पीलीभीत विधानसà¤à¤¾ सीट - Pilibhit
पीलीभीत |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री संजय सिंह गंगवार |
| जिला | Pilibhit |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | पीलीभीत |
पीलीभीत विधानसभा सीट
पीलीभीत विधानसभा उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की एक प्रमुख विधानसभा सीट है। यह विधानसभा क्रमांक 127 है और पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सीट पर कोई आरक्षण लागू नहीं है। पीलीभीत क्षेत्र ऐतिहासिक, सामाजिक और कृषि परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है और निर्वाचन क्षेत्र में शहरी-ग्रामीण दोनों तरह की आबादी निवास करती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: पीलीभीत
विधानसभा क्रमांक: 127
लोकसभा क्षेत्र: पीलीभीत
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित)
अनुमानित आबादी: लगभग 20,31,007 (जिला)
साक्षरता दर: 61.47%
लिंग अनुपात: 895/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 60% (जिला)
मुस्लिम: लगभग 38%
अन्य समुदाय: 2%
अनुसूचित जाति: लगभग 18% (जिला)
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,59,821
विजेता: संजय सिंह गंगवार (भाजपा)
वोट शेयर: 48.3%
उपविजेता: डॉ. शैलेंद्र सिंह गंगवार (सपा)
मतदान प्रतिशत: 68.4%
पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलता रहा है। सपा के रियाज अहमद यहां कई बार विधायक रह चुके हैं और कभी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी, लेकिन 2017 और 2022 में भाजपा के संजय सिंह गंगवार ने लगातार जीत दर्ज कर इस समीकरण को बदल दिया। 2022 के चुनाव में संजय सिंह गंगवार ने रियाज अहमद को करीब 43,356 वोटों से हराकर भाजपा की स्थिति और मजबूत कर दी। यहां का चुनावी मुकाबला अक्सर जातिगत समीकरण और पार्टी प्रभाव पर निर्भर रहा है, जिसमें मुस्लिम, दलित और अन्य समुदायों की भूमिका निर्णायक रही है। भाजपा ने हाल के वर्षों में लगातार बढ़त बनाए रखी है, जबकि सपा की मौजूदगी अब भी इस क्षेत्र में महसूस की जाती है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
संजय सिंह गंगवार भाजपा के विधायक हैं और उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। पीलीभीत में जन्मे गंगवार 2017 से इस पद पर हैं और योगी आदित्यनाथ की दूसरी सरकार में राज्य मंत्री के रूप में भी कार्यरत हैं। स्नातक शिक्षा प्राप्त गंगवार अपने क्षेत्र में विकास कार्यों में सक्रिय रहते हैं। उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि में 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन का एक मामला शामिल है, जिसमें दिसंबर 2022 में उन्हें तीन महीने की जेल और हर मामले में 2000 रुपये जुर्माने की सजा हुई थी। 2022 चुनावी शपथ पत्र के अनुसार, उनके खिलाफ 4 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पीलीभीत विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में सड़क की खराब हालत, पेयजल की कमी, अनियमित बिजली आपूर्ति, रोजगार के सीमित अवसर और दलित, किसान व अन्य सामाजिक वर्गों की समस्याएं प्रमुख मुद्दे रहे हैं। ग्रामीण सड़कों की जर्जर स्थिति ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया, वहीं कई इलाकों में पेयजल व्यवस्था असंतोषजनक रही। बिजली की सप्लाई भी अक्सर आठ घंटे से कम रही, जिससे लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ीं। रोजगार के अभाव ने युवाओं में चिंता बढ़ाई और इन सभी मुद्दों पर चुनावी समय में जनता ने पार्टियों से जवाबदेही मांगी। किसान, लोधी, मुस्लिम, दलित जैसे समुदाय यहां के राजनीतिक समीकरणों में अहम भूमिका निभाते हैं। पीलीभीत जिले की चारों विधानसभा सीटों बरखेड़ा, पूरनपुर, बीसलपुर और पीलीभीत सदर में ये चुनौतियां 2022 के चुनाव से अब तक चर्चा में रही हैं, जहां भाजपा और सपा के बीच कड़ी टक्कर देखी गई और कुछ मतदाताओं में विकास व सुविधाओं की कमी को लेकर समर्थन में बदलाव भी दिखा।