प्रतापगढ़ विधानसà¤à¤¾ सीट - Pratapgarh
प्रतापगढ़ |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री राजेन्द्र कुमार मौर्य |
| जिला | Pratapgarh |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | प्रतापगढ़ |
प्रतापगढ़ विधानसभा सीट
प्रतापगढ़ विधानसभा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की प्रमुख और केंद्रित सीट है। यह विधानसभा क्रमांक 248 है और प्रतापगढ़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक, सामाजिक और शिक्षा केंद्र के रूप में जाना जाता है। सीट पर कोई आरक्षण नहीं है और यहां शहरी व ग्रामीण दोनों आबादी निवास करती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: प्रतापगढ़
विधानसभा क्रमांक: 248
लोकसभा क्षेत्र: प्रतापगढ़
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित)
अनुमानित आबादी: लगभग 3-3.5 लाख
साक्षरता दर: 71.82% (जिला)
लिंग अनुपात: 998/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (जिला)
हिंदू: लगभग 85%
मुस्लिम: लगभग 14%
अन्य समुदाय: करीब 1%
अनुसूचित जाति: अनुमानित 20%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,94,645
विजेता: राजेंद्र कुमार मौर्य (भाजपा)
वोट शेयर: 46.1%
उपविजेता: कृष्णा पटेल (अपना दल (कृष्णा))
मतदान प्रतिशत: 54.8%
प्रतापगढ़ विधानसभा, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की एक अहम सीट, ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से खास पहचान रखती है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर स्थानीय राजवंशों जैसे विश्वसेन राजपूत, सोमवंशी राजपूत और राजा दिनेश सिंह तथा प्रभावशाली नेताओं जैसे राजा भैया और प्रमोद तिवारी तक, इस क्षेत्र की राजनीति में परंपरा और प्रभाव का गहरा मेल दिखाई देता है। यहां कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा, भाजपा और अपना दल (सोनेलाल/कृष्णा) जैसे दल सक्रिय रहे हैं, जहां जातीय-सामाजिक समीकरण, स्थानीय विकास, किसान हित और पारिवारिक नेतृत्व हमेशा निर्णायक रहे। 2022 में भाजपा के राजकुमार पाल ने 45.80% वोट (89,762) पाकर अपना दल (कृष्णा) की कृष्णा पटेल को हराया, जिन्हें 33.01% वोट (64,699) मिले। प्रमुख मुद्दों में खराब सड़कें, अतिक्रमण, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और कृषि क्षेत्र की चुनौतियां रहीं, जबकि बेल्हा देवी मंदिर और आंवला उत्पादन ने क्षेत्र को सामाजिक-आर्थिक पहचान दी है। यहां के मतदाता जातीय-धार्मिक विविधता के साथ कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं और उनका ध्यान विकास, रोजगार, शिक्षा व बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित रहता है। राजनीतिक माहौल में जातीय समीकरण, परिवारवाद और रणनीति की अहमियत हमेशा बनी रहती है, जिससे प्रतापगढ़ विधानसभा प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली भूमिका निभाती है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
राजेंद्र कुमार मौर्य, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के चिलबिला में हुआ, मुराई जाति से आते हैं और अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद से स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। पिछड़ी जातियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए समर्पित एक सक्रिय राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने 1995 में भाजपा के नगर कोषाध्यक्ष के पद से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की और नगर मंडल सदस्य, जिला महामंत्री, किसान मोर्चा जिला महामंत्री, जिला कोषाध्यक्ष जैसे कई अहम संगठनात्मक पद संभाले। मौर्य समाज की संस्थाओं में सक्रिय रहते हुए वे प्रतापगढ़ के बंधुत्व क्लब के प्रमुख भी रहे। 2022 में भाजपा के टिकट पर प्रतापगढ़ सदर विधानसभा से चुनाव जीतकर विधायक बने, जहां उन्होंने अपना दल (कमेरावादी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष को 24,609 मतों के अंतर से हराया। चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उनकी छवि क्षेत्र में साफ-सुथरी व प्रभावशाली मानी जाती है।
प्रतापगढ़ विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में प्रतापगढ़ विधानसभा का जनजीवन बुनियादी सुविधाओं की कमी, खराब सड़कों, जल निकासी, और अनियमित बिजली-पानी आपूर्ति जैसी समस्याओं से जूझता रहा, जिससे परिवहन, व्यापार और ग्रामीण जीवन प्रभावित हुए। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और शिक्षण संस्थानों में संसाधनों की कमी ने लोगों को बेहतर इलाज और शिक्षा के लिए रायबरेली या प्रयागराज का रुख करने पर मजबूर किया। बेरोजगारी और स्वरोजगार के साधनों की कमी ने युवाओं में निराशा बढ़ाई, जबकि व्यापारियों ने कोविड-काल के बाद व्यापारिक माहौल सुधारने की मांग की। ब्राह्मण, ठाकुर, कुर्मी, यादव, पाल और मुस्लिम समुदायों की बड़ी आबादी के चलते जातीय समीकरण यहां की राजनीति का अहम हिस्सा रहे और कई बार समीकरण तेजी से बदले। शहर और गांवों में अतिक्रमण, प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी और किसान मुद्दे जैसे आंवला उत्पादन, दलहन व गेहूं की फसल के लिए समर्थन मूल्य, सिंचाई और बाजार सुविधाएं हमेशा चर्चा में रहे। महिला सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं को लेकर भी जनता की अपेक्षाएं बनी रहीं। इन तमाम मुद्दों ने क्षेत्र के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक माहौल को गहराई से प्रभावित किया और चुनावी समीकरण तय करने में बड़ी भूमिका निभाई।