निघासन विधानसà¤à¤¾ सीट - Lakhimpur Kheri
निघासन |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री शशांक वर्मा |
| जिला | Lakhimpur Kheri |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | खीरी (लखीमपुर) |
निघासन विधानसभा सीट
निघासन विधानसभा उत्तर प्रदेश के तराई और नेपाल बॉर्डर से सटे लखीमपुर खीरी जिले की रणनीतिक और संवेदनशील सीमा कृषि सीट है, जहां गन्ना, धान और तराई के जंगलों के साथ–साथ हिंसा, कानून व्यवस्था और किसान मुद्दे लगातार सुर्खियों में रहते हैं। यह सीट इसलिए भी खास है कि यहां से कभी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी विधायक रहे और बाद में उनके परिवार तथा ब्राह्मण, ओबीसी वोट बैंक की राजनीति के कारण यह प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीटों में गिनी जाने लगी।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: लखीमपुर खीरी
विधानसभा क्रमांक: 138
लोकसभा क्षेत्र: खीरी (लखीमपुर)
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित) सीट
अनुमानित आबादी: लगभग 4-4.5 लाख
साक्षरता दर: 60-65 प्रतिशत
लिंग अनुपात: 900-920 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 73.6%
मुस्लिम: 20.2%
सिख: 5.5%
अन्य समुदाय: 0.7%
अनुसूचित जाति: 20.3%
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 3,41,084
मतदान प्रतिशत: 69.4%
विजेता: शशांक वर्मा (भाजपा)
उपविजेता: आर.एस. कुशवाहा (सपा)
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
निघासन विधानसभा क्षेत्र की राजनीति काफी उतार–चढ़ाव वाली रही है। 1957 में जनसंघ के सूरत बहादुर शाह जीते, 1962 में रामचरण शाह, फिर 1967 और 1969 में कांग्रेस के ठाकुर करण सिंह सत्ता में आए। 1974 और 1977 में फिर रामचरण शाह जीते। 1980 और 1985 में कांग्रेस के सतीश अजमानी विधायक बने। 1989 और 1991 में निर्दलीय निरवेंद्र सिंह मुन्ना जीते और 1993 में सपा से फिर जीत दर्ज की। 1996 में भाजपा के रामकुमार वर्मा, 2002 में बसपा के आर.एस. कुशवाहा और 2007 में सपा के कृष्ण गोपाल पटेल ने भाजपा के अजय मिश्र टेनी को हराया। 2012 में अजय मिश्र टेनी भाजपा से पहली बार विधायक बने, जबकि 2017 में भाजपा ने रामकुमार वर्मा पटेल को टिकट दिया और उन्होंने सीट बरकरार रखी। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनके बेटे शशांक वर्मा को उतारा, जो जीत गए। 2022 में भी भाजपा ने उन्हीं पर भरोसा जताया और वे दोबारा जीतकर यहां भाजपा का वर्चस्व बनाए रखने में सफल रहे।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
शशांक वर्मा निघासन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं। वे पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रामकुमार वर्मा पटेल के बेटे हैं और उपचुनाव में पहली बार अपनी पारिवारिक राजनीतिक विरासत के दम पर विधानसभा पहुंचे। बाद में 2022 के आम चुनाव में भी उन्होंने दोबारा जीत हासिल की। चुनाव प्रचार में वे अक्सर यह कहते रहे कि वे अपने पिता के अधूरे विकास कार्यों को पूरा करेंगे। उनके चुनावी हलफनामे या निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से उनके खिलाफ किसी बड़े या गंभीर आपराधिक मामले का उल्लेख नहीं मिलता।
निघासन विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
निघासन विधानसभा क्षेत्र में राजनीति ज़्यादातर खेती और कानून व्यवस्था के मुद्दों के आसपास घूमती है। यहां गन्ना मुख्य फसल है, इसलिए सहकारी चीनी मिल की पेराई क्षमता, गन्ना भुगतान में देरी, कीमत और किसानों के बकाये जैसे सवाल हमेशा चुनाव में उठते हैं। तराई इलाका होने की वजह से बरसात में बाढ़, जलभराव और फसल नुकसान भी बड़ी समस्या है। उद्योग के नाम पर ज्यादा कुछ नहीं है, इसलिए युवाओं को रोजगार के लिए खीरी, लखनऊ, दिल्ली, एनसीआर या पंजाब, हरियाणा की ओर पलायन करना पड़ता है। शिक्षा और स्वास्थ्य की हालत भी चिंता का विषय है। सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, कॉलेजों की कमी और अस्पतालों में डॉक्टर दवा की दिक्कत अक्सर चर्चा में रहती है। लखीमपुर खीरी जिले में किसान आंदोलन और हिंसक घटनाओं के बाद यह इलाका कानून व्यवस्था और राजनीति को लेकर भी सुर्खियों में रहा। साथ ही यहां ब्राह्मण, ओबीसी और दलित वोट बैंक का संतुलन टिकट वितरण और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए हर पार्टी जातीय समीकरण साधने की कोशिश करती है।