निज़ामाबाद विधानसभा सीट - Azamgarh

निज़ामाबाद

वर्तमान विधायक
श्री आलम बदी
जिला
Azamgarh
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
समाजवादी पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
लालगंज
निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र
निजामाबाद उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले में स्थित 403 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यह सीट सामान्य श्रेणी में आती है और लालगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस लोकसभा क्षेत्र में निजामाबाद के साथ चार अन्य विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं: लालगंज, अतरौलिया, फूलपुर-पवई और दीदारगंज। निजामाबाद विधानसभा क्षेत्र में निजामाबाद नगर और इसके आस-पास के क्षेत्र शामिल हैं। यह क्षेत्र सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विविधतापूर्ण है। यहां यादव, मुस्लिम और दलित समुदायों की प्रभावशाली उपस्थिति है, साथ ही भूमिहार, ठाकुर और ब्राह्मण जैसी अन्य जातियों का भी उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व है।
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 348
जनपद: आज़मगढ़
लोकसभा क्षेत्र: लालगंज (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित)
मतदाता संख्या (2017): 3,03,975
मुख्य समुदाय: यादव (अन्य पिछड़ा वर्ग), मुस्लिम, दलित, भूमिहार, ठाकुर, ब्राह्मण
2022 विधानसभा चुनाव:
विजेता: आलम बदी (समाजवादी पार्टी)
जीत का अंतर: भाजपा के मनोज को 33,578 वोटों से हराया
जातीय संरचना (आज़मगढ़ लोकसभा क्षेत्र के संदर्भ में, जो निज़ामाबाद पर भी लागू होती है):
अनुसूचित जाति (SC) मतदाता: लगभग 25.2% (लगभग 4,49,977)
अनुसूचित जनजाति (ST) मतदाता: लगभग 0.3% (लगभग 5,357)
यादव (ओबीसी): लगभग 21%
मुस्लिम: लगभग 17%
दलित: लगभग 19%
अन्य: भूमिहार, ठाकुर, ब्राह्मण, कायस्थ
2022 के विधानसभा चुनाव में आलम बदी की जीत ने समाजवादी पार्टी की निज़ामाबाद में मज़बूत पकड़ को एक बार फिर साबित किया। भाजपा के प्रत्याशी मनोज को बड़े अंतर से हराकर आलम बदी ने यह दिखाया कि वे हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में समान रूप से लोकप्रिय हैं, खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश की राजनीति ध्रुवीकरण की ओर झुकी हुई है। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पूरे उत्तर प्रदेश में 37 सीटें जीतकर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जिसका श्रेय प्रभावी टिकट वितरण और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), दलित और मुस्लिम मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाने की रणनीति को जाता है। मतदाता भागीदारी की बात करें तो 2017 में 55.1% मतदान हुआ था, और पूर्ववर्ती चुनावों में भी मतदान प्रतिशत मध्यम स्तर पर ही रहा है, जो यह दर्शाता है कि जनभागीदारी तो है लेकिन इसे और बेहतर किया जा सकता है। भाजपा के लिए निज़ामाबाद में चुनौती यह रही कि प्रदेश स्तर पर मज़बूती के बावजूद वह इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की स्थानीय नेतृत्व क्षमता और जातीय गठजोड़ का मुक़ाबला नहीं कर पाई। विशेष रूप से राजपूत समुदाय में नाराज़गी और सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति ने भाजपा की बढ़त को सीमित कर दिया।
2022 के चुनाव में आलम बदी की जीत ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी की निज़ामाबाद में मज़बूत पकड़ को साबित कर दिया। भाजपा के उम्मीदवार मनोज पर बड़ी बढ़त ने यह दिखाया कि आलम बदी ने हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में अपनी स्वीकार्यता बनाई है, जो वर्तमान ध्रुवीकृत राजनीतिक माहौल में एक विशेष स्थान रखता है। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने पूरे उत्तर प्रदेश में भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और 37 सीटें जीतीं, जिसका श्रेय प्रभावशाली टिकट वितरण और ओबीसी, दलित तथा मुस्लिम मतदाताओं के बीच बेहतर संपर्क रणनीति को जाता है। मतदान प्रतिशत पर नज़र डालें तो 2017 में लगभग 55.1% वोटिंग हुई थी, और पहले के चुनावों में भी इसी तरह का रुझान रहा है, जो दर्शाता है कि मतदाता सक्रिय हैं, लेकिन भागीदारी बढ़ाने की संभावनाएं अब भी मौजूद हैं। वहीं भाजपा के लिए निज़ामाबाद में चुनौती यह रही कि प्रदेश भर में उसकी लोकप्रियता के बावजूद, वह समाजवादी पार्टी के मज़बूत स्थानीय नेतृत्व और जातिगत समीकरणों का सामना नहीं कर सकी। खासकर राजपूत समुदाय में असंतोष और सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति ने भाजपा की संभावनाओं को सीमित कर दिया।
आलम बदी, जिन्हें अलमबदी आज़मी के नाम से भी जाना जाता है, समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ और लोकप्रिय नेता हैं। वे उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के निज़ामाबाद विधानसभा क्षेत्र (संख्या 348) से अब तक पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। उनका जन्म 16 मार्च 1936 को विंदावल गांव में बदीउज्ज़मा के घर हुआ था। उन्होंने 1953 में गोरखपुर के इस्लामिया कॉलेज से इंटरमीडिएट और 1956 में गवर्नमेंट टेक्निकल इंस्टीट्यूट, गोरखपुर से इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। वे 1996 से लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, केवल 2007 में उन्हें बसपा के अंगद यादव से पराजय का सामना करना पड़ा। 2022 में उन्होंने भाजपा के मनोज यादव को 34,187 वोटों से हराया। आलम बदी अपनी सादगी, ईमानदारी और जनता के बीच निरंतर सक्रियता के लिए पहचाने जाते हैं। वे चुनाव प्रचार में अधिक खर्च से बचते हैं और अपने विधायक निधि का सदुपयोग जनसेवा में करते हैं। उन्होंने कई बार मंत्री पद की पेशकश ठुकराई और अपने क्षेत्र में शहीदों की स्मृति में चार प्रेरणादायक द्वार बनवाए हैं। उनके खिलाफ किसी भी प्रकार के आपराधिक मामले दर्ज नहीं हैं, जैसा कि 2007 और 2022 के चुनावों में दाखिल उनके शपथपत्रों में उल्लेख है, जो मायनेता.इन्फो और एडीआर जैसे विश्वसनीय स्रोतों से प्रमाणित हैं।

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