सिकन्दराबाद विधानसभा सीट - Bulandshahr

सिकन्दराबाद

वर्तमान विधायक
श्री लक्ष्मी राज सिंह
जिला
Bulandshahr
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
गौतम बुद्ध नगर
सिकंदराबाद विधानसभा सीट
सिकंदराबाद विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बुलंदशहर जिले का एक हिस्सा है और गौतम बुद्ध नगर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के 5 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1957 में हुआ था, जब 1956 में 'डीपीएसीओ (1956)' (परिसीमन आदेश) पारित किया गया था। 2008 में 'संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश' पारित होने के बाद, निर्वाचन क्षेत्र को पहचान संख्या 64 मिली।
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 64
जिला: बुलंदशहर
लोकसभा क्षेत्र: गौतम बुद्ध नगर
स्थापना वर्ष: 1956
आरक्षण: सामान्य
जनसंख्या: कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं
लिंग अनुपात: 922/1000
साक्षरता दर: 65.71%
धार्मिक और जातीय विभाजन (जनगणना 2011)
मुस्लिम: 68.50%
हिन्दू: 30.98%
ईसाई: 0.44%
सिख: 0.01%
बौद्ध: 0.02%
अनुसूचित जाति: 18.56%
अनुसूचित जनजाति: 0.01%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,71,938
विजेता: लक्ष्मी राज सिंह (भाजपा)
वोट शेयर: 46.2%
उपविजेता: राहुल यादव (सपा)
मतदान प्रतिशत: 68.2%
सिकंदराबाद विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास विविध और परिवर्तनशील रहा है। शुरुआती दशकों में यहां कांग्रेस का प्रभावी वर्चस्व था, जो 1985 तक बना रहा। इसके बाद 1989 और 1991 में जनता दल ने इस सीट पर जीत दर्ज की, जबकि 1991 की ‘राम लहर’ के दौरान जिले की अन्य सीटें भले ही भाजपा को मिलीं, लेकिन सिकंदराबाद में ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने 1993 में पहली बार सीट जीती, लेकिन 2002 और 2007 में बसपा के वेदराम भाटी ने लगातार दो बार यहां से जीत दर्ज की। भाजपा ने 2012 में बिमला सिंह सोलंकी के साथ वापसी की और 2017 में भी उन्हें फिर से जिताया, जबकि 2022 में लक्ष्मी राज सिंह ने पार्टी की जीत की हैट्रिक पूरी की। इस सीट पर जातिगत और धार्मिक समीकरण काफी प्रभावशाली हैं गुर्जर, लोधी, जाट, दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण समुदायों का योगदान चुनावी परिणामों में निर्णायक रहता है। 2022 के चुनाव में भाजपा के लक्ष्मी राज सिंह ने सपा के राहुल यादव को हराया, जबकि बसपा तीसरे स्थान पर रही। 2017 और 2012 में भी भाजपा ने जीत दर्ज की थी। बीते वर्षों में भाजपा का दबदबा बढ़ा है, वहीं बसपा पीछे हटती गई है और सपा ने हालिया चुनाव में अपनी स्थिति थोड़ी मजबूत की है। कुल मिलाकर, सिकंदराबाद में जातीय संतुलन, हिंदू-मुस्लिम मतदाता विभाजन और स्थानीय मुद्दों की भूमिका हर चुनाव में महत्वपूर्ण रही है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
लक्ष्मी राज सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के युवा और सक्रिय नेता हैं, जो 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहली बार सिकंदराबाद (बुलंदशहर) सीट से विधायक चुने गए। 39 वर्षीय लक्ष्मी राज सिंह पूर्व में भाजयुमो के जिलाध्यक्ष और बुलंदशहर के आईपी डिग्री कॉलेज के छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके हैं, जिससे संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और सक्रियता साफ झलकती है। 2022 के चुनाव में उन्होंने सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी राहुल यादव को 29,343 वोटों के बड़े अंतर से हराकर अपनी पहली जीत दर्ज की। सामाजिक स्तर पर उन्हें एक प्रभावशाली और कर्मठ जनप्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है। उनके खिलाफ 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार 2 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सिकंदराबाद विधानसभा : पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
सिकंदराबाद क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर लगातार जन असंतोष देखने को मिला है। जर्जर सड़कों, जलभराव, सीवर और सफाई व्यवस्था की खराब हालत ने शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों को प्रभावित किया है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सीमित हैं, जबकि स्वरोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु संसाधनों की कमी भी बड़ी समस्या रही है। हिंदू-मुस्लिम आबादी के संतुलन के चलते सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, विशेषकर त्योहारों और चुनावों के दौरान। शहरीकरण के साथ ट्रैफिक जाम, पार्किंग संकट, जीटी रोड और बाजारों में भीड़भाड़ तथा अवैध अतिक्रमण यातायात प्रबंधन को जटिल बनाते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सरकारी संस्थानों में संसाधनों और कर्मियों की कमी साफ झलकती है, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में। साथ ही, दलित और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं लगातार उठती रही हैं, जो स्थानीय राजनीति और प्रशासन के लिए संवेदनशील मुद्दे बने हुए हैं।

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