श्रावस्ती विधानसà¤à¤¾ सीट - Shrawasti
श्रावस्ती |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री राम फेरन पाण्डेय |
| जिला | Shrawasti |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 2,49,879 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | श्रावस्ती |
श्रावस्ती विधानसभा सीट
श्रावस्ती उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले की एक महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है, जिसका गठन 2008 में परिसीमन के बाद हुआ। यह बौद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है और मुख्य रूप से कृषि पर आधारित क्षेत्र है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: श्रावस्ती
विधानसभा क्रमांक: 290
लोकसभा क्षेत्र: श्रावस्ती
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: लगभग 2,80,000
साक्षरता दर: 46.74%
लिंग अनुपात: 881/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 62%
मुस्लिम: लगभग 37%
अन्य समुदाय: 1%
अनुसूचित जाति: लगभग 16.9%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,49,879
विजेता: रामफेरन पांडे (भाजपा)
वोट: 39.5%
उपविजेता: मोहम्मद असलम (सपा)
मतदान प्रतिशत: 60.6%
श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। पहले इसे इकौना विधानसभा कहा जाता था, बाद में इसका नाम बदलकर श्रावस्ती कर दिया गया। इस सीट पर अब तक कांग्रेस और बीजेपी पाँच-पाँच बार जीत दर्ज कर चुकी हैं, जबकि बसपा और सपा को एक-एक बार सफलता मिली है। 2017 में बीजेपी के रामफेरन पांडे ने सपा उम्मीदवार हाजी मोहम्मद रमजान को हराया और 2022 में भी उन्होंने जीत दोहराई। यहां हमेशा से कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला है। 1980 के बाद से जनता पार्टी, बीजेपी और अन्य दलों की मजबूत उपस्थिति रही, लेकिन जातीय समीकरण का असर हमेशा निर्णायक रहा, जिसमें ब्राह्मण, मुस्लिम, कुर्मी, यादव और दलित वोटर अहम भूमिका निभाते हैं। हालिया चुनावों में उम्मीदवार की लोकप्रियता, पार्टी की नीतियां और स्थानीय विकास कार्य प्रमुख फैक्टर बने, जिससे बीजेपी ने लगातार 2017 और 2022 दोनों चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत की। कुल मिलाकर, श्रावस्ती की राजनीति जातीय संतुलन और स्थानीय मुद्दों पर टिकी रही है, जहां सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें चुनावी बहस का केंद्र बनी रहीं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
रामफेरन पांडे, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और श्रावस्ती विधानसभा से विधायक हैं। 1 दिसंबर 1965 को जन्मे पांडे जी कृषि और व्यापार से जुड़े रहे हैं और उनकी शिक्षा हाईस्कूल तक हुई है। वे पहली बार 2017 में 17वीं विधानसभा के सदस्य बने और इसके बाद 2022 में 18वीं विधानसभा के लिए भी चुने गए। बीते 28 वर्षों में उन पर अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। 2022 में समाजवादी पार्टी नेता असलम रानी ने हाईकोर्ट में उनकी सदस्यता को चुनौती दी थी, यह आरोप लगाते हुए कि उन्होंने चुनावी हलफनामे में शिक्षा, संपत्ति और बैंक लोन जैसी जानकारियाँ छिपाई हैं। 2022 चुनाव आयोग को दिए शपथ पत्र के मुताबिक उन पर कोई आपराधिक मामले दर्ज नहीं हैं।
श्रावस्ती विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र की चुनौतियाँ ज्यादातर रोज़गार, सड़क और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जुड़ी रही हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित होने से बेरोजगारी बड़ा चुनावी मुद्दा बना। ग्रामीण इलाकों में जर्जर सड़कें, परिवहन की समस्याएँ और बुनियादी ढाँचे की कमी लगातार लोगों की नाराज़गी का कारण बनी। स्वच्छ पानी, सफाई व्यवस्था और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतें अब भी अधूरी हैं। शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल उठते रहे। साथ ही, क्षेत्र के बौद्ध और सांस्कृतिक स्थलों के विकास की मांग बार-बार सामने आई ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। हालांकि स्थानीय विधायक और प्रशासन इन मुद्दों पर काम कर रहे हैं, लेकिन जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा उतरना अभी बाकी है।