फेफना विधानसà¤à¤¾ सीट - Ballia
फेफना |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री संग्राम सिंह |
| जिला | Ballia |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बलिया |
फेफना विधानसभा क्षेत्र (बलिया)
फेफना (जिसे फेफना भी लिखा जाता है) उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीट संख्या 360 है, जो बलिया जिले के फेफना नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती है। यह बलिया लोकसभा क्षेत्र के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है और सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी में आती है। 2012 में सीट के गठन के बाद से यहाँ मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है।
कुल मतदाता (2022): 3,31,153
पुरुष: 1,79,806
महिला: 1,51,345
लिंग अनुपात: 985/1000
साक्षरता दर: 69.60%
राजनीतिक इतिहास और चुनावी रुझान
2022 का परिणाम
विजेता: संग्राम सिंह (सपा)
वोट शेयर: 48.78%
उपविजेता: उपेंद्र तिवारी (भाजपा)
फेफना विधानसभा सीट बलिया जिले में 2012 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और उसी वर्ष पहला चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा के उपेंद्र तिवारी ने समाजवादी पार्टी के अंबिका चौधरी को हराकर जीत दर्ज की। यह भाजपा की इस सीट पर पहली जीत थी, जबकि बलिया परंपरागत रूप से सपा और बसपा का गढ़ माना जाता रहा है। 2017 में उपेंद्र तिवारी ने फिर जीत हासिल की और इस बार उनका वोट शेयर और जीत का अंतर दोनों बढ़ा। 2022 में समाजवादी पार्टी के संग्राम सिंह ने भाजपा से यह सीट छीन ली, उपेंद्र तिवारी को हराकर निर्णायक जीत दर्ज की। कांग्रेस और बसपा का प्रभाव लगातार कम हो रहा है और अब मुकाबला मुख्यतः सपा और भाजपा के बीच सिमट गया है। जातीय समीकरण की दृष्टि से, फेफना में ओबीसी (विशेषकर यादव), दलित, ब्राह्मण, ठाकुर और मुस्लिम समुदाय का प्रभाव है। 2022 में सपा को यादव, मुस्लिम और कुछ दलित समुदायों का समर्थन मिला, जबकि भाजपा को सवर्णों और कुछ अन्य ओबीसी वर्गों का साथ प्राप्त हुआ।
विधायक परिचय एवं आपराधिक रिकॉर्ड
संग्राम सिंह यादव, एक किसान पृष्ठभूमि से आने वाले समाजवादी नेता हैं। उन्होंने 1982 में दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीएससी और 1989 में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री प्राप्त की। 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर पहली बार फेफना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और भाजपा के उपेंद्र तिवारी को 19,354 वोटों से हराकर विधायक बने। वर्तमान में वे 18वीं उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य हैं। उनकी सार्वजनिक छवि एक जमीनी, किसान हितैषी और साफ-सुथरे नेता की है, जो क्षेत्रीय मुद्दों और किसान अधिकारों को लेकर मुखर रहते हैं। वे जातिगत जनगणना और स्थानीय समस्याओं पर विधानसभा में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। 2022 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार, उनके खिलाफ दो आपराधिक मामला दर्ज है।
फेफना विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
फेफना विधानसभा क्षेत्र, जो एक प्रमुख कृषि क्षेत्र है, यहाँ की अधिकांश आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन किसान कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्हें फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता, समर्थन मूल्य पर खरीदी में देरी होती है और बिचौलियों का दखल बना रहता है। सिंचाई के लिए पानी की कमी, नहरों की सफाई की अनदेखी और बारिश पर निर्भरता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। बढ़ती कृषि लागत भी एक बड़ी चुनौती है। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे की हालत खराब है. गाँवों में टूटी-फूटी सड़कें, जलभराव, खराब स्वास्थ्य सेवाएँ और जर्जर स्कूल आम हैं। बेरोजगारी और पलायन की समस्या भी गंभीर है; स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं, जिससे युवा बेहतर भविष्य की तलाश में बाहर जा रहे हैं। जातीय ध्रुवीकरण भी चुनावी रुझानों को प्रभावित करता है, जिसमें यादव, दलित, ब्राह्मण, क्षत्रिय और मुस्लिम समुदायों की राजनीतिक सक्रियता अहम भूमिका निभाती है। सामाजिक न्याय की दृष्टि से भी सरकारी योजनाओं का लाभ सभी वर्गों तक नहीं पहुँच पा रहा है और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं। भूमि विवाद, अतिक्रमण और कानून-व्यवस्था की समस्याएँ जैसे चोरी, महिलाओं के खिलाफ अपराध और पुलिस की निष्क्रियता भी क्षेत्र की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं।