सरोजनी नगर विधानसà¤à¤¾ सीट - Lucknow
सरोजनी नगर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | डा0 राजेश्वर सिंह |
| जिला | Lucknow |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | मोहानलालगंज |
सरोजिनी नगर विधानसभा सीट
सरोजिनी नगर विधानसभा उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले की एक प्रमुख शहरी-ग्रामीण मिश्रित सीट है। यह मोहानलालगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और यहाँ का राजनैतिक परिदृश्य जातिगत विविधता, संगठन क्षमता और स्थानीय विकास के इर्द-गिर्द केंद्रित है। विधानसभा क्रमांक 170 है और यह सामान्य (अनारक्षित) सीट है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: लखनऊ
विधानसभा क्रमांक: 170
लोकसभा क्षेत्र: मोहानलालगंज
आरक्षण: कोई नहीं (सामान्य)
अनुमानित आबादी: 6.5 लाख
साक्षरता दर: 70%
लिंग अनुपात: 914/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 80%
मुस्लिम: लगभग 17%
अन्य समुदाय: 3%
अनुसूचित जाति: लगभग 17%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 5,67,252
विजेता: राजेश्वर सिंह (भाजपा)
वोट शेयर: 49.07%
उपविजेता: अभिषेक मिश्रा (सपा)
मतदान प्रतिशत: 57.7%
सरोजिनी नगर विधानसभा, लखनऊ की एक प्रमुख और ऐतिहासिक सीट रही है, जहां वर्षों से राजनीतिक परिदृश्य में लगातार बदलाव देखने को मिले हैं। 1967 में शहरी और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर इस सीट का गठन हुआ था। शुरुआती वर्षों में कांग्रेस का यहां दबदबा रहा और राजा विजय कुमार त्रिपाठी ने पांच बार जीत हासिल की। हालांकि 1977 के बाद राजनीतिक तस्वीर बदलनी शुरू हुई जनता पार्टी, निर्दलीय उम्मीदवार शारदा प्रताप शुक्ला, सपा के श्याम किशोर यादव और बसपा से इरशाद खान जैसे नेताओं ने सीट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। 2012 में सपा के शारदा प्रताप शुक्ला ने जीत दर्ज की, लेकिन 2017 में भाजपा की स्वाति सिंह की जीत के साथ भाजपा ने यहां अपनी जड़ें मजबूत कीं। 2022 में भाजपा के राजराजेश्वर सिंह ने सपा के अभिषेक मिश्र को 56,186 वोटों के बड़े अंतर से हराकर यह सीट दोबारा भाजपा के खाते में डाल दी। जातिगत समीकरण की बात करें तो ब्राह्मण, एससी, पिछड़ी जातियां, क्षत्रिय और मुस्लिम मतदाता मिलकर चुनाव के नतीजे तय करते हैं। कांग्रेस और बसपा का प्रभाव अब लगभग खत्म हो चुका है और मुकाबला सीधा भाजपा और सपा के बीच रह गया है। शहरी और ग्रामीण मतों का मिश्रण, जातीय संतुलन और सेवा वर्गों की भूमिका इस सीट को हर चुनाव में रोमांचक बना देती है। लगातार दो चुनावों में भाजपा की जीत से साफ है कि उसका सवर्ण-पिछड़ा गठजोड़ और संगठनात्मक पकड़ इस क्षेत्र में फिलहाल मजबूत बनी हुई है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
राजेश्वर सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हैं, जिन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से रिकॉर्ड 56,186 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। पूर्व में वे एक तेजतर्रार पुलिस अधिकारी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के संयुक्त निदेशक रह चुके हैं। 31 जनवरी 2022 को उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर राजनीति में कदम रखा और भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी ने उन्हें तत्कालीन विधायक स्वाति सिंह की जगह से टिकट दिया और उन्होंने समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्रा को बड़े अंतर से हराया। वे इंजीनियरिंग स्नातक हैं, कानून में डिग्री रखते हैं और 2011 में उन्होंने पीएचडी भी पूरी की है। उनकी पत्नी लक्ष्मी सिंह एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और उनकी एक बेटी है। मूल रूप से सुलतानपुर के रहने वाले राजेश्वर सिंह फिलहाल गौतम बुद्ध नगर में निवास करते हैं। अपने पुलिस कॅरियर में वे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में भी जाने गए और ईडी में रहते हुए कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की। 2022 चुनावी शपथपत्र के अनुसार, उनके खिलाफ किसी तरह का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
सरोजिनी नगर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में सरोजिनी नगर विधानसभा (लखनऊ) क्षेत्र के लोगों को कई बुनियादी और अहम समस्याओं का सामना करना पड़ा है। सबसे बड़ी चिंता सड़कें और ट्रैफिक की रही चाहे शहरी इलाका हो या ग्रामीण, खराब सड़कों और जाम की समस्या ने आम जनजीवन को लगातार परेशान किया। इसके साथ ही स्वच्छता, पीने के पानी, सीवर लाइन और नालियों की सफाई जैसे बुनियादी सुविधाओं की कमी खासकर बारिश के मौसम में जलभराव और गंदगी के रूप में सामने आई, जिससे जनता में नाराजगी भी रही। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाओं की कमी को लेकर शिकायतें आम रहीं और कोरोना काल में यह मुद्दा और गंभीर हो गया। युवा बेरोजगारी से जूझते रहे, और स्वरोजगार व स्किल डेवलपमेंट सेंटर की मांग उठती रही। शिक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही, खासकर सरकारी स्कूलों में सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की अनुपस्थिति की वजह से। महिला सुरक्षा को लेकर लोग चिंतित रहे। बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी और पुलिस पेट्रोलिंग की मांग तेज़ हुई। जातीय और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी एक चुनौती रहा, जहां ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित, ठाकुर, यादव सहित सभी समुदायों के बीच संतुलन की राजनीति देखने को मिली। वहीं प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण और राशन जैसी योजनाओं के लाभ सही ढंग से न मिलने की शिकायतें भी लगातार मिलती रहीं। कुल मिलाकर, अधूरा विकास, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं और तेजी से बढ़ती आबादी के दबाव ने सरोजिनी नगर की राजनीति को प्रभावित किया, और यही सब मुद्दे यहां के चुनावी विमर्श का केंद्र बने रहे।