सांडी विधानसभा सीट - Hardoi

सांडी

वर्तमान विधायक
श्री प्रभाष कुमार
जिला
Hardoi
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
हरदोई
सांडी विधानसभा सीट प्रोफाइल
सांडी (सुरक्षित) विधानसभा उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की अनुसूचित जाति बहुल, कृषि प्रधान और दलित नेतृत्व की परंपरा वाली सीट है। यह सीट ब्रह्मावर्त तीर्थ, ग्रामीण गंगा-घाटी के गांवों और एससी राजनैतिक घरानों के प्रभाव के कारण अलग पहचान रखती है; 2012 में अस्तित्व में आई नई सीट होने के बावजूद यहां से निकले नेताओं ने राज्य-स्तर की राजनीति में पहचान बनाई है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: हरदोई
विधानसभा क्रमांक: 158
लोकसभा क्षेत्र: हरदोई लोकसभा क्षेत्र
आरक्षण: अनुसूचित जाति
अनुमानित आबादी: 3,33,693
साक्षरता दर: लगभग 60% (हरदोई जिला)
लिंग अनुपात: लगभग 834-835 महिलाएं प्रति 1000 पुरुष
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
- हिंदू: 61.30%
- मुस्लिम: 38.25%
- अन्य समुदाय: 1-2%
- अनुसूचित जाति: लगभग 10.21%
-राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
- सांडी सीट 2012 के परिसीमन में बनी; 2012 के पहले यह इलाका बिलग्राम विधानसभा का हिस्सा था।
- 2012 के पहले चुनाव में समाजवादी पार्टी की राजेश्वरी देवी ने जीत दर्ज की; उन्हें 66,325 वोट मिले और बसपा के वीरेंद्र कुमार पर 6,650 वोटों से जीत मिली (वोट शेयर लगभग 38 बनाम 34 प्रतिशत)।
- 2017 में भाजपा के प्रभाष कुमार (प्रभाष वर्मा) ने कांग्रेस के ओमेंद्र कुमार वर्मा को 20,225 वोटों के बड़े अंतर से हराया; उनका वोट शेयर 38.79 प्रतिशत रहा, जबकि कांग्रेस 27.90 प्रतिशत पर रही, सपा-बसपा पीछे रह गईं।
- 2022 तक की तस्वीर यह दिखाती है कि 2012 में सपा, 2017 और 2022 में भाजपा-यानी हर चुनाव में जनता ने विधायक बदला, लेकिन प्रभाष वर्मा ने पिछला दशक भाजपा के 'स्थायी चेहरा' के रूप में बिताया।
2022 चुनावी परिणाम (सांडी विधानसभा)
कुल मतदाता: 1,93,822
मतदान प्रतिशत: 58.6%
विजेता: प्रभाष वर्मा (भाजपा)
वोट शेयर: 42.1%
उपविजेता: उषा वर्मा (सपा)
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
वे अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं और हरदोई के स्थानीय राजनीतिक-सामाजिक परिवार से जुड़े माने जाते हैं; 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में भाजपा ने उन्हें एससी-ओबीसी-हिंदू मतदाताओं को जोड़ने वाले चेहरे के रूप में आगे किया। 2017 में पहली बार विधायक बने और 2022 में दोबारा जीत दर्ज कर सांडी सीट पर अपना प्रभाव कायम रखा; इससे पहले 2012 में सपा की राजेश्वरी देवी यहां से जीती थीं, यानी इस अपेक्षाकृत नई सीट पर हुए तीन चुनावों में दो बार प्रभाष वर्मा को सफलता मिली। उनके विकास दावों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण, ब्रह्मावर्त तीर्थ के लिए 50 लाख रुपये की स्वीकृति, अखवेलपुर में पुल और अहिरोरी में ऑक्सीजन प्लांट जैसी योजनाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। उनके आधिकारिक चुनावी हलफनामे या उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में उनके खिलाफ किसी गंभीर आपराधिक मुकदमे की कोई जानकारी नहीं मिलती।
सांडी विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
सांडी क्षेत्र में एससी मतदाताओं की संख्या अधिक होने के बावजूद विकास, रोजगार और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों पर व्यापक असंतोष देखने को मिलता रहा है, वहीं दो प्रमुख दलित राजनीतिक परिवारों की प्रतिस्पर्धा ने 'परिवार बनाम जनता' की बहस को भी जन्म दिया। अखवेलपुर पुल, क्षतिग्रस्त प्रमुख मार्गों की मरम्मत, ग्रामीण संपर्क सड़कों, नाली-सीवर और जलभराव की समस्याएं स्थानीय राजनीति के केंद्र में रही हैं, जिनमें से दो बड़े मार्गों को स्वयं विधायक ने भी गंभीर समस्या माना है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, ऑक्सीजन प्लांट और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार को विकास दावों में शामिल किया गया, लेकिन कोविड महामारी ने ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की कमजोरियां उजागर कर दीं। हरदोई जिले के अन्य हिस्सों की तरह यहां भी छोटे-मझोले किसान, खेतिहर और प्रवासी मजदूर बड़ी संख्या में हैं; खेती की बढ़ती लागत, सीमित लाभ, उद्योगों की कमी और स्थानीय रोजगार के अभाव ने पलायन को बढ़ाया है। साथ ही छिटपुट आपराधिक घटनाएं, शराब-जुआ, जमीन विवाद और जातीय-सामाजिक तनाव समय-समय पर राजनीतिक मुद्दा बनते रहे, जहां भाजपा ने कानून-व्यवस्था में सुधार का दावा किया तो विपक्ष ने दलित और गरीब वर्गों के साथ पुलिस-प्रशासन के व्यवहार को सवालों के घेरे में रखा।

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