सरधना विधानसभा सीट - Meerut

सरधना

वर्तमान विधायक
श्री अतुल प्रधान
जिला
Meerut
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
समाजवादी पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
मुजफ्फरनगर
सरधना विधानसभा
सरधना विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है और यह मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह विधानसभा क्षेत्र सामाजिक और धार्मिक रूप से विविध है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की महत्वपूर्ण आबादी है। क्षेत्र की राजनीतिक लड़ाई मुख्यतः भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच होती रही है। सरधना सीट की राजनीति में ठाकुर चौबीसी समुदाय का बड़ा प्रभाव है।
जनसंख्या (जनगणना 2011):
जिला: मेरठ
विधानसभा क्रमांक: 44
लोकसभा क्षेत्र: मुजफ्फरनगर
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित)
अनुमानित आबादी: लगभग 5,66,096
साक्षरता दर: लगभग 72.84%
लिंग अनुपात: 886/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (अनुमानित):
हिंदू: 60-65%
मुस्लिम: 30-35%
अन्य समुदाय: 1-2%
अनुसूचित जाति: 15-20%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान:
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,42,323
विजेता: अतुल प्रधान (सपा)
वोट शेयर: 48.9%
उपविजेता: संगीत सिंह सोम (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 67.3%
सरधना विधानसभा क्षेत्र, जो उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है और मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, सामाजिक और धार्मिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदायों की बड़ी आबादी के साथ-साथ ठाकुर चौबीसी समुदाय का खासा प्रभाव है। राजनीतिक इतिहास में भाजपा ने 1993 से 2002 तक इस सीट पर दबदबा बनाए रखा, जबकि 2007 में बसपा को सफलता मिली। 2012 और 2017 में भाजपा के चर्चित और फायरब्रांड नेता संगीत सिंह सोम विधायक रहे, जिनकी पहचान 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद और भी मुखर हुई। लेकिन 2022 के चुनाव में सियासी तस्वीर बदली, जब सपा के अतुल प्रधान ने संगीत सिंह सोम को करीब 18,200 वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की। लगभग 67.28% मतदान के साथ हुए इस चुनाव में अतुल प्रधान को करीब 48.75% वोट मिले, यानी 1,18,573 मतदाताओं ने उन्हें चुना। यह नतीजा न सिर्फ समाजवादी पार्टी की इस क्षेत्र में वापसी का संकेत था, बल्कि भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी। सरधना की राजनीति में जातीय और धार्मिक समीकरणों के साथ-साथ कृषि, सिंचाई, कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द जैसे स्थानीय मुद्दे हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
अतुल प्रधान, समाजवादी पार्टी के नेता और वर्तमान में उत्तर प्रदेश की सरधना विधानसभा सीट से विधायक हैं। मेरठ जिले के सरधना में 1983 में जन्मे अतुल ने अपनी राजनीतिक यात्रा छात्र राजनीति से शुरू की थी और समाजवादी छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। गुर्जर समुदाय से आने वाले अतुल प्रधान पश्चिम यूपी में इस समुदाय के एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के दो बार के विधायक और विवादों में घिरे नेता संगीत सिंह सोम को हराकर बड़ी जीत दर्ज की। उनकी छवि एक दबंग, जमीनी और सीधे जनता से जुड़ने वाले नेता की रही है। व्यक्तिगत जीवन में उन्होंने कम उम्र में माता-पिता दोनों को खो दिया और मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। हालांकि, अतुल प्रधान का राजनीतिक सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा है। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके खिलाफ 38 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मुकदमे शामिल हैं।
सरधना विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में सरधना विधानसभा क्षेत्र में किसानों की समस्याएं, स्थानीय विकास, सांप्रदायिक सद्भाव, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। यह क्षेत्र मुख्यतः कृषि पर आधारित है, जहां गन्ना खेती प्रमुख है, इसलिए सिंचाई सुविधाएं, फसल की सुरक्षा और किसानों को उचित मूल्य दिलाना हमेशा चर्चा में रहा। हिंदू और मुस्लिम समुदायों की बड़ी आबादी वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में सांप्रदायिक शांति बनाए रखना भी अहम रहा, खासकर 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से। वहीं, गांवों और कस्बों में सड़कें, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं की कमी को लेकर भी लोगों की शिकायतें बनी रहीं। कानून-व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय जनता में चिंता रही और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठती रही। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण युवा वर्ग में स्वरोजगार और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने की मांग तेज हुई। राजनीतिक दृष्टि से यह क्षेत्र काफी सक्रिय रहा, जहां 2022 में सपा के अतुल प्रधान ने भाजपा के संगीत सोम को कड़े मुकाबले में हराया। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर में सुधार भी मतदाताओं की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा। कुल मिलाकर, सरधना में चुनावी मुद्दों की बुनियाद स्थानीय जरूरतों और सामाजिक संतुलन पर टिकी रही।

उत्तर प्रदेश लेटेस्ट न्यूज़