रसड़ा विधानसà¤à¤¾ सीट - Ballia
रसड़ा |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री उमाशंकर सिंह |
| जिला | Ballia |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | बहुजन समाज पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | घोसी |
रसड़ा विधानसभा
रसड़ा विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में स्थित है। यह उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों में से 358 नंबर की सीट है और यह घोसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। रसड़ा को उसके धार्मिक महत्व के कारण अक्सर 'छोटी काशी' और 'नाथ नगरी' कहा जाता है, खासकर प्रसिद्ध नाथ बाबा मंदिर की उपस्थिति के कारण, जो शहर का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह नगर धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता की समृद्ध परंपरा के लिए जाना जाता है। यहाँ दुर्गा पूजा का आयोजन अत्यंत भव्यता से होता है, जो उत्तर प्रदेश में रामनगर (वाराणसी) के बाद दूसरा सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है। रसड़ा की मिठाइयों में लौंगलत्ता विशेष रूप से प्रसिद्ध है। शहर के प्रमुख बाजारों में सदर बाजार और स्टेशन रोड मार्केट शामिल हैं, जो अपनी चहल-पहल और मछली, चिकन तथा मटन बाजारों के लिए प्रसिद्ध हैं। 'रसड़ा' नाम की उत्पत्ति दो हिंदी शब्दों 'रस' और 'सड़ा' से हुई मानी जाती है, जिसका संबंध क्षेत्र में सड़े हुए गन्नों से गुड़ बनाने की ऐतिहासिक प्रक्रिया से जोड़ा जाता है।
जनसंख्या विवरण
अनुमानित जनसंख्या (रसड़ा नगर, 2025): लगभग 45,000
रसड़ा तहसील की जनसंख्या (2011): 5,48,000
साक्षरता दर (तहसील): 71.16%
पुरुष: 69.25%
महिला: 51.86%
धार्मिक और सामुदायिक विभाजन
धर्म (रसड़ा नगर, 2011 जनगणना):
हिंदू: 69.04%
मुस्लिम: 30.23%
ईसाई: 0.33%
सिख: 0.07%
अन्य: 1% से कम
जातिगत संरचना (तहसील स्तर):
अनुसूचित जाति: 20.6%
अनुसूचित जनजाति: 2.5%
राजनीतिक और चुनावी ट्रेंड्स
हालिया चुनाव परिणाम (2022)
विजेता: उमाशंकर सिंह (बीएसपी)
वोट शेयर 43.82%
उपविजेता: महेंद्र चौहान (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी)
रसड़ा विधानसभा सीट पर 2012 से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दबदबा रहा है, जहां उमाशंकर सिंह ने लगातार तीन चुनाव (2012, 2017, 2022) जीतकर अपनी पकड़ बनाए रखी है। हालांकि, हाल के वर्षों में सुभासपा और भाजपा ने कड़ी चुनौती दी है। इस सीट का इतिहास भी रोचक रहा है, क्योंकि 2000 से पहले यहां कांग्रेस, जनता दल और सीपीआई जैसी पार्टियाँ भी जीत दर्ज कर चुकी हैं। चुनावी समीकरणों की बात करें तो मुस्लिम मतदाता, जो नगर क्षेत्र की 30% से अधिक आबादी हैं, अक्सर करीबी मुकाबलों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, ओबीसी (खासकर राजभर और यादव) और दलित मतदाता (तहसील में SC लगभग 20%) भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं। बसपा और सुभासपा खासतौर पर इन्हीं वर्गों को साधने की कोशिश करती हैं। आमतौर पर यह सीट त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबलों का केंद्र रहती है, जिसमें बसपा, सुभासपा, भाजपा और कभी-कभी सपा या कांग्रेस भी मैदान में होती हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
उमाशंकर सिंह, उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के वरिष्ठ नेता और तीन बार के विधायक हैं। खनवर गांव, नगरा थाना क्षेत्र में जन्मे उमाशंकर सिंह ने बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज से छात्र राजनीति की शुरुआत की और 1991 में छात्र संघ महामंत्री बने। वे एक सफल व्यवसायी (ठेकेदार और कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक) होने के साथ-साथ समाजसेवी भी हैं। उनकी छवि गरीबों के मसीहा और “रॉबिन हुड” जैसे नेता की रही है, जो सामूहिक विवाह, मुफ्त इलाज, फ्री वाई-फाई और जरूरतमंदों की मदद के लिए पहचाने जाते हैं। 2000 में वे जिला पंचायत सदस्य बने और 2011 में बीएसपी में शामिल होकर 2012 में पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 में लगातार जीत हासिल की। 2022 में जब पूरे उत्तर प्रदेश में बीएसपी सिर्फ एक सीट पर जीत सकी, तब वही एकमात्र विधायक बनकर पार्टी की प्रतिष्ठा बचाने वाले नेता के रूप में उभरे। क्षेत्र में उनकी सभी जातियों और धर्मों के बीच लोकप्रियता है, और वे विपक्ष में रहते हुए भी विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। उनके 2022 के नामांकन शपथपत्र के अनुसार, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
रसड़ा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच सालों में रसड़ा विधानसभा क्षेत्र (बलिया) में कई अहम मुद्दे सामने आए हैं। दलित, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के वोटों का बिखराव दिखा, जो पहले बीएसपी के साथ थे, लेकिन अब कुछ वोट बीजेपी की ओर भी गए। मुस्लिम और यादव वोट निर्णायक माने जाते हैं, लेकिन ये पूरी तरह एकजुट नहीं हो पाए। विकास की बात करें तो मेडिकल कॉलेज की घोषणा के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ, सड़कें टूटी हुई हैं, बिजली और पानी की दिक्कत बनी रही और कस्बे में गंदगी, जलभराव और ट्रैफिक जैसी परेशानियाँ रहीं। शिक्षा में सरकारी स्कूलों की हालत खराब है और उच्च शिक्षा के संस्थान कम हैं, वहीं युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही जिससे पलायन हो रहा है। किसान फसल का पैसा समय पर न मिलने, बीमा का लाभ न मिलने और सिंचाई की समस्याओं से जूझ रहे हैं। बीएसपी की पकड़ पहले जैसी नहीं रही और दलित वोटों का बंटवारा चर्चा में रहा। सपा और भाजपा इसे चुनौती नहीं दे पाए, पर 2022 में एसबीएसपी ने कड़ा मुकाबला किया। कोविड के समय स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहद कमजोर थीं। साथ ही, ज़मीन विवाद, चोरी और महिलाओं के खिलाफ अपराध के कारण क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की भी काफी शिकायतें रहीं।