सीतापुर विधानसभा सीट - Sitapur

सीतापुर

वर्तमान विधायक
श्री राकेश राठौर
जिला
Sitapur
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
सीतापुर
सीतापुर विधानसभा सीट
सीतापुर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की प्रमुख विधानसभा सीट है, जिसका गठन 1952 में हुआ। यह सीट सीतापुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और ऐतिहासिक और कृषि प्रधान क्षेत्र है जिसमें शहरी व ग्रामीण दोनों भाग शामिल हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: सीतापुर
विधानसभा क्रमांक: 146
लोकसभा क्षेत्र: सीतापुर
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: लगभग 3,00,000
साक्षरता दर: 61.1%
लिंग अनुपात: 913/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 73%
मुस्लिम: लगभग 26%
अन्य समुदाय: लगभग 1%
अनुसूचित जाति: अनुमानित 16%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,31,326
विजेता: राकेश राठौर (भाजपा)
वोट 42.4%
उपविजेता: राधेश्याम जायसवाल (सपा)
मतदान प्रतिशत: 58.0%
सीतापुर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना और विविधताओं से भरा रहा है, जहां कांग्रेस, भाजपा, बसपा और सपा जैसे दलों का समय-समय पर प्रभाव दिखाई देता रहा है। 1952 में यहां पहला चुनाव हुआ था और तब से यह क्षेत्र हमेशा राजनीतिक रूप से सक्रिय रहा है। लोकसभा स्तर पर भी सीतापुर अहम रहा है। भाजपा के राजेश वर्मा चार बार सांसद बने, जबकि कांग्रेस की राजेंद्र कुमारी वाजपेयी ने लगातार तीन जीत दर्ज कराई थी। यहां के चुनावी नतीजों में जातीय और सामाजिक समीकरण अहम भूमिका निभाते हैं, जिनमें मुस्लिम, कुर्मी, दलित और ब्राह्मण समुदाय निर्णायक साबित होते हैं। हाल के वर्षों में भाजपा ने मजबूत पकड़ बनाई है। 2017 में जिले की नौ में से सात सीटें जीतने के बाद 2022 में भी पार्टी ने बढ़त बनाए रखी। सीतापुर विधानसभा से भाजपा के विधायक ने 2017 में राधेश्याम जायसवाल को हराकर जीत दर्ज की और 2022 में भी यह बढ़त बरकरार रही। कुल मतदाता और वोट प्रतिशत के आंकड़े चुनाव आयोग के अनुसार दर्ज हैं, लेकिन साफ है कि यहां की राजनीति जातीय समीकरणों, सामाजिक मुद्दों और विकास के वादों पर ही घूमती रही है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
राकेश राठौर, सीतापुर सदर विधानसभा क्षेत्र से दो बार भाजपा विधायक रह चुके हैं। उन्होंने जीवन की शुरुआत एक स्कूटर मिस्त्री के रूप में की और मेहनत से मंत्री पद तक पहुंचे। सीतापुर में जन्मे राठौर इंटरमीडिएट तक शिक्षित हैं, कृषि और व्यवसाय से जुड़े रहे हैं और विवाहित जीवन में दो बच्चों के पिता हैं। हालांकि, उनके राजनीतिक कॅरियर के साथ विवाद भी जुड़े। उन्होंने भाजपा छोड़कर सपा और फिर कांग्रेस का दामन थामा, वहीं सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करते उनके कई ऑडियो वायरल हुए। 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ किसी भी तरह का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
सीतापुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए विकास और बुनियादी सुविधाएं ही सबसे बड़े मुद्दे रहे हैं। यहां सड़क, पुल और जल निकासी की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, जिन पर अब आंशिक रूप से काम हुआ है, लेकिन जलभराव जैसी दिक्कतें अब भी बनी रहती हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी चुनौतियां हैं। सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई की कमी और अस्पतालों में डॉक्टरों व उपकरणों की कमी लोगों को परेशान करती रही है, भले ही बिस्तरों की संख्या बढ़ाई गई हो। बिजली आपूर्ति में लो वोल्टेज और अनियमित कटौती भी आम समस्या है। वहीं, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जनता की चिंता लगातार बनी रही है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हैं, जिससे बेरोजगारी और पलायन जैसी स्थिति पैदा हुई है। सरकार की ओर से कई योजनाएं जरूर चलाई गईं, लेकिन लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं के बेहतर स्वरूप की उम्मीद कर रहे हैं।

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