नवाबगंज विधानसभा सीट - Bareilly

नवाबगंज

वर्तमान विधायक
डा0 एम0 पी0 आर्य
जिला
Bareilly
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
बरेली
नवाबगंज विधानसभा क्षेत्र
नवाबगंज विधानसभा सीट, जो उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में स्थित है, 1952 में अस्तित्व में आई और बरेली लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। नवाबगंज उत्तर प्रदेश की विधानसभा क्षेत्र संख्या 121 है, जो बरेली जिले में स्थित है। यह बरेली लोकसभा क्षेत्र के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यह सीट सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) की है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के डॉ. एम.पी. आर्य ने विधायक पद जीता।
जनसंख्या
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 121
जिला: बरेली
लोकसभा क्षेत्र: बरेली
आरक्षण स्थिति: सामान्य (अनारक्षित)
नवाबगंज नगर की जनसंख्या (2011): 39,241
पुरुष: 20,308
महिलाएं: 18,933
लिंग अनुपात: 934/1,000
अनुसूचित जाति (SC) जनसंख्या: 5.51%
साक्षरता दर: 70.60%
धार्मिक और सामुदायिक विभाजन
मुस्लिम: 61.59%
हिन्दू : 36.89%
सिख : 0.94%
ईसाई: 0.46%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,29,052
विजेता: डॉ. एम.पी. आर्य (भाजपा)
वोट शेयर: 48.5%
उपविजेता: भगवतशरण गंगवार (सपा)
मतदान प्रतिशत: 67.8%
यह सीट राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जाती है, लेकिन यहां किसी एक पार्टी का स्थायी वर्चस्व नहीं रहा है। 1977 से 1985 तक कांग्रेस के चेतराम गंगवार का दबदबा रहा, जबकि 1989 में पहली बार बीजेपी के गेंदनलाल गंगवार विधायक बने। इसके बाद भगवत शरण गंगवार ने 1991 और 1993 में बीजेपी से जीत दर्ज की। 1996 में सपा के छोटेलाल ने पहली बार जीत हासिल की और फिर भगवत शरण गंगवार ने सपा में शामिल होकर 2002, 2007 और 2012 में लगातार तीन बार विधायक और मंत्री पद प्राप्त किया। 2017 में बीजेपी ने केसर सिंह गंगवार के नेतृत्व में बड़ी जीत दर्ज कर सपा के लंबे शासन को तोड़ा और 2022 में भी डॉ. एम.पी. आर्य गंगवार ने सपा के भगवत शरण गंगवार को 9,237 वोटों से हराकर सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा। 2022 में डॉ. आर्य को 48.20% और भगवत शरण गंगवार को 44.20% वोट मिले, जबकि बसपा और कांग्रेस को क्रमशः 4.81% और 0.88% वोट प्राप्त हुए। इस सीट पर कुर्मी समुदाय का खासा प्रभाव है और अधिकतर विधायक इसी बिरादरी से आते हैं। मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं, साथ ही ब्राह्मण, ठाकुर और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। कुल मिलाकर, नवाबगंज एक ऐसा निर्वाचन क्षेत्र है जहां जातीय समीकरण और बदलते राजनीतिक रुझान निर्णायक भूमिका निभाते हैं, और हाल के दो चुनावों में भाजपा की लगातार जीत ने उसकी पकड़ मजबूत की है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
डॉ. एम.पी. आर्य गंगवार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और उत्तर प्रदेश की नवाबगंज विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक हैं, जिन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। उनका जन्म 1958 में हुआ था और वे उच्च शिक्षित हैं, जिनके पास स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की डिग्रियाँ हैं। कुर्मी समाज के प्रभावशाली नेता और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में क्षेत्र में उनकी खास पहचान है। चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ 6 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराएं शामिल हैं। अधिकतर मामले राजनीतिक या सामाजिक आंदोलनों के दौरान दर्ज हुए हैं, और अब तक किसी भी मामले में न्यायालय द्वारा दोष साबित होने की जानकारी नहीं है।।
नवाबगंज विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में नवाबगंज विधानसभा क्षेत्र में कई बुनियादी और सामाजिक समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आईं। सबसे बड़ी चिंता बिजली संकट रही। वैकल्पिक व्यवस्था भी विफल रही, जिससे लोग पेयजल की किल्लत से जूझे। विधायक डॉ. एम.पी. आर्य ने बिजली विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए, लेकिन समाधान स्थायी नहीं निकल सका। गर्मियों में जल संकट भी गंभीर बना रहा, हैंडपंपों के खराब होने और तालाबों के सूखने से इंसान और मवेशी दोनों परेशान हुए, जिस पर किसानों ने प्रदर्शन कर सरकार से कार्रवाई की मांग की। क्षेत्र में सड़कों, पानी और बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं की कमी लगातार बनी रही, जबकि ओसवाल शुगर मिल के अलावा कोई बड़ा उद्योग न होने से रोजगार के अवसर सीमित रहे। इससे युवा वर्ग में बेरोजगारी और पलायन जैसी समस्याएं बढ़ीं। महंगाई भी आम जनता के लिए बड़ा मुद्दा बनी रही। किसानों को ट्यूबवेल कनेक्शन में अनियमितता, खाद-बीज की समस्या और फसल की उचित कीमत पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिनमें बिजली विभाग की कथित मिलीभगत के आरोप भी लगे। सामाजिक दृष्टि से, नवाबगंज की जातीय संरचना जिसमें मुस्लिम, कुर्मी, दलित, कश्यप और मौर्य समुदायों की बड़ी संख्या है, वह चुनावों को गहराई से प्रभावित करती है। राजनीतिक जागरूकता के संदर्भ में, 2022 में 66.70% मतदान हुआ, जो 2017 की तुलना में थोड़ा कम था, हालांकि विधायक और जनप्रतिनिधि लगातार जनता की समस्याओं को लेकर प्रशासन से संवाद करते रहे हैं।

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