उरई विधानसà¤à¤¾ सीट - Jalaun
उरई |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री गौरी शंकर वर्मा (कोरी) |
| जिला | Jalaun |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | जालौन |
उरई विधानसभा सीट
उरई विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में स्थित है और जालौन लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसका विधानसभा क्रमांक 221 है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और ओरई शहर के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: जालौन
विधानसभा क्रमांक: 221
लोकसभा क्षेत्र: जालौन
आरक्षण: अनुसूचित जाति
अनुमानित आबादी:3-3.5 लाख
साक्षरता दर: लगभग 75%
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 85-90%
मुस्लिम: 10-15%
अन्य समुदाय: 1-2% से कम
अनुसूचित जाति: लगभग 25-30%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,69,425
विजेता: गौरी शंकर वर्मा (भाजपा)
वोट शेयर: 47.8%
उपविजेता: दयाशंकर वर्मा (सपा)
मतदान प्रतिशत: 60.7%
ओरई विधानसभा सीट की स्थापना 1952 में हुई थी और पहले इसे उरई-जालौन कहा जाता था। 2012 में हुए परिसीमन के बाद यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित कर दी गई। इस सीट पर शुरू से ही कांग्रेस, भाजपा, बसपा और सपा जैसे प्रमुख दलों का असर रहा है। कांग्रेस के पंडित चतुर्भुज शर्मा चार बार विधायक रह चुके हैं। 2012 में जब सीट आरक्षित हुई, तब सपा के दयाशंकर वर्मा ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 2017 और 2022 में भाजपा के गौरी शंकर वर्मा ने लगातार दो बार जीत दर्ज की। खास बात यह भी है कि अब तक किसी महिला को इस सीट से बड़े दलों ने उम्मीदवार नहीं बनाया है। पिछले दोनों चुनावों में भाजपा और सपा के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली, जबकि बसपा और कांग्रेस की भूमिका सीमित रही। 2017 में गौरी शंकर वर्मा ने करीब 79 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि 2022 में उन्होंने 47.45% वोट पाकर सपा के दयाशंकर वर्मा को हराया। उस चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत भी 47.45% ही रहा।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
गौरी शंकर वर्मा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हैं और ओरई विधानसभा क्षेत्र से 2017 और 2022 में लगातार दो बार विधायक चुने गए हैं। वे कोली जाति से आते हैं। राजनीति के साथ-साथ वे समाजसेवा में भी सक्रिय रहते हैं, खासकर मोक्षधाम में लावारिस अस्थियों का विधिवत विसर्जन जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी के लिए लोग उन्हें जानते हैं। 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले या गंभीर आरोप दर्ज हैं।
ओरई विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में ओरई विधानसभा क्षेत्र में कई सामाजिक और विकास से जुड़े अहम मुद्दे सामने आए हैं। बेरोजगारी और पलायन सबसे बड़े मुद्दों में से रहे हैं, जहाँ युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण उन्हें बाहर के शहरों में जाना पड़ रहा है। खेती-किसानी भी परेशानियों में रही है, क्योंकि सिंचाई की सुविधा की कमी, बारिश पर निर्भरता और पानी की दिक्कतों ने किसानों को मुश्किल में डाला है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी चिंताजनक रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और अस्पतालों में डॉक्टरों और ज़रूरी सुविधाओं का अभाव महसूस किया गया। बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, बिजली और साफ़ पानी की उपलब्धता को लेकर भी लोगों ने कई बार नाराजगी जताई है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान ने भी किसानों की मुसीबतें बढ़ाई हैं। इसके अलावा महंगाई, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी भी लोगों की प्रमुख शिकायतों में शामिल रहे हैं। वहीं, लोगों को अपने जनप्रतिनिधियों से ज़्यादा जवाबदेही की उम्मीद है, क्योंकि कई बार उनकी सक्रियता और उपलब्धता पर सवाल उठे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना या किसान सम्मान निधि सभी जरूरतमंदों तक सही तरीके से पहुँचे। यह भी लगातार चर्चा का विषय रहा है।