सिवालखास विधानसभा सीट - Meerut

सिवालखास

वर्तमान विधायक
श्री गुलाम मौहम्‍मद
जिला
Meerut
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
राष्ट्रीय लोक दल
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
बागपत
सिवालखास विधानसभा सीट
सिवालखास विधानसभा उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की एक महत्वपूर्ण विधानसभा सीट है। इसका विधानसभा क्रमांक 43 है और यह बागपत लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यह क्षेत्र ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी है। सिवालखास विधानसभा सीट का गठन 1967 में परिसीमन के बाद हुआ और पहली बार चुनाव 1974 में हुआ। राजनीति में यहाँ कई पार्टियाँ सक्रिय रहीं हैं, लेकिन हालिया वर्षों में राष्ट्रीय लोक दल की मजबूत मौजूदगी रही है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: मेरठ
विधानसभा क्रमांक: 43
लोकसभा क्षेत्र: बागपत
आरक्षण: कोई नहीं (सामान्य)
अनुमानित आबादी: 3,30,000 (मतदाता संख्या 2019 के करीब)
साक्षरता दर: लगभग 70%-75%
लिंग अनुपात: 880/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन (अनुमानित)
हिंदू: लगभग 70-75%
मुस्लिम: लगभग 20-25%
अन्य समुदाय: 1-3%
अनुसूचित जाति: लगभग 15-18%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,32,738
विजेता: गुलाम मोहम्मद (राष्ट्रीय लोक दल)
वोट शेयर: 43.7%
उपविजेता: मनेन्द्र पाल सिंह (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 68.9%
सिवालखास विधानसभा, मेरठ जिले का एक अहम राजनीतिक क्षेत्र है, जो 1974 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया और 2012 से अनारक्षित हो गया। यहां की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि पिछले सात चुनावों में किसी भी पार्टी को लगातार दो बार जीत नहीं मिली है। यहां भाजपा, सपा, रालोद, कांग्रेस और बसपा सभी को अलग-अलग मौकों पर सत्ता में आने का मौका मिला है। 2012 में सपा के गुलाम मोहम्मद ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 में भाजपा के जितेंद्र पाल सिंह (बिल्लू) ने उन्हें हराया। जातीय रूप से यह सीट बेहद विविध है, जहां मुस्लिम, जाट, दलित, त्यागी, ब्राह्मण, गुर्जर और ठाकुर जैसे समुदायों का मजबूत असर है जिनमें जाट और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2022 के चुनाव में रालोद-सपा गठबंधन के गुलाम मोहम्मद ने भाजपा के महेंद्र पाल सिंह को करीब 9,182 वोटों से हराया और उन्हें करीब 42% वोट मिले। यह जीत किसान आंदोलन, गन्ना भुगतान, सिंचाई जैसे मुद्दों के साथ-साथ जाट-मुस्लिम एकता और गठबंधन की सोशल इंजीनियरिंग का नतीजा मानी गई। इस बार बसपा और कांग्रेस काफी पीछे रह गईं। कुल मिलाकर, सिवालखास में कोई स्थायी राजनीतिक पकड़ नहीं बना पाया है। यहां की राजनीति जातीय समीकरणों, स्थानीय मुद्दों और प्रत्याशी की छवि पर निर्भर करती है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
गुलाम मोहम्मद, मेरठ जिले की सिवालखास विधानसभा सीट से राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के वरिष्ठ विधायक हैं और लगभग 69 वर्ष के हैं। वे लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय हैं और सिंचाई, सड़क, शिक्षा, सामाजिक समरसता जैसे स्थानीय विकास मुद्दों को लगातार विधानसभा में उठाते रहे हैं। जातीय और सामाजिक समीकरणों को समझते हुए वे एक संतुलित और जमीनी नेता के रूप में पहचान बनाए हुए हैं। हाल ही में उनकी हवन करते और तिलक लगाए कुछ तस्वीरें वायरल होने के बाद धर्म परिवर्तन की अफवाहें फैली थीं, जिन्हें उन्होंने सिरे से खारिज कर विपक्ष की साजिश बताया। चुनावी हलफनामों के अनुसार उनके खिलाफ तीन गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सिवालखास विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
सिवालखास विधानसभा क्षेत्र, जो मुख्य रूप से कृषि प्रधान इलाका है, पिछले पांच वर्षों में कई अहम मुद्दों का केंद्र रहा है। किसानों को सिंचाई, फसल सुरक्षा और समर्थन मूल्य जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा और किसान आंदोलन के दौरान यह क्षेत्र भी प्रभावित रहा, जिससे ये मुद्दे स्थानीय राजनीति का अहम हिस्सा बने। सफाई व्यवस्था और कूड़ा प्रबंधन खासकर कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में एक बड़ी चुनौती रही, जिसे लेकर जनता ने कई बार नाराज़गी जताई। कानून व्यवस्था को लेकर भी लोगों में चिंता रही सुरक्षा और अपराध नियंत्रण से जुड़ी मांगें लगातार उठती रहीं। सामाजिक रूप से यह क्षेत्र काफी विविध है, जहां मुस्लिम, जाट, दलित, त्यागी-ब्राह्मण, गुर्जर और ठाकुर समुदाय की अहम भूमिका है और ये जातीय समीकरण चुनावों को सीधा प्रभावित करते हैं। विकास की बात करें तो सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की ज़रूरत लगातार महसूस की गई। यहां कुल 3,18,687 मतदाता हैं, जिनमें पुरुष 1,78,406 और महिलाएं 1,40,281 शामिल हैं। 2017 में भाजपा के जितेंद्र पाल सिंह (बिल्लू) ने समाजवादी पार्टी के गुलाम मोहम्मद को हराकर जीत दर्ज की थी। कुल मिलाकर, सिवालखास की राजनीति किसान समस्याओं, कानून व्यवस्था, सफाई, जातीय संतुलन और बुनियादी विकास जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

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