पुवायाँ विधानसभा सीट - Shahjahanpur

पुवायाँ

वर्तमान विधायक
श्री चेतराम
जिला
Shahjahanpur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
शाहजहांपुर
पुवायां विधानसभा सीट
पुवायां उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले की एक महत्वपूर्ण अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित विधानसभा सीट है। इसका विधानसभा क्रमांक 134 है और यह शाहजहांपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। पुवायां क्षेत्र कृषि प्रधान है, यहाँ गन्ना, धान, गेहूं, दलहन आदि की खेती के साथ-साथ कृषि यंत्रों के निर्माण और छोटे उद्योगों का भी महत्त्व है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: शाहजहांपुर
विधानसभा क्रमांक: 134
लोकसभा क्षेत्र: शाहजहांपुर
आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC)
अनुमानित आबादी: 6,74,066
साक्षरता दर: 63.62%
लिंग अनुपात: 888/1000 पुरुष
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 86%
मुस्लिम: लगभग 13%
अन्य समुदाय: लगभग 1% (सिख, ईसाई, जैन आदि)
अनुसूचित जाति: लगभग 23%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,31,958
विजेता: चेतराम पासी (भाजपा)
वोट: 56.0%
उपविजेता: उपेंद्र पाल सिंह (सपा)
मतदान प्रतिशत: 60.3%
पुवायां विधानसभा सीट, जो शाहजहांपुर जिले का हिस्सा है, पर 1957 में पहला चुनाव हुआ था। शुरुआती दौर में यह कांग्रेस का गढ़ रही और लंबे समय तक कांग्रेस के नेता यहाँ से जीतते रहे, खासकर 1980 और 90 के दशक में चेतराम कांग्रेस के प्रमुख विधायक रहे। 1991 में पहली बार भाजपा ने यहाँ जीत दर्ज की, लेकिन इसके बाद यह सीट जनता दल, बसपा, सपा और भाजपा के बीच बदलती रही। 2000 के दशक में सपा और बसपा का दबदबा रहा, मगर 2017 में भाजपा के चेतराम पासी ने जीत हासिल कर सीट पर कब्जा जमाया। पुवायां को ‘मिनी पंजाब’ कहा जाता है क्योंकि यहाँ पंजाब से आए किसानों का गहरा असर है, और जातीय समीकरण राजनीति को और पेचीदा बना देते हैं। 2022 के चुनाव में कुल 3,85,622 मतदाताओं में से लगभग 70% ने मतदान किया, जिसमें भाजपा के चेतराम पासी ने 1,29,785 वोट (55.62%) पाकर सपा के उपेंद्र पाल सिंह को 51,578 वोटों से हराया। यह नतीजा साफ दिखाता है कि पुवायां में भाजपा का दबदबा लगातार मजबूत हो रहा है और इसने स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दिया है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
चेतराम पासी, उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले की पुवायां विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। पासी अब तक छह बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू किया और चार बार वहीं से जीत दर्ज की। 2017 में वे भाजपा में शामिल हुए और पुवायां से चुनाव जीतकर पार्टी के मजबूत चेहरों में शामिल हो गए। क्षेत्र में वे अपनी सादगी, साफ-सुथरी छवि और संगठित चुनावी रणनीति के लिए पहचाने जाते हैं। 2022 चुनावी हलफनामें के अनुसार उनके खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं था।
पुवायां विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच सालों में पुवायां विधानसभा क्षेत्र में बेरोजगारी सबसे बड़ी चिंता बनी रही है, क्योंकि यहाँ बड़े उद्योग न होने के कारण युवाओं को रोजगार की तलाश में गुजरात, पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का रुख करना पड़ता है। क्षेत्र की सड़क और पुलों की स्थिति भी गंभीर समस्या रही। शाहजहांपुर-पलिया हाईवे पर भैंसी नदी का जर्जर पुल और सिंधौली में खन्नौत नदी का संकरा पुल आवागमन में बड़ी बाधा बने रहे। खुटार और बंडा ब्लॉक के 94 गांवों का पीलीभीत जिले में शामिल होना और उन्हें वापस लाने की मांग भी लगातार उठती रही है। कृषि और उद्योग की दृष्टि से यहाँ कुछ चीनी मिलें और राइस मिल तो मौजूद हैं, लेकिन बड़े कारखानों की कमी से आर्थिक विकास ठप रहा। पुवायां अपनी सामाजिक और धार्मिक विरासत के लिए ‘मिनी पंजाब’ के नाम से जाना जाता है, इसलिए ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास की मांग भी अहम रही। साथ ही, ब्राह्मण, पासी, सिख, कुर्मी, ठाकुर, यादव और जाटव सहित कई जातीय समूह यहाँ की राजनीति और सामाजिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित करते आए हैं। इन सभी मुद्दों ने मिलकर पुवायां की राजनीति और जनजीवन पर गहरा असर डाला है।

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