पिन्ड्रा विधानसभा सीट - Varanasi

पिन्ड्रा

वर्तमान विधायक
डा0 अवधेश सिंह
जिला
Varanasi
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
मछलीशहर
पिंडरा विधानसभा सीट
पिंडरा विधानसभा क्षेत्र वाराणसी जिले में स्थित है, जिसे 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व मिला। यह क्षेत्र किसान बहुल, सामाजिक रूप से विविध और ऐतिहासिक रूप से वामपंथी और कांग्रेस प्रभाव वाला रहा है। पिंडरा सीट की खासियत यहां सीपीआई के उदल द्वारा नौ बार विधायक बने रहना, कांग्रेस के अजय राय का लंबे समय तक प्रभाव और बाबतपुर एयरपोर्ट एवं करखियाव एग्रो पार्क जैसी प्रमुख स्थलों से जुड़ी है। यहां जातीय संतुलन में पटेल, ब्राह्मण, दलित और अन्य समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011):
जिला: वाराणसी
विधानसभा क्रमांक: 384
लोकसभा क्षेत्र: मछलीशहर
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: करीब 3,40,000
साक्षरता दर: लगभग 72 %
लिंग अनुपात: लगभग 910/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 85%
मुस्लिम: लगभग 8%
अन्य समुदाय: 7%
अनुसूचित जाति: करीब 19%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,17,971
विजेता: डॉ. अवधेश सिंह (भाजपा)
वोट शेयर: 38.7%
उपविजेता: बाबूलाल (बसपा)
मतदान प्रतिशत: 59.0%
पिंडरा विधानसभा क्षेत्र का नाम तीन बार बदला गया है। पहले इसे 'वाराणसी पश्चिम' कहा जाता था, फिर 2007 तक 'कोलअसला' और 2012 में परिसीमन के बाद इसका नाम पिंडरा रखा गया। यह क्षेत्र वाराणसी जिले के मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र में आता है और मुख्य रूप से किसानों का क्षेत्र है। राजनीतिक तौर पर पिंडरा वामपंथियों की गढ़ माना जाता रहा है। 1957 से 1993 तक सीपीआई के कामरेड ऊदल ने लगातार नौ बार विधायक बनकर अपनी पकड़ मजबूत की। इसके बाद 1996 से 2012 तक अजय राय ने भाजपा और फिर कांग्रेस से चुनाव जीतते हुए इस सीट पर प्रभुत्व जमाया। 2017 में भाजपा के डॉ. अवधेश सिंह ने इस सीट पर कब्जा किया और फिर 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के बाबूलाल को करीब 35,559 वोटों के अंतर से हराया। पिंडरा में कुर्मी जाति के मतदाता सबसे अधिक हैं और पार्टी से ज्यादा नेता और चेहरे का प्रभाव देखने को मिलता है। कुल मिलाकर यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय रहा है, जहां वामपंथ, कांग्रेस और भाजपा के बीच लगातार सत्ता की लड़ाई चलती रही है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
डॉ. अवधेश सिंह वाराणसी जिले की पिंडरा विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक हैं। उनका जन्म 1 फरवरी 1955 को वाराणसी में हुआ था। राजनीति की शुरुआत उन्होंने कांग्रेस से की थी, इसके बाद बसपा में भी चुनाव लड़े, लेकिन सफलता नहीं मिली। अंततः उन्होंने भाजपा का दामन थामा और 2017 में पिंडरा सीट से जीत हासिल की। वे काशी विद्यापीठ में पूर्व प्राध्यापक रह चुके हैं और पीएचडी की मानद डिग्री भी प्राप्त कर चुके हैं। पेशे से वे किसान और अध्यापक हैं। डॉ. अवधेश सिंह मानते हैं कि अब राजनीति में बाहुबलियों का दौर खत्म हो चुका है, और आने वाला समय पढ़े-लिखे और जनता के बीच रहने वाले नेताओं का है। उनकी चुनावी हलफनामा और जानकारी में किसी गंभीर आपराधिक मामले का जिक्र नहीं है। उन्हें एक शिक्षाविद, समाजसेवी और अनुभवी राजनीतिक हस्ती के रूप में जाना जाता है।
पिंडरा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिंडरा विधानसभा क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में कई विकास संबंधी चुनौतियां सामने आई हैं। सबसे बड़ी समस्या सिंचाई और पानी की है, जहां नहरों का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है और किसान भूगर्भ जल पर निर्भर हो गए हैं, जिससे फसलें सही तरीके से सिंचित नहीं हो पातीं। साथ ही, जल निकासी की दिक्कत और दूषित पानी की आपूर्ति भी आम परेशानी बन चुकी है। क्षेत्र की सड़कों की हालत बेहद खराब है, कई जगह गड्ढे और जर्जर सड़कें हैं, जबकि मुख्य मार्गों पर विकास कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल पाए। बिजली आपूर्ति में भी भारी कमी है, क्योंकि सब स्टेशन नहीं बन पाया और सड़क पर प्रकाश व्यवस्था भी बहुत खराब है, जिससे रात में अंधकार रहता है। रोजगार के अवसर भी सीमित हो गए हैं, कुछ पुराने उद्योग बंद हो गए और हाल ही में अमूल प्लांट जैसे नए उद्योग तो स्थापित हो रहे हैं, लेकिन अभी रोजगार सृजन सीमित है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी स्थिति निराशाजनक है. कई सरकारी स्कूल बंद हो गए हैं, स्वास्थ्य केंद्र अधूरे हैं, और कोरोना टीकाकरण में भी बड़ी समस्याएं सामने आईं। सबसे बड़ा विवाद भूमि अधिग्रहण को लेकर है, जहां टाउनशिप योजना के तहत किसानों की जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया रुक गई, जिससे वे आर्थिक संकट में हैं। स्थानीय जनता ने लगातार इन मूलभूत समस्याओं को लेकर सरकार से ध्यान देने की मांग की, लेकिन विकास कार्य अभी भी अधूरे ही हैं और लोगों की अपेक्षाएं पूरी नहीं हो पाईं हैं।

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