टांडा विधानसभा सीट - Ambedkar Nagar

टांडा

वर्तमान विधायक
श्री राम मूर्ति वर्मा
जिला
Ambedkar Nagar
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
समाजवादी पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
अंबेडकर नगर
चुनावी सीट प्रोफ़ाइल: टांडा विधानसभा क्षेत्र, अंबेडकर नगर
टांडा उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर ज़िले का एक ऐतिहासिक नगर और नगर पालिका परिषद है, जो घाघरा नदी के किनारे स्थित है। इसकी स्थापना 1714 में मुग़ल सम्राट फर्रुखसियार के शासनकाल में एक शाही जागीर के रूप में हुई थी। यह क्षेत्र अपने हथकरघा और पावरलूम उद्योगों (गमछा, लुंगी और शर्टिंग फैब्रिक निर्माण) के लिए प्रसिद्ध है, जिसके कारण इसे “बुनकर नगरी” कहा जाता है। टांडा ज़िला मुख्यालय अकबरपुर से लगभग 20 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित है और एक तहसील तथा औद्योगिक केंद्र के रूप में कार्य करता है।
जनसांख्यिकीय प्रोफ़ाइल
- जनसंख्या: नगर क्षेत्र: 95,516 (2011 जनगणना)
- साक्षरता दर: 77.6%
- धार्मिक संरचना (ज़िले के आंकड़ों के आधार पर):
- हिंदू: 82.81%
- मुस्लिम: 16.75%
- अल्पसंख्यक: ईसाई (0.11%), सिख (0.04%)
सामुदायिक संरचना
- अनुसूचित जातियाँ: 7,094
- मुख्य समुदाय: बुनकर
राजनीतिक रुझान और चुनावी इतिहास
टांडा विधानसभा राजनीतिक रुझान और चुनावी इतिहास
2022 विधानसभा चुनावी नतीजे
विजेता: राममूर्ति वर्मा (सपा)
वोट शेयर: 43.7%
उपविजेता: कपिलदेव वर्मा (भाजपा)
मतदान प्रतिशत: 66.1%
टांडा विधानसभा क्षेत्र (अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश) का राजनीतिक इतिहास जातीय समीकरण और पार्टी गतिशीलता पर आधारित रहा है। बसपा ने 1993 से 2007 तक लगातार जीत दर्ज की, जिसमें लालजी वर्मा छह बार विधायक बने, लेकिन 2017 में बीजेपी ने संजू देवी के माध्यम से पहली बार जीतकर सामाजिक समीकरण तोड़ा। 2022 के चुनाव में सपा ने मुस्लिम-दलित गठजोड़ के साथ राममूर्ति वर्मा को 95,263 वोट (43.49%) दिलाकर बीजेपी के कपिलदेव वर्मा को पराजित किया। यह सीट मुस्लिम और दलित मतदाताओं के प्रभाव वाली है, जहां बुनकर समुदाय और कृषि संकट प्रमुख मुद्दे रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से 1977 में जनता पार्टी से शुरू हुई इस सीट की राजनीति में 1985 तक कांग्रेस, 1990 के दशक में जनता दल और 2000 के बाद बसपा-सपा-बीजेपी के बीच टक्कर रही है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामले
राममूर्ति वर्मा, जो समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हैं, वर्तमान में उत्तर प्रदेश की टांडा विधानसभा सीट से विधायक हैं। 1 जनवरी 1965 को जन्मे वर्मा कृषि पेशे से जुड़े हैं और उन्होंने स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त की है (हालांकि अधूरी)। उनका राजनीतिक सफर 2012 में शुरू हुआ जब वे अकबरपुर सीट से विधायक चुने गए और अखिलेश यादव सरकार में पशुधन एवं डेयरी विकास मंत्री बने। 2017 में उन्हें अकबरपुर से करीबी अंतर से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2022 में उन्होंने टांडा सीट से भाजपा के कपिलदेव वर्मा को 32,097 वोटों के अंतर से हराकर पुनः विधानसभा में वापसी की। इसके अतिरिक्त, वे सपा के जिलाध्यक्ष के रूप में तीन कार्यकाल पूरे कर चुके हैं। चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामला दर्ज हैं।
टांडा विधानसभा के पिछले 5 साल
पिछले पाँच वर्षों में विधानसभा क्षेत्र कई महत्वपूर्ण समस्याओं से जूझता रहा है। क्षेत्र की पहचान रहे कपड़ा बुनाई उद्योग में कार्यरत बुनकर समुदाय को कच्चे माल की महँगाई, मशीनीकरण और बाजार तक सीमित पहुँच के चलते आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है, जबकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से नहीं मिल सका। वहीं, कृषि क्षेत्र भी सिंचाई सुविधाओं की कमी, अनियमित बिजली आपूर्ति और जल निकासी की समस्या के कारण प्रभावित हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं के स्तर पर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी और चिकित्सा स्टाफ की गैरमौजूदगी ने ग्रामीण आबादी को निजी अस्पतालों पर निर्भर बना दिया है, जो आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार की माँग लगातार उठती रही है, विशेषकर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और डिजिटल ढाँचे की कमी महामारी के दौरान स्पष्ट रूप से सामने आई। राजनीतिक दृष्टिकोण से, 2017 में भाजपा की संजू देवी ने सपा के अजीमुल हक पहलवान को मामूली अंतर से हराया था, जिससे दलित-पिछड़ा वर्ग के बीच बदलते राजनीतिक समीकरणों की झलक मिली, हालाँकि विकास के मुद्दों की अनदेखी को लेकर आलोचना होती रही है। साथ ही, बुनियादी ढाँचे जैसे सड़कों की खराब हालत, पेयजल आपूर्ति की कमी और सार्वजनिक परिवहन के अभाव ने क्षेत्र की जनजीवन को प्रभावित किया है, जिसमें मानसून के दौरान जलभराव की समस्या विशेष रूप से गंभीर रहती है।

उत्तर प्रदेश लेटेस्ट न्यूज़