फरेन्दा विधानसभा सीट - Maharajganj

फरेन्दा

वर्तमान विधायक
श्री वीरेन्द्र चौधरी
जिला
Maharajganj
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
महाराजगंज
फरेन्दा विधानसभा सीट
फरेन्दा विधानसभा उत्तर प्रदेश के तराई सीमांत जिले महराजगंज की एक महत्वपूर्ण सीमा, कृषि बाज़ार केंद्रित सीट है, जो नेपाल बॉर्डर के नजदीक होने, तराई के जंगलों और धान, गन्ना, सब्जी आधारित खेती के लिए जानी जाती है। यह सीट लंबे समय तक भाजपा के बजरंग बहादुर सिंह के प्रभाव के कारण भगवा गढ़ मानी जाती रही, लेकिन 2022 में पहली बार कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी ने इसे जीतकर समीकरण बदल दिए।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: महराजगंज
विधानसभा क्रमांक: 315
लोकसभा क्षेत्र: महाराजगंज
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित)
अनुमानित आबादी: लगभग 2.8-3.2 लाख
साक्षरता दर: 60-65%
लिंग अनुपात: करीब 900-920 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 82.5%
मुस्लिम: 17.0%
अन्य समुदाय: 0-1%
अनुसूचित जाति: 18.4%
2022 चुनावी परिणाम (फरेन्दा विधानसभा)
कुल मतदाता: 3,52,072
मतदान प्रतिशत: 60.1%
विजेता: वीरेंद्र चौधरी (कांग्रेस)
वोट शेयर: 40.28 प्रतिशत।
उपविजेता: बजरंग बहादुर सिंह (भाजपा)
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
फरेन्दा विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में अलग–अलग दलों का प्रभाव रहा है। 1977 में श्याम नारायण तिवारी भाकपा से जीते, 1980 में निर्दलीय, 1985 में हर्षवर्धन सिंह (जेएनपी), फिर 1989 और 1991 में श्याम नारायण कांग्रेस से विधायक बने। 1993 में भाजपा के शिवेंद्र, 1996 में माकपा के विनोद मनी और 2002 में फिर कांग्रेस के श्याम नारायण जीते। 2007 से सीट पर भाजपा का दौर शुरू हुआ, जब बजरंग बहादुर सिंह जीते और वीरेंद्र चौधरी बसपा से दूसरे नंबर पर रहे। 2012 और 2017 में भी बजरंग बहादुर सिंह ने जीत दोहराई, जबकि वीरेंद्र चौधरी कड़े मुकाबले में पीछे रहे। लेकिन 2022 में आखिरकार वीरेंद्र चौधरी ने कांग्रेस से चुनाव जीतकर तीन बार के भाजपा विधायक को हरा दिया और करीब 15 साल बाद सीट का समीकरण बदल दिया। कुल मिलाकर 2007 से 2017 तक यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ रही, जिसे 2022 में कांग्रेस ने तोड़ दिया।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
वीरेंद्र चौधरी फरेन्दा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं और पूर्वांचल के किसान समाज से आने वाले पुराने कांग्रेसी नेता माने जाते हैं। वे कई बार इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं 2002 और 2007 में बसपा से, फिर 2012 और 2017 में कांग्रेस से, लेकिन उन चुनावों में वे दूसरे नंबर पर रहे। आखिरकार 2022 में उन्होंने भाजपा के तीन बार के विधायक को बहुत कम अंतर से हराकर सीट जीत ली और कांग्रेस के लिए यह सीट वापस हासिल की। वे 315, फरेंदा (महराजगंज) के विधायक के रूप में जाने जाते हैं और प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में भी सक्रिय हैं। उपलब्ध चुनावी हलफनामे या निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से दो आपराधिक मामलों का जानकारी मिलती है।
फरेन्दा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
फरेन्दा विधानसभा क्षेत्र में राजनीति ज्यादातर सीमा और खेती से जुड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है। नेपाल बॉर्डर के पास होने की वजह से तस्करी, शराब-लकड़ी की अवैध आवाजाही और सुरक्षा के सवाल अक्सर उठते रहते हैं। तराई क्षेत्र होने के कारण धान, गन्ना और सब्जी किसानों के लिए सिंचाई, नहरों की सफाई, खाद, बीज, एमएसपी और फसल नुकसान का मुआवजा बड़े मुद्दे हैं, साथ ही बरसात में जलभराव और बाढ़ भी चिंता का कारण बनती है। गांवों में टूटी सड़कों, पुल, पुलिया की कमी, अस्पतालों में डॉक्टर दवा की दिक्कत और कॉलेजों की दूरी पर भी जनता चुनाव के समय आवाज उठाती है। रोजगार के मौके कम होने से युवा गोरखपुर, लखनऊ, दिल्ली-एनसीआर या दूसरे राज्यों में काम की तलाश में चले जाते हैं। वहीं 2015 में भाजपा विधायक बजरंग बहादुर सिंह की सदस्यता रद्द होने का मामला सामने आने के बाद ठेकेदारी और भ्रष्टाचार भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना, और 2015 के उपचुनाव से लेकर 2017 व 2022 तक यहां लगातार कड़े मुकाबले होते रहे।

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