प्रतापपुर विधानसà¤à¤¾ सीट - Allahabad
प्रतापपुर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | विजमा यादव |
| जिला | Allahabad |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | भदोही |
प्रतापपुर विधानसभा सीट प्रोफाइल
प्रतापपुर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज ज़िले में स्थित एक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है, जो भदोही लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह सीट सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी की है और ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र हंडिया और फूलपुर तहसीलों के कुछ भागों को कवर करता है, जिसमें कई गांव और पंचायतें शामिल हैं। यह सीट कड़े चुनावी मुकाबलों के कारण बहुत दिलचस्प है।
जनसंख्या विवरण
मतदाता विवरण (2022)
निर्वाचन क्षेत्र संख्या: 257
कुल मतदाता: 4,06,567
पुरुष मतदाता: 2,19,886
महिला मतदाता: 1,86,640
ट्रांसजेंडर: 41
साक्षरता दर: 72.32% (जनगणना 2011)
2022 में मतदान प्रतिशत: 55.69%
जातीय विभाजन (मतदाता आधार पर अनुमानित)
यादव: 1,00,000
ब्राह्मण: 60,000
मुस्लिम: 55,000
पटेल और बिंद: 42,000
बनिया: 11,000
ठाकुर: 7,000
कायस्थ: 3,000
धार्मिक विभाजन (प्रयागराज जिले के सामान्य आंकड़ों के आधार पर)
हिंदू: लगभग 85%
मुस्लिम: लगभग 11%
अन्य धर्म: लगभग 4%
अनुसूचित जाति (SC): 24.01%
अनुसूचित जनजाति (ST): 0%
चुनावी इतिहास
2022 चुनाव परिणाम
|विजेता: विजमा यादव (समाजवादी पार्टी )
वोट शेयर: 40.09%
उपविजेता: राकेश धर त्रिपाठी (अपना दल (सोनेलाल))
विधायक परिचय और आपराधिक मामले
विजमा यादव उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले की प्रतापपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक हैं। वे 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से चौथी बार विजयी हुईं। उनका जन्म फूलनगर, इलाहाबाद में हुआ था और वे यादव समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। हालांकि, हाल ही में वे एक 22 साल पुराने आपराधिक मामले में दोषी ठहराई गई हैं, जिसमें वर्ष 2000-2001 के दौरान प्रयागराज के सराय इनायत क्षेत्र में पुलिस पार्टी पर हमले का आरोप था। इस मामले में अदालत ने उन्हें डेढ़ साल की जेल की सजा सुनाई है, जिससे उनकी विधानसभा सदस्यता भी संकट में पड़ सकती है। उनके राजनीतिक जीवन की एक और अहम बात यह है कि उनके पति, सपा विधायक जवाहर पंडित की 1996 में हत्या कर दी गई थी।
प्रतापपुर विधानसभा के पिछले पांच साल
पिछले पांच वर्षों में प्रतापपुर विधानसभा सीट (प्रयागराज) में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उभरकर सामने आए हैं। क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित होने के कारण सिंचाई सुविधाओं, फसल की उचित कीमत और कृषि से जुड़ी सेवाओं की कमी किसानों के लिए प्रमुख चिंता का विषय रही है। साथ ही, सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी ने क्षेत्र के समग्र विकास को प्रभावित किया है। शिक्षा की गुणवत्ता और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी भी लंबे समय से उठाए जा रहे मुद्दों में शामिल है। सामाजिक और जातीय विविधता—जैसे यादव, ब्राह्मण और मुस्लिम समुदायों की उपस्थिति—के कारण क्षेत्र में जातीय समीकरण भी चुनावी राजनीति को प्रभावित करते हैं। कोविड-19 के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग और भी तीव्र हुई है, जिससे बेहतर अस्पताल और चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता स्पष्ट रूप से महसूस की गई है।