नज़ीबाबाद विधानसभा सीट - Bijnor

नज़ीबाबाद

वर्तमान विधायक
तसलीम अहमद
जिला
Bijnor
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
समाजवादी पार्टी
कुल मतदाता
2,14,773
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
नगीना
नजीबाबाद विधानसभा सीट
नजीबाबाद उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की एक महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है, जो नगीना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह क्षेत्र नजीबाबाद नगर, नांगल, सहनपुर, जलालाबाद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को सम्मिलित करता है।
जनसंख्या विभाजन (जनगणना 2011)
कुल जनसंख्या: 88,535
पुरुष: 46,372
महिलाएँ: 42,163
लिंग अनुपात: 909 /1,000
साक्षरता दर: 67.5%
धार्मिक और साम्प्रदायिक विभाजन (जनगणना 2011)
मुस्लिम : 50.37
हिन्दू : 48.44
सिख : 0.69
ईसाई: 0.13
बौद्ध 0.09
जैन: 0.04
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,14,773
विजेता: तस्लीम अहमद (सपा)
वोट शेयर: 40.2%
उपविजेता: कुंवर भारतेंदु सिंह (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 57.7%
नजीबाबाद विधानसभा सीट की स्थापना 1957 में हुई थी और शुरुआती दौर में यहां कांग्रेस का दबदबा रहा। बाद के वर्षों में यह सीट बहुदलीय प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गई, जहां वामपंथी, क्षेत्रीय और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। 1990 के दशक में सीपीएम के रामस्वरूप सिंह ने लगातार तीन बार जीत हासिल की, जबकि बसपा और सपा ने 2007 के बाद से अपना प्रभाव मजबूत किया। भाजपा को यहां केवल 1991 में राम मंदिर आंदोलन की लहर में जीत मिली थी, लेकिन इसके बाद वह लगातार पिछड़ती रही। मुस्लिम बहुल नजीबाबाद सीट पर मुस्लिम और दलित वोटरों का गठजोड़ चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाता है। हाजी तस्लीम अहमद ने 2012 में बसपा, और 2017 व 2022 में सपा के टिकट पर लगातार तीन बार जीत दर्ज की, जिससे उनका मजबूत जनाधार स्पष्ट होता है। बीजेपी हर बार दूसरे स्थान पर रही है, लेकिन जीत से दूर रही है। 2022 में सपा को 44.14% वोट मिले, जबकि भाजपा को 33.92% और बसपा को 19.23% वोट प्राप्त हुए। पिछले तीन चुनावों में सपा ने मुस्लिम-दलित समीकरण के बल पर बढ़त बनाई है, जबकि भाजपा की पकड़ यहां कमजोर बनी हुई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
हाजी तस्लीम अहमद, जिनका जन्म 15 फरवरी 1960 को नजीबाबाद, बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में हुआ, एक सफल व्यवसायी और समाजसेवी हैं, जो मसालों की फैक्ट्री का संचालन भी करते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नजीबाबाद में प्राप्त की और समाजवादी पार्टी से राजनीतिक सफर की शुरुआत की, जहां वे मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में माने जाते हैं। 2012 में उन्होंने बसपा के टिकट पर नजीबाबाद से पहली बार चुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद 2017 में सपा में वापसी कर दूसरी बार और 2022 में सपा-रालोद गठबंधन के तहत तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए। वर्तमान में वे नजीबाबाद से सपा के विधायक हैं और क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत है। उनके परिवार में पत्नी फरहत परवीन, एक पुत्र और तीन पुत्रियाँ हैं। सार्वजनिक जानकारी और चुनावी हलफनामों के अनुसार, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
नजीबाबाद विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में नजीबाबाद विधानसभा क्षेत्र में कई प्रमुख मुद्दे लगातार चुनावी विमर्श और जनचर्चा का हिस्सा रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी—जैसे जर्जर सड़कें, जल निकासी की खराब व्यवस्था, सफाई, पेयजल संकट और ट्रैफिक जाम—शहरी विकास की बड़ी चुनौतियाँ बनी रहीं। कभी कागज, लकड़ी और मसालों के उद्योग के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अब उद्योगों के संकट और बढ़ती बेरोजगारी से जूझ रहा है, जिससे युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार की कमी एक अहम मुद्दा बन गई है। कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द भी चिंता के विषय रहे, खासकर मुस्लिम बहुलता के चलते शांति व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी होती रही। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की बदहाली, शिक्षकों व डॉक्टरों की कमी और उच्च स्तरीय सुविधाओं की मांग लगातार उठती रही। ग्रामीण इलाकों में किसानों को सिंचाई, बिजली, फसल की कीमतों, भुगतान में देरी और आवारा पशुओं की समस्या ने प्रभावित किया। साथ ही, अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा, सरकारी योजनाओं में भागीदारी, मदरसों की स्थिति और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे भी लगातार चर्चा में बने रहे।

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