रामपुर विधानसभा सीट - Rampur

रामपुर

वर्तमान विधायक
श्री आकाश सक्सैना (हनी)
जिला
Rampur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
रामपुर
रामपुर विधानसभा क्षेत्र
रामपुर उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित विधानसभा क्षेत्र है। इसका क्रमांक 37 है और यह रामपुर लोकसभा क्षेत्र का भाग है। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल और सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में रहा है। क्षेत्र में शहरी और ग्रामीण आबादी मिश्रित है। आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, यानी यह सामान्य सीट है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: रामपुर
विधानसभा क्रमांक: 37
लोकसभा क्षेत्र: रामपुर
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: 3,25,313
साक्षरता दर: 59.47%
लिंग अनुपात: 917/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 37.14%
मुस्लिम: लगभग 61.58%
अन्य समुदाय: सिख 0.71%, अन्य 0.57%
अनुसूचित जाति: अनुमानित 10-12%
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,18,589
विजेता: आज़म खान (सपा)
वोट शेयर: 59.71%
उपविजेता: आकाश सक्सेना (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 56.61%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 उपचुनाव परिणाम
विजेता: आकाश सक्सेना (भाजपा)
वोट शेयर: 62.06%
उपविजेता: मोहम्मद असीम रजा (सपा)
मतदान प्रतिशत: 27.83%
रामपुर विधानसभा उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल सीट रही है, जहाँ लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान का दबदबा रहा। करीब 45 साल के राजनीतिक कॅरियर में वे 10 बार विधायक चुने गए और कई अहम पदों पर रहे। 1993 के बाद से सपा ने लगातार इस सीट पर जीत दर्ज की थी। 2019 में आजम खान लोकसभा सांसद बने तो उन्होंने विधायक पद छोड़ दिया, लेकिन 2022 में फिर से विधानसभा चुनाव जीता। हालांकि हेट स्पीच मामले में सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता रद्द हो गई और सीट खाली हो गई। इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने पहली बार यह सीट जीत ली, जब आकाश सक्सेना ने सपा उम्मीदवार को लगभग 34 हजार वोटों से हराकर इतिहास रच दिया। 2022 के चुनाव में आजम खान को 59.71% वोट मिले थे जबकि आकाश सक्सेना 34.62% वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। वहीं उपचुनाव में भाजपा को 62.06% वोट और सपा को 36.05% वोट मिले, लेकिन मतदान केवल 27.83% ही हुआ। यह नतीजा रामपुर की राजनीति में बड़ा बदलाव माना गया, जहाँ लगभग पाँच दशकों से कायम मुस्लिम नेतृत्व को भाजपा ने चुनौती देते हुए नया राजनीतिक समीकरण खड़ा किया।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
आकाश सक्सेना उत्तर प्रदेश के रामपुर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हैं। आकाश 2022 के उपचुनाव में पहली बार विधायक बने, जब उन्होंने सपा उम्मीदवार असीम रजा को बड़े अंतर से हराया। वे रामपुर के पहले हिंदू विधायक भी हैं। उनके पिता शिव बहादुर सक्सेना चार बार विधायक रह चुके हैं और कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं, जिससे उन्हें राजनीति की गहरी समझ मिली। आकाश सक्सेना भाजपा के भीतर एक सक्रिय और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने में अहम भूमिका निभाई और कई मामलों में पक्षकार बने। उनके खिलाफ कुल 43 मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं, जिनमें से ज्यादातर आजम खान और उनके परिवार से जुड़े हैं। चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
रामपुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में रामपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति और जनजीवन कई अहम मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता रहा। अवसंरचना विकास यहाँ की सबसे बड़ी जरूरत रही, जहाँ सड़कों, पुलों, जल निकासी और सार्वजनिक परिवहन में सुधार की लगातार मांग उठती रही। राम रहीम सेतु के चौड़ीकरण और नए पुल के निर्माण का मुद्दा हाल के दिनों में काफी प्रमुख रहा, जिसके लिए विधायक आकाश सक्सेना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समर्थन भी मांगा। औद्योगिक निवेश और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास की मांग चुनावी एजेंडे में बनी रही। कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक शांति बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया गया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी अस्पतालों के आधुनिकीकरण और शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता सुधार की आवश्यकता लगातार महसूस की गई। पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन भी स्थानीय जनता की प्राथमिकताओं में शामिल रहे। युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार को लेकर अपेक्षाएँ रहीं, जबकि विभिन्न जातियों और समुदायों के हितों की सुरक्षा और समाज कल्याण योजनाओं का निष्पक्ष क्रियान्वयन भी चर्चाओं में रहा। साथ ही, रामपुर खजुरिया को प्रखंड का दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से चली आ रही है, जिसे लोग क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए जरूरी मानते हैं। कुल मिलाकर, यही वे मुद्दे रहे जिन्होंने न केवल 2022 के विधानसभा चुनाव बल्कि पिछले पाँच वर्षों के राजनीतिक विमर्श को दिशा दी।

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