ओबरा विधानसभा सीट - Sonbhadra

ओबरा

वर्तमान विधायक
संजीव कुमार गोंड
जिला
Sonbhadra
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
रॉबर्ट्सगंज
ओबरा विधानसभा सीट
ओबरा विधानसभा पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की कोयला, बिजली उत्पादन और खान-खनन पर आधारित बेहद अहम औद्योगिक आदिवासी सीट है। बिजली उत्पादन केंद्र, एनटीपीसी-ओबरा, कोयला खदानों, जंगल, पहाड़ और आदिवासी वनवासियों की बड़ी आबादी के कारण यह क्षेत्र विकास बनाम विस्थापन और पर्यावरण बनाम उद्योग जैसे सवालों के लिए खास पहचान रखता है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: सोनभद्र
विधानसभा क्रमांक: 402
लोकसभा क्षेत्र: रॉबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र;
आरक्षण: अनुसूचित जाति (एससी आरक्षित)
अनुमानित आबादी: 3,11,333
साक्षरता दर: 60-65 %
लिंग अनुपात: लगभग 900-920 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 85-88%
मुस्लिम: 11-12%
अन्य समुदाय: 1-2%
अनुसूचित जाति: 15-20%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
ओबरा विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है और यहां अलग-अलग समय पर बसपा, भाजपा और सपा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। यह सीट सोनभद्र जिला में आती है और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित है। 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में यहां अलग-अलग दलों का प्रभाव रहा, लेकिन हाल के चुनावों में भाजपा का असर बढ़ा है। 2012 में बसपा के सुनील कुमार ने चुनाव जीतकर सीट अपने नाम की थी। इसके बाद 2017 में भाजपा के संजीव कुमार गोंड ने सपा के रवि गोंड को करीब 44 हजार वोटों से हराकर सीट भाजपा के खाते में कर दी। 2022 में भी उन्होंने दोबारा जीत हासिल की और सपा के अरविंद कुमार को लगभग 26,442 वोटों से हराया। कुल मिलाकर देखा जाए तो 2012 तक यहां बसपा का असर ज्यादा था, लेकिन 2017 के बाद से भाजपा लगातार मजबूत हुई है और आदिवासी वोट बैंक, स्थानीय विकास तथा बिजली-खनन क्षेत्र की राजनीति के कारण यह सीट भाजपा के लिए काफी अहम बन गई है।
2022 चुनावी परिणाम (ओबरा विधानसभा)
कुल मतदाता: 1,60,062
कुल मतदान प्रतिशत: 52.4%
विजेता: संजीव कुमार (भाजपा)
वोट शेयर: 49.0%
उपविजेता: अरविंद कुमार (सपा)
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
संजीव कुमार गोंड ओबरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं और आदिवासी (गोंड) समुदाय से आने वाले स्थानीय नेता माने जाते हैं। वे लंबे समय से क्षेत्र की राजनीति और संगठन से जुड़े रहे हैं और खनन, बिजली परियोजनाओं, सड़क और रोजगार जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर जीत हासिल कर ओबरा सीट पर पार्टी की पकड़ मजबूत की। चुनावी हलफनामे और निर्वाचन आयोग या विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनके खिलाफ किसी बड़े या संगीन आपराधिक मामला नहीं मिलता।
ओबरा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
ओबरा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी चर्चा ज़्यादातर खनन, बिजली परियोजनाओं और स्थानीय विकास के मुद्दों के आसपास घूमती है। यहां कोयला और पत्थर खनन के कारण विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास और प्रदूषण जैसे सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं। एनटीपीसी और अन्य बिजली परियोजनाएँ इलाके में मौजूद हैं, इसलिए स्थानीय लोग अक्सर यह मांग करते हैं कि यहां के युवाओं को ज्यादा रोजगार और ठेके मिलें। कई गांवों में सड़कें भारी वाहनों के कारण खराब हो जाती हैं और पेयजल, नाली, सीवर और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी लोगों की शिकायत रहती है। आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों की कमी, डॉक्टर दवा की दिक्कत और खनन से जुड़ी बीमारियों का इलाज भी बड़ा मुद्दा है। इसके साथ ही वनाधिकार, जमीन के पट्टे, जंगल की उपज पर अधिकार और कानून व्यवस्था से जुड़े विवाद भी समय-समय पर राजनीति में चर्चा का विषय बनते रहते हैं।

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