मिश्रिख विधानसभा सीट - Sitapur

मिश्रिख

वर्तमान विधायक
श्री रामकृष्‍ण भार्गव
जिला
Sitapur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
मिश्रिख विधानसभा सीट
मिश्रिख विधानसभा उत्तर प्रदेश की सीतापुर जिले का एक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और उत्तर प्रदेश विधान सभा की 403 सीटों में से एक है। मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र का भी हिस्सा है। क्षेत्र कृषि प्रधान है और यहाँ विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्ग रहते हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: सीतापुर
विधानसभा क्रमांक: 153
लोकसभा क्षेत्र: मिश्रिख
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: लगभग 3,20,000
साक्षरता दर: लगभग 61%
लिंग अनुपात: लगभग 943/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 75%
मुस्लिम: लगभग 24%
अन्य समुदाय: लगभग 1%
अनुसूचित जाति: लगभग 22%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,19,843
विजेता: रामकृष्ण भार्गव (भाजपा)
वोट: 41.4%
उपविजेता: मनोज कुमार राजवंशी (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी)
मतदान प्रतिशत: 61.4%
मिश्रिख विधानसभा सीट, सीतापुर जिले की एससी आरक्षित सीट, कभी कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन समय के साथ यह भाजपा, सपा और बसपा के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गई। 1962 में यहां जनसंघ के गोकरण प्रसाद ने पहली जीत दर्ज की, जबकि 70 और 80 के दशक में कांग्रेस ने रामलाल राही और संकटा प्रसाद जैसे नेताओं के जरिए अपनी पकड़ मजबूत रखी। 1996 के बाद भाजपा धीरे-धीरे प्रभावी होती गई और बीच-बीच में सपा व बसपा ने भी जीत दर्ज की। इस सीट पर पासी समुदाय का वर्चस्व निर्णायक भूमिका निभाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रामकृष्ण भार्गव ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के मनोज कुमार राजवंशी को 11,465 वोटों से हराकर जीत हासिल की। भार्गव को कुल 41.15% वोट मिले, जबकि राजवंशी को 35.97% वोट और बसपा के श्याम किशोर को 15.66% वोट हासिल हुए। कुल मतदान प्रतिशत करीब 41.15% रहा। हालिया रुझान साफ दिखाते हैं कि मिश्रिख में अब भाजपा का प्रभाव लगातार मजबूत हो रहा है और चुनावी रणनीति में सामाजिक समीकरण और विकास के मुद्दे अहम भूमिका निभाते हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
रामकृष्ण भार्गव, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक हैं। सीतापुर के मधवापुर में जन्मे भार्गव पासी समुदाय से आते हैं। इंटरमीडिएट तक पढ़ाई करने के बाद वे कृषि और व्यापार से जुड़े रहे। उनका परिवार पत्नी मिथिलेश कुमारी और दो पुत्रों से मिलकर बना है। 1984 से राजनीति में सक्रिय भार्गव अब तक कई बार विधायक चुने जा चुके हैं और 2017 व 2022 के चुनावों में भी जीत हासिल की। वे क्षेत्रीय विकास और सामाजिक सेवा के लिए जाने जाते हैं और विधानसभा में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। खास बात यह है कि उनके खिलाफ किसी भी तरह का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, जिससे वे एक साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।
मिश्रिख विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में मिश्रिख विधानसभा क्षेत्र की चर्चाएँ मुख्य रूप से विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर केंद्रित रही हैं। यहाँ सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति, जल निकासी और साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ लोगों की बड़ी चिंता बनी रहीं। साथ ही नैमिषारण्य के चक्रतीर्थ, ललिता देवी मंदिर, हनुमानगढ़ी और व्यास गद्दी जैसे धार्मिक स्थलों के संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग भी लगातार उठती रही। चूँकि यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, इसलिए दलित समुदाय की सामाजिक-आर्थिक उन्नति और उनके अधिकारों की सुरक्षा भी अहम विषय रहे। हाल के वर्षों में नगर निकाय उपचुनाव के दौरान सपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने का मामला सत्ता और विपक्ष के बीच विवाद का कारण बना। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और रोजगार सृजन भी ऐसे मुद्दे रहे हैं जो जनता बार-बार उठाती रही है। कुल मिलाकर, मिश्रिख में विकास, सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण, सामाजिक समानता और राजनीतिक टकराव पिछले पाँच सालों की सबसे बड़ी चुनौतियाँ रही हैं।

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