श्रीनगर विधानसà¤à¤¾ सीट - Lakhimpur Kheri
श्रीनगर |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्रीमती मंजू त्यागी |
| जिला | Lakhimpur Kheri |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | खीरी |
श्रीनगर विधानसभा सीट
श्रीनगर विधानसभा उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित एक प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र है। यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है और खीरी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। श्रीनगर सीट का राजनीतिक इतिहास विविध रहा है यहां कांग्रेस, बसपा, सपा और हाल के वर्षों में भाजपा का प्रभाव देखने को मिला है। विधानसभा क्रमांक 140 है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: लखीमपुर खीरी
विधानसभा क्रमांक: 140
लोकसभा क्षेत्र: खीरी
आरक्षण: अनुसूचित जाति
अनुमानित आबादी: 3.5-3.7 लाख
साक्षरता दर: 65.4% (जिला स्तर)
लिंग अनुपात: 915/1000 (जिला स्तर)
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 80%
मुस्लिम: 18%
अन्य समुदाय: 2%
अनुसूचित जाति: लगभग 25–30%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,27,669
विजेता: मंजू त्यागी (भाजपा)
वोट शेयर: 47.6%
उपविजेता: राम सरन (सपा)
मतदान प्रतिशत: 71.6%
श्रीनगर विधानसभा सीट, जो लखीमपुर खीरी जिले में है, 2008 के परिसीमन के बाद अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित हो गई। पहले यह सामान्य सीट थी और 1980 के दशक तक यहां कांग्रेस का प्रभाव रहा, लेकिन 1990 के बाद सपा और बसपा ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली। 1996 और 2002 में बसपा ने यहां जीत दर्ज की, जबकि 2007 और 2012 में सपा को सफलता मिली। 2017 में पहली बार भाजपा की मंजू त्यागी ने सीट जीतकर नया इतिहास रचा और 2022 में भी उन्होंने जीत बरकरार रखी। हाल के चुनावों में भाजपा लगातार आगे रही है, हालांकि सपा और बसपा भी मुकाबले में मजबूत रहे हैं। 2022 में कुल करीब 3.07 लाख मतदाताओं में से 47% ने वोट डाले, जिसमें मंजू त्यागी को 1.08 लाख वोट मिले और उन्होंने सपा के राम सरन को हराया। बसपा की मीरा बानो तीसरे नंबर पर रहीं। यहां की राजनीति में जातीय समीकरण, गन्ना किसानों की समस्याएं और स्थानीय विकास के मुद्दे अहम भूमिका निभाते हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
मंजू त्यागी भारतीय जनता पार्टी की नेता हैं और लखीमपुर खीरी जिले की श्रीनगर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे पासी समुदाय से आती हैं और 2022 में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है और वे अपनी दबंग छवि और सक्रियता के लिए जानी जाती हैं। महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कार्यों में भी उनकी भागीदारी रहती है। हालांकि 2024 में फूलबेहड़ सहकारी समिति के चुनाव के दौरान उन पर नामांकन पत्र जबरन छीनने और प्रशासनिक काम में बाधा डालने का आरोप लगा, जिस पर कोर्ट के आदेश से एफआईआर दर्ज की गई। 2022 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नही हैं।
श्रीनगर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच सालों में श्रीनगर (उत्तर प्रदेश) विधानसभा क्षेत्र में कई अहम मुद्दे लगातार चर्चा में रहे। सबसे ज्यादा गूंज गन्ना किसानों की रही, जिन्हें समय पर भुगतान न मिलने के कारण बार-बार धरना और प्रदर्शन करना पड़ा। प्रशासन की दखल के बाद ही कभी-कभी भुगतान हो पाया, लेकिन किसानों की यह मांग बनी रही कि सरकार समय से पूरा भुगतान कराए। दूसरी ओर, विकास कार्यों की रफ्तार बहुत धीमी रही। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं में कोई खास सुधार नहीं दिखा। शारदा नदी के किनारे हो रहे अवैध बालू खनन ने भी चिंता बढ़ाई, जिससे किसानों की जमीन कट रही है और बाढ़ का खतरा बढ़ा है। हर साल मानसून में बाढ़ से गांवों में भारी नुकसान होता है और राहत कार्यों में देरी से लोगों में नाराजगी रहती है। इसके अलावा, युवाओं को रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने के कारण पलायन की समस्या भी बनी रही। इन तमाम मुद्दों ने मिलकर क्षेत्र की राजनीति और जनचर्चा को प्रभावित किया है।