीट काफी हद तक कैलाश चौरसिया के इर्द-गिर्द रही और उन्होंने समाजवादी पार्टी से लगातार तीन चुनाव जीतकर मजबूत पकड़ बनाई।
2022 चुनावी परिणाम (मिर्जापुर विधानसभा)
कुल मतदाता: 2,25,993
मतदान प्रतिशत: 55.2%
विजेता: रत्नाकर मिश्रा (भाजपा)
वोट शेयर: 52.5%
उपविजेता: कैलाश चौरसिया (सपा)
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
रत्नाकर मिश्रा मिर्जापुर से भाजपा के विधायक हैं और ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। विंध्य क्षेत्र में वे धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों और वैदिक ज्ञान से जुड़े होने के कारण काफी पहचाने जाते हैं, साथ ही स्थानीय ब्राह्मण समाज और व्यापारी वर्ग के बीच उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है। उन्होंने 2017 में पहली बार मिर्जापुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता और लंबे समय से यहां मजबूत माने जाने वाले सपा नेता कैलाश चौरसिया को हराया। इसके बाद 2022 में भी उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर सीट पर भाजपा की पकड़ और मजबूत की। चुनावी हलफनामे या निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं मिलता है।
मिर्जापुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
मिर्जापुर क्षेत्र में चुनावों के दौरान कई स्थानीय मुद्दे लगातार चर्चा में रहते हैं। यहां पत्थर और बालू खनन तथा क्रशर उद्योग बड़ी संख्या में होने की वजह से धूल-प्रदूषण, पर्यावरण को नुकसान और खेतों पर असर जैसे मुद्दों पर लोग अक्सर आवाज उठाते हैं। शहर के अंदर ट्रैफिक जाम, संकरी और टूटी सड़कें, पार्किंग की कमी और गांवों में खराब सड़क-पुल की समस्या भी बड़ा मुद्दा रहती है। साथ ही विंध्याचल धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सफाई, पार्किंग, सीवर-ड्रेनेज और बेहतर व्यवस्था की मांग भी होती रहती है। शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी लोग शिकायत करते हैं, जैसे अच्छे कॉलेजों की कमी, अस्पतालों में भीड़, डॉक्टर और दवाओं की कमी, जिससे कई युवाओं को पढ़ाई और नौकरी के लिए प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ जैसे शहरों की ओर जाना पड़ता है। इसके अलावा कानून-व्यवस्था, अवैध शराब, जुआ, स्थानीय गैंग और खनन-माफिया से जुड़े मुद्दे भी चुनावी बहस का हिस्सा बनते रहे हैं।